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खेल

तकनीक बड़ी या खिलाड़ी

इस जमाने में कोई नहीं कह सकता कि खेल जीतना सिर्फ खिलाड़ी की क्षमता पर निर्भर है. नए उपकरण और नई तकनीक भी खिलाड़ी के जीतने के मौके को प्रभावित करती हैं.

योसेफ पेट्रुलाक स्लोवाकिया का खिलाड़ी है. सोची ओलंपिक में वह स्लेज चैंपियनशिप में हिस्सा ले रहा है. 19 साल के योसेफ के स्लेज की उम्र उससे ज्यादा है, करीब 22 साल. स्लेज प्रतियोगिता में उसके जर्मन प्रतिद्वंद्वियों को हर साल बीएमडब्ल्यू नया स्लेज दिलाती है. चैंपियनशिप कौन जीतेगा, यह अभी से लगभग तय है.

तकनीक के सहारे खेल

आजकल किसी खेल में जीत हासिल करना खिलाड़ी की क्षमता के साथ साथ उसके उपकरणों की तकनीक पर निर्भर है. खेल तकनीक के बढ़ते बाजार में ओलंपिक के लिए अमीर और गरीब देशों में फासला बढ़ता जा रहा है. अच्छे खासे पैसों वाली टीमों को उनकी सरकार और कंपनियां अच्छे उपकरण और ट्रेनिंग दिलाती हैं. उनके उपकरण वैज्ञानिकों की मदद से बनाए जाते हैं. यह खिलाड़ी मेडल जीतते हैं जिससे दुनिया भर का ध्यान इनकी ओर खिंचता है, दुनिया भर से कंपनियां भी इन टीमों को स्पॉन्सर करने आती हैं और इन्हें अपनी ट्रेनिंग के लिए और पैसा मिलता है.

अमेरिका के स्लेज खिलाड़ी मैट मोरटेनसेन कहते हैं, "जब किसी खेल में सेकेंड का 1000वां हिस्सा भी गिना जा रहा है तो आपकी हर छोटी हरकत से फर्क पड़ेगा. जूते, हेल्मेट, सूट, पोजिशन, एरोडाइनमिक्स, हर चीज से फर्क पड़ता है." ओलंपिक में स्कीयर अपने स्कीज पर जिस तरह का मोम लगाते हैं, उससे भी फर्क पड़ता है. 500 अलग तरह के मोम मिलते हैं और इन्हें स्की पर लगाने के लिए खास तकनीकी विशेषज्ञ होते हैं.

गरीब खिलाड़ी क्या करेंगे

अमेरिका में लूज यानी स्लेज चलाने वाली टीम को स्नोबोर्डिंग टीमों के मुकाबले कम पैसे मिलते थे लेकिन हाल ही में डाउ केमिकल्स और बीएमडब्ल्यू ने दिलचस्पी दिखाई. इटली की स्लेज टीमों को फरारी से पैसा मिलता है और फॉर्मूला वन का मैकलैरन ब्रिटेन की टीमों की मदद करता है. निजी कंपनियों से निवेश को संतुलित करने के लिए ओलंपिक समिति ने गरीब खिलाड़ियों को मदद देने की कई योजनाएं बनाई हैं. उन्हें नए उपकरण भी दिए जाते हैं.

हो सकता है कि कुछ खिलाड़ियों को उनके प्रतिद्वंद्वियों के बेहतर उपकरणों से नुकसान पहुंचे, लेकिन तकनीक ने खेल के परिणामों को और निष्पक्ष कर दिया है. कैमरे के जरिए ओलंपिक खेलों में पता लगाया जा सकता है कि किस खिलाड़ी ने कितनी देर में फासला तय किया या वह बाउंडरी से बाहर गया या नहीं. जहां तक निजी प्रायोजकों की बात है, वहां गरीब देशों के खिलाड़ी भी फायदा उठा सकते हैं. जमैका के यूसेन बोल्ट को अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति से आर्थिक मदद मिलती थी. लेकिन उनका प्रदर्शन इतना शानदार रहा कि निजी कंपनियां खुद उनके कपड़े और जूते स्पॉन्सर करना चाहती हैं.

खिलाड़ी बड़ा या तकनीक, इस सवाल का जवाब आसान है. दोनों अगर अच्छे हों, तो खिलाड़ी का प्रदर्शन अच्छा रहेगा. लेकिन तकनीक जैसी भी है, खिलाड़ी को तो अपनी प्रतिभा दिखानी ही पड़ेगी.

एमजी/एमजे(एपी)

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