1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

ब्लॉग

तन ही नहीं जीवन झुलसाता तेजाब

एसिड हमला करने वालों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान, जुर्माने और पीड़ित के लिए जल्दी न्याय की व्यवस्था है. लेकिन अपराधियों के मन में इन सबका डर नहीं बल्कि भरोसा है कि कई दूसरे मामलों की ही तरह बच निकलना मुश्किल ना होगा.

दो साल पहले ही एसिड हमले के दोषियों के लिए 10 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान किया गया. लगातार बढ़ रही वारदातों के चलते क्रिमिनल लॉ में संशोधन हुआ, जिसमें अप्रैल 2014 में कुछ और सुधार लाए गए. तेजाब की खरीद-फरोख्त के नियम कड़े किए गए और उन्हें पहचान पत्र या पते के साक्ष्यों के साथ जोड़ने की कोशिश हुई. लेकिन हमेशा की तरह कुछ लूपहोल रह गए, जिनका फायदा उठा कर अब भी कोई भी कुत्सित मानसिकता वाला इंसान जब चाहे अपनी नजदीकी दुकान से तेजाब खरीद कर उसका मनचाहा इस्तेमाल कर सकता है और ऐसा हो भी रहा है.

Deutsche Welle DW Ritika Rai

ऋतिका राय, डीडब्ल्यू

कानून में पीड़ितों के लिए मुआवजा और उनके लिए मुफ्त इलाज की भी व्यवस्था है. इसके अलावा तेजाबी हमलों के पीड़ितों को जल्द न्याय दिलाने के लिए इन मामलों की कार्यवाही तय समय सीमा में पूरा करने की भी कोशिश है. लेकिन यह एक ऐसा अपराध है जो केवल कड़े नियम कानूनों से नियंत्रण में नहीं आने वाला. तेजाब फेंके जाने के ज्यादातर मामलों में अपराध की जड़ में बदले और सबक सिखाने की भावना पाई गई. इसकी जड़ में भी वही कोढ़ दिखता है जो बलात्कार की कई घटनाओं का कारण बनता है. महिलाओं के चेहरे-मोहरे, कपड़ों और बर्ताव के लिए हर समाज के पुरुष वर्ग ने सदियों से अपनी सुविधा को ध्यान में रखते हुए जो सख्त नियम बना रखे थे, वही आज बदलते समय के साथ पुरुषों के बराबर ही नहीं उनसे आगे भी निकल रही महिलाओं के खिलाफ उनके रवैये में भी झलकता है.

घर में बहन, पत्नी और बेटी के साथ परिवार के पुरुषों का बर्ताव बचपन से ही छोटे लड़कों के जेहन में एक गाइडलाइन बनता है. यही लड़के बड़े होकर अपनी क्लास में सहपाठी लड़की के साथ या गर्लफ्रेंड के साथ कैसे पेश आते हैं, वह काफी हद तक उसी सीख का प्रतिबिंब होता है. अगर घर में लड़का होने के कारण ही उनकी हर बात मानी जाती रही है तो फिर बाहर की किसी लड़की से भी वे ऐसे ही बर्ताव की उम्मीद करते हैं. आश्चर्य नहीं कि तथाकथित एकतरफा प्रेम के मामले सबसे ज्यादा एसिड हमलों की वजह बनते हैं. किसी लड़की का इनकार लड़के के दिमाग में गहरी पैठ चुकी खुद की सुपीरियर इमेज के साथ सही नहीं बैठता और वह बौखला कर आपा खो देता है.

यह सबक हर घर में सिखाना होगा कि बिना सही गलत का ख्याल किए हर मामले में अपनी मर्जी चलाना और लड़की की वैयक्तिकता और उसकी मर्जी का महत्व ना समझना गलत है. जब इनकी नींव परिवार में पड़ेगी तभी आने वाली पीढ़ी के लिए यह बीते समय की एक कुरूप कुप्रथा के रूप में सीमित रह पाएगी. तब तक कानूनों का सख्ती से पालन और पीड़ितों के लिए पुनर्वास की अच्छी सुविधाएं दिलाना जरूरी है.

चेहरे के साथ इंसान की पहचान जुड़ी होती है लेकिन याद रखना चाहिए कि जब कोई बच्चा मां के गर्भ में होता है, तब तो मां बिना उसका चेहरा देखे ही उससे इतना प्रेम करती है. जीवन में चेहरे की सुंदरता से कहीं कीमती है खुद जीवन. किसी अपराध का शिकार बनने के बावजूद अपना आत्मविश्वास बरकरार रखना हमलावर के मुंह पर सबसे बड़ा तमाचा होगा.

ब्लॉग: ऋतिका राय

DW.COM

संबंधित सामग्री