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दुनिया

"ताइवान और तिब्बत पर कोई तर्क नहीं"

चीनी राष्ट्रपति ने अमेरिकी दौरे में जहां यह कह अपने मेजबानों के मन की बात कह दी कि चीन में मानवाधिकारों को लेकर काफी कुछ किया जाना बाकी है, वहीं यह भी साफ किया कि ताइवान और तिब्बत के मामले पर दबाव नहीं सहन करेंगे.

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व्हाइट हाउस में शानदार स्वागत के बाद कैपिटल हिल में चीनी राष्ट्रपति का स्वागत हल्का ही कहा जाएगा. वहां अमेरिकी सांसदों ने आर्थिक चिंताओं और मानवाधिकारों के रिकॉर्ड को लेकर चीनी राष्ट्रपति पर दबाव डालने की कोशिश की. इस दौरान सजा काट रहे नोबेल पुरस्कार विजेता लिऊ शियाओपो का मुद्दा भी उठा. इसके बाद जिनताओ ने उद्योगपतियों और राजनेताओं को संबोधित किया. इसमें उन्होंने आपसी सम्मान की बात की. उनके मुताबिक, "चीन और अमेरिका के संबंध ऐसे नहीं है जिनमें एक पक्ष के फायदे का मतलब दूसरे पक्ष का नुकसान ही होता है. यह कहना होगा कि हमारे दोनों देशों के बीच कभी इस तरह के व्यापक हित नहीं रहे हैं जैसे अब हैं."

NO FLASH Symbolbild USA CHINA Besuch Hu Jintao

ताइवान और तिब्बत पर उलटा जवाब

ताइवान और तिब्बत के बारे में हू ने कहा, "हमारे संबंधों के इतिहास की समीक्षा से पता चलता है कि चीनी-अमेरिकी संबंध तभी सुगम और लगातार मजबूत होंगे जब दोनों देश एक दूसरे के व्यापक हितों से जुड़े मुद्दों पर सावधानी बरतें. वरना हमारे संबंधों में लगातार बाधाएं आती रहेंगी." चीन ताइवान को अपना ही हिस्सा समझता है. स्वशासित ताइवान की स्थापना चीन के हारे हुए राष्ट्रवादियों ने की. वहीं अधिकतर बौद्ध आबादी वाले तिब्बत को अपने साथ मिलाने के लिए चीन ने 1950 में वहां सेना भेजी.

राष्ट्रपति ओबामा ने बुधवार को हू के साथ साझा प्रेस कांफ्रेस में ताइवान और तिब्बत पर अमेरिका के रुख को दोहराया और कहा कि दोनों ही इलाके चीन का हिस्सा हैं. लेकिन उन्होंने चीन से तिब्बत के निर्वासित आध्यात्मिक नेता दलाई से बातचीत करने को भी कहा जो अमेरिका में बहुत बहुत लोकप्रिय हैं. ओबामा ने चीन की बढ़ती सैन्य ताकत के मद्देनजर ताइवान की रक्षा की वचनबद्धता भी दोहराई.

Hu Jintao und Barack Obama No Flash

सैन्य ताकत पर चिंता

अमेरिका और एशिया में उसके सहयोगी चीन की बढ़ती सैन्य ताकत से चिंतित हैं. चीन ने हाल के सालों में अपने रक्षा खर्चा में भारी बढ़ोतरी की है. इसी महीने चीन ने अपने यहां बने एक लड़ाकू विमान का परीक्षण भी किया. हालांकि हू ने इन चिंताओं को खारिज करते हुए कहा, "हम हथियारों की दौड़ में शामिल नहीं हैं और किसी देश के लिए कोई खतरा भी नहीं है."

इस बीच न्यूयॉर्क टाइम्स ने खबर दी है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा ने चीनी राष्ट्रपति से कहा है कि अगर उनका देश उत्तर कोरिया पर दबाव डालने में नाकाम रहा तो फिर अमेरिका को क्षेत्र में अपनी सेना तैनात करनी होगी. अखबार ने एक वरिष्ठ राजनयिक के हवाले से कहा कि पिछले महीने ओबामा ने टेलीफोन बातचीत के दौरान चीनी राष्ट्रपति को यह चेतावनी दी. व्हाइट हाउस में दी गई दावत के दौरान इस बात को दोहराया गया.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए कुमार

संपादनः वी कुमार

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