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दुनिया

ताकि सुंदर बन सके उनका जीवन

महिला अधिकार कार्यकर्ता और कानूनी विशेषज्ञ भारत में महिलाओं पर बढ़ते एसिड हमलों को रोकने के लिए कानूनों को और सख्त बनाने की मांग कर रहे हैं.

एसिड हिंसा की चुनौतियां और उपाय विषय पर हुए एक सेमिनार में सेमिनार में पीड़ितों के इलाज और पुनर्वास के लिए मुआवजा देने पर भी जोर दिया गया. एसिड हमलों की शिकार कई युवतियों ने भी अपनी आपबीती सुनाई. महिलाओं पर एसिड हमलों के बढ़ते मामलों के बीच हुए सेमिनार का सिक्किम हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश मलय सेन गुप्ता ने उद्घाटन किया. इसमें हिस्सा लेने वाले विशेषज्ञों ने कहा कि ऐसे हमलों की शिकार युवतियों और महिलाओं को आजीवन त्रासदी से बचाने के लिए इलाज और पुनर्वास के लिए मुआवजे का ठोस प्रावधान होना चाहिए ताकि इनका जीवन सुंदर बनाया जा सके.

एसिड हमलों की शिकार होने वाली महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए एक ठोस कानूनी रणनीति की भी जरूरत है. नेशनल यूनिवर्सिटी आफ जुडीशियल साइंसेज के वाइस-चांसलर ईश्वर भट्ट ने कहा, "ऐसे हमलों को रोकने के लिए एसिड की बिक्री पर अंकुश लगाने के ठोस उपाय जरूरी हैं." उन्होंने कहा कि जांच में पुलिस की मदद के लिए पीड़िता और उसके परिजनों में भी जागरुकता पैदा करनी होगी. ह्यूमन राइट्स लॉ नेटवर्क के संयोजक देवाशीष बनर्जी ने कहा, "एसिड की आसान उपलब्धता इन हमलों की सबसे बड़ी वजह है. मुआवजे के मामले में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों को हर राज्य में कड़ाई से लागू किया जाना चाहिए."

आपबीती
सेमिनार में मौजूद कई पीड़ित महिलाओं ने भी अपनी आपबीती सुनाई. उत्तर 24-परगना जिले की गायत्री ने कहा, "पड़ोसी का प्रेम प्रस्ताव खारिज करने की वजह से उस पर हमला हुआ. उसके बाद उसका चेहरा तो कुरूप हुआ ही, पिछले पांच वर्षों से सामाजिक जीवन कहीं ज्यादा बदसूरत हो गया है. इलाज के लिए कहीं से कोई पैसे नहीं मिले. अपराधी भी जमानत पर बाहर है.

दार्जिलिंग से आई मीरा तो धोखे से इस हमले का शिकार हो गई. अभियुक्त ने उसकी सहेली की बजाय उस पर तेजाब फेंक दिया. दर-दर की ठोकरें खाने के बावजूद वह अब तक मुआवजे व न्याय के लिए तरस रही है. कई अन्य युवतियां भी इस हादसे का शिकार होकर नरक से भी बदतर जीवन गुजारने को मजबूर हैं.

उपाय
कानून व्यवस्था से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि तेजाबी हिंसा को रोकने के लिए सरकारों और सामाजिक संगठनों को मिल कर काम करना होगा. इसके अलावा समाज में भी ऐसी हिंसा के प्रति जागरुकता जरूरी है. एक गैर-सरकारी संगठन के प्रमुख राहुल वर्मा ने कहा, "भारत एक विशाल प्रदेश है. इसलिए इस हिंसा पर अंकुश लगाने के लिए भी बड़े पैमाने पर काम होना जरूरी है." उनका कहना था कि ऐसे मामले में अभियुक्तों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान किया जाना चाहिए.

इसके अलावा पीड़िता के इलाज और पुनर्वास का पूरा खर्च उसे मिलना चाहिए. न्यायमूर्ति सेनगुप्ता ने कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिशानिर्देश दे रखे हैं. उन्होंने उसे कड़ाई से लागू करने की मांग की और कहा कि पूरे देश में तेजाब की बिक्री का नियमन होना चाहिए. ऐसे मामलों में पुलिस को भी गंभीरता से कार्रवाई करते हुए दोषियों को शीघ्र गिरफ्तार करना चाहिए. तभी इस आपराधिक और सामाजिक समस्या पर अंकुश लगाया जा सकता है.
रिपोर्ट: प्रभाकर, कोलकाता

संपादन: महेश झा

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