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दुनिया

तनाव भरी शांति में फैजाबाद

फैजाबाद में शांति है, बाजार खुल गए हैं, दिन निकलते ही कर्फ्यू भी उठा लिया जाता है. दिनचर्या सामान्य नजर आ रही है लेकिन कभी अवध की राजधानी रहा ये शहर अन्दर-अन्दर सुलग रहा है.

इस शांति के अन्दर तनाव छुपा है जिसे कुछ लोग अगले तूफान से पहले की शांति भी बता रहे हैं. करीब आठ किलोमीटर दूर सरयू नदी के किनारे बसा अयोध्या भी फैजाबाद के इस तनाव की आहट महसूस कर रहा है.

फैजाबाद की सांप्रदायिक हिंसा बीजेपी के हाथ से निकलते अयोध्या मुद्दे का नतीजा लगता है. राम मंदिर आन्दोलन शुरू होने के बाद बीजेपी ने अयोध्या-फैजाबाद की सीट हथियाने के साथ पूरे जिले में अपनी जड़ें जमा लीं. उसके लल्लू सिंह 1991 से लगातार अयोध्या-फैजाबाद सीट से जीतते रहे. उन्हें 22 साल बाद समाजवादी पार्टी के तेज नारायण पाण्डेय ने हाल के चुनावों में में हराया. यही नहीं इस चुनाव में पूरे जिले में बमुश्किल एक सीट बीजेपी जीत सकी. लोकसभा सीट कांग्रेस ने हथिया ली. लोगों का मानना है कि फैजाबाद-अयोध्या में बीजेपी अपनी हार पचा नहीं पा रही है. बीजेपी राज्य प्रवक्ता विजय पाठक इसे बकवास बताते हैं.

देवभूमि में हिंसा

1992 में जब अयोध्या का विवादित ढांचा ढहाया गया था और लगभग आधे भारत में हिंसा फैल गई थी, तब भी फैजाबाद में ऐसी हिंसा और आगजनी नहीं हुई थी जैसी इस बार हुई. तब फैजाबाद में एहतियातन कर्फ्यू लगाया गया था. तब किसी हिन्दू ने मुस्लिम को निशाना नहीं बनाया था और न किसी मुस्लिम ने हिन्दू को. लेकिन इस बार फैजाबाद के मुसलमानों को निशाना बनाया गया. उनकी दुकानें जलाई गईं. फैजाबाद के चौक की जिस मस्जिद से पिछले साल दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के जुलूस पर फूल बरसाए गए थे उसी मस्जिद को इस साल प्रतिमा विसर्जन के दौरान ही निशाना बनाकर दुकानें जला दी गईं. इनमें कुछ तो इस ऐतिहासिक मस्जिद की ही संपत्ति हैं.

यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि सब कुछ सोचा समझा और पूर्व नियोजित था. अखिलेश यादव का ये कहना भी फैजाबाद के हालात सही साबित कर रहे हैं कि कुछ लोग यूपी को साम्प्रदायिक आग में झोंक देना चाहते हैं.

1990 Unruhen vor der Babri-Moschee vor der Zerstörung 1992

बाबरी मस्जिद

दंगाइयों ने पुलिस को नाकाम करने के लिए समय का पूरा ध्यान रखा. दशहरे के दिन शाम 4 बजे रुदौली में , उसके दो घंटे बाद 6 बजे रुदौली से 40 किलोमीटर दूर फैजाबाद में, फिर दो घंटे बाद 8 बजे फैजाबाद से 20 किलोमीटर दूर भदरसा में और फिर एक घंटे बाद 9 बजे भदरसा से 35 किलोमीटर दूर शाहगंज में लूटपाट, आगजनी और चाकूबाजी की घटनाओं को अंजाम दिया गया. ये सारे क्षेत्र फैजाबाद-अयोध्या के आस पास हैं. इस हिंसा में दो लोग मारे गए और दो दर्जन से ज्यादा जख्मी हुए. कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए.

मुआवजे पर राजनीति

जिनकी दुकानें जलीं उनको मुआवजा देने के लिए जिला प्रशासन कैम्प लगा रहा है. आरोप है कि उसमें पक्षपात किया जा रहा है. फैजाबाद निवासी त्रियुग नारायण तिवारी के मुताबिक विश्व हिन्दू परिषद अब इस मुआवजे पर सियासत कर रहा है. कहा जा रहा है कि जिन हिन्दूओं की दुकानें जली उनको मुआवजा नहीं दिया जा रहा है. तिवारी के मुताबिक इससे हिन्दुओं का बड़ा वर्ग बीजेपी के पक्ष में गोलबंद हो रहा है और बीजेपी यही चाहती है.

अखिलेश यादव की सरकार बनने के बाद पिछले सात महीनों में सात जगहों पर दंगे हुए हैं. मथुरा के कोसी कलां में हिंसा हुई जिसमें तीन मरे. फिर प्रतापगढ़ में हिंसा हुई. उसके बाद बरेली में कावण यात्रा और जन्माष्टमी पर हिंसा हुई जिसमें तीन मरे. गाजियाबाद के मसूरी में हिंसा हुई छह मरे. इलाहाबाद, कानपुर और लखनऊ में भी सांप्रदायिक झड़पें हुईं. कर्फ्यू लगा. उसके बाद बाराबंकी और फैजाबाद में हिंसा हुई जहां दो मरे.

रिपोर्ट: एस. वहीद, लखनऊ

संपादन: महेश झा

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