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विज्ञान

तट की निगरानी करेगा मोबाइल सिग्नल

जर्मन वैज्ञानिकों ने तटीय क्षेत्रों और बंदरगाहों के लिए निगरानी का एक नया सिस्टम तैयार किया है. इसका उद्देश्य स्पीड बोट के माध्यम से किनारे तक पहुंचने वाले आतंकवादियों का पता लगाना है. इस काम में फोन सिग्नल मदद करता है.

यह प्रणाली नाव या स्पीड बोट्स की मदद से आतंकवादियों के तट तक पहुंचने की कोशिश का पता लगा लेगी. आतंकवादी कई बार तटों का इस्तमाल विस्फोटक लाने के लिए भी करते हैं. ऐसे में प्रणाली उनकी गतिविधियों को रोक पाएगी. समाचार एजेंसी डीपीए के मुताबिक यह प्रणाली पैसिव कोहिरेन्ट लोकेशन (पीसीएल) पर आधारित है, जिसमें निष्क्रिय रडार होता है और उसमें रिसीवर तो होता ही है लेकिन ट्रांसमीटर नहीं होता. इसके बजाय यह प्रणाली मोबाइल टेलीफोन बेस स्टेशन टावरों से लगातार निकलने वाले सिग्नल पर निर्भर रहता है. यह सिग्नल किसी विशेष क्षेत्र में मौजूद वस्तुओं से प्रतिबिंबित होकर रिसीवर तक पहुंचता है और उसकी समीक्षा होती है. हालांकि पारंपरिक रडार की तुलना में यह प्रणाली थोड़ी जटिल है.

इस तकनीक को जर्मनी के बॉन शहर में फ्राउनहोफर इंस्टीट्यूट फॉर कम्युनिकेशन, इनफॉरमेशन प्रोसेसिंग एंड एर्गोनोमिक्स (एफकेआईई) ने तैयार किया है. प्रोजेक्ट मैनेजर रेडा सेमारी का कहना है कि इस प्रणाली के परीक्षण के दौरान एफकेआईई के वैज्ञानिकों ने छोटे स्पीड बोट्स का सफलतापूर्वक पता चार किलोमीटर की दूरी से ही लगा लिया. सेमारी कहते हैं कि इलेक्ट्रो ऑप्टिकल या इंफ्रारेड सिस्टम से युक्त पीसीएल स्पीड बोट्स की पहचान और उसे वर्गीकृत करने में सक्षम बनाता है. इन स्पीड बोट्स का इस्तेमाल समुद्री लुटेरे बड़े जहाजों को लूटने के लिए करते हैं. वह कहते हैं, "मोबाइल फोन रडार को आसानी से कार ट्रेलर के जरिए कहीं भी ले जाया जा सकता है और उसे बहुत आराम के साथ स्थापित किया जा सकता है."

निगरानी वाले इलाके में पर्याप्त मोबाइल कवरेज होनी चाहिए. हालांकि एफकेआईई के मुताबिक पीसीएल हवाई जहाजों और हेलिकॉप्टरों को पवन चक्कियों से टकराने से रोकने में भी मदद कर सकता है. पवन चक्कियों के ऊंचे खंभों में लाल बत्ती लगी होती है जो रात में पायलट को चेतावनी देती है. लेकिन कई लोगों को जलती बुझती बत्ती के कारण परेशानी भी होती है. इसलिए वैज्ञानिकों ने उम्मीद जताई है कि पवन चक्कियों पर विमानों के आगमन के बारे में बताने वाले डिटेक्टर लगाए जा सकते हैं, जिनकी मदद से लाल बत्ती सिर्फ तभी जले जब कोई जहाज पवन चक्की के नजदीक पहुंचे.

एए/एजेए (डीपीए)

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