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दुनिया

तंबाकू पर अंकुश लगाने के उपायों पर विचार करेगा सम्मेलन

भारत में सात नवंबर से तंबाकू निरोधक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शुरू हुआ है जिसमें दुनिया में इस खतरनाक पदार्थ के बढ़ते सेवन पर अंकुश लगाने के उपायों पर विचार किया जाएगा.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के "फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन टोबैको कंट्रोल" (एफसीटीसी) का द्विवार्षिक सम्मेलन 12 नवंबर तक चलेगा. तंबाकू के सेवन के चलते दुनिया भर में बढ़ती बीमारियों को ध्यान में रखते हुए तंबाकू उत्पादों के अवैध व्यापार पर अंकुश लगाने के तरीके तलाशना ही सम्मेलन के सामने सबसे बड़ी चुनौती है. इस दौरान तंबाकू पर एक अंतरराष्ट्रीय करार की भी उम्मीद है. भारत में कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और इसकी वजह से दुनिया भर में यह छठे स्थान पर पहुंच गया है. उधर, आपसी रिश्तों में तनाव के चलते पाकिस्तान ने इस सम्मेलन में हिस्सा लेने से इंकार कर दिया है. पाकिस्तान की स्वास्थ्य विज्ञान नियमन और समन्वय राज्य मंत्री सायरा अफजल तरार ने माना है कि तंबाकू पर होने वाली यह बैठक काफी अहम है. लेकिन वह कहती है कि मौजूदा तनाव को देखते हुए पाकिस्तान की भागीदारी व्यावहारिक नहीं है.

सम्मेलन

यह विश्व स्वास्थ्य संगठन के फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन टोबैको कंट्रोल का सातवां सम्मेलन है. इसके आयोजन की शुरुआत वर्ष 2005 में हुई थी. हर दो साल पर आयोजित होने वाला यह सम्मेलन भारत में पहली बार हो रहा है. इसमें दुनिया भर के 180 देशों के लगभग डेढ़ हजार प्रतिनिधियों के अलावा कैंसर विशेषज्ञ व सरकारी और गैर-सरकारी कैंसर संस्थान भी हिस्सा ले रहे हैं. देश में इस सम्मेलन के आयोजन में केंद्र सरकार और नेशनल इंस्ट्टीयूट ऑफ कैंसर प्रिवेन्शन एंड रिसर्च के तहत चलने वाले वर्ल्ड नॉलेज हब ऑन स्मोकलेस टोबैको की अहम भूमिका होगी. पूरी दुनिया में कैंसर की सबसे बड़ी वजह तंबाकू ही है. इसलिए अब दुनिया के सभी देश तंबाकू उत्पादों के अवैध व्यापार को रोकने के लिए इसी सम्मेलन से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष का बिगुल बजाएंगे.

सम्मेलन के दौरान भारत इसके एजंडे में धुआंरहित तंबाकू को शामिल करने पर भी जोर देगा. इसकी वजह यह है कि देश में अधिक से अधिक लोग अब धुआंरहित तंबाकू का सेवन कर रहे हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक, आम लोगों की आदत में इस बदलाव को ध्यान में रखते हुए धुआंरहित तंबाकू को भी सम्मेलन के एजेंडे में शामिल करने पर जोर दिया जाएगा. सरकारी सूत्रों का दावा है कि भारत ने पहले आयोजित ऐसे सम्मेलनों के फैसलों को लागू करने की दिशा में अहम कदम उठाए हैं. मिसाल के तौर पर पिछले सम्मेलन के फैसले के मुताबिक नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ कैंसर प्रिवेन्शन एंड रिसर्च के तहत चल रहे वर्ल्ड नॉलेज हब ऑन स्मोकलेस टोबैको की स्थापना की गई है. केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव सी.के.मिश्र कहते हैं, "यह सम्मेलन हमारे लिए बेहद अहम है. हम इसमें यह दिखा सकते हैं कि भारत ने दूसरे देशों से क्या सीखा है और तंबाकू पर अंकुश लगाने की दिशा में क्या व कितना काम किया है."

भारत ने तंबाकू उत्पादों पर 85 फीसदी तक वैधानिक चेतावनी छापने की व्यवस्था तो लागू कर दी है. सम्मेलन में इस मुद्दे पर भी विचार किया जाएगा कि क्या तमाम ब्रांडों की पैकिंग एक जैसी की जाए. इससे पैकेट से ब्रांड नाम का पता नहीं चलेगा. बीते कुछ अरसे से इस मुद्दे पर चर्चा हो रही है, लेकिन अब तक कोई फैसला नहीं हो सका है. सम्मेलन में पूरी दुनिया में तंबाकू से होने वाले कैंसर को रोकने के लिए प्रभावी कदमों पर विचार-विमर्श के बाद तंबाकू पर नियंत्रण के उपायों पर दिल्ली घोषणापत्र जारी किया जाएगा.

कैंसर के बढ़ते मामले

भारत में कैंसर को लेकर एक परेशान करने वाला तथ्य सामने आया है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में सालाना कैंसर के कुल मामलों में से अकेले सिर और गले के कैंसर के साढ़े पांच लाख से अधिक मामले सामने आ रहे हैं. कैंसर के बढ़ते मामलों के चलते दुनिया के तमाम देशों में भारत छठे नंबर पर पहुंच गया है. भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की ताजा रिपोर्ट के आधार पर विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में हर साल लगभग आठ लाख कैंसर के नए मामले सामने आते हैं. उनमें अकेले सिर और गले के कैंसर के साढ़े पांच लाख मामले होते हैं. विशेषज्ञों की राय में बदलती जीवनशैली भी कैंसर के बढ़ते मामलों की एक प्रमुख वजह है. उनके मुताबिक, कैंसर के 80 फीसदी से अधिक मामलों में तंबाकू का सेवन प्रमुख वजह है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने धुआंरहित तंबाकू के दुष्प्रभावों को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2005 में फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन टोबैको कंट्रोल (एफसीटीसी) का गठन किया था. इसका मकसद विश्व में तंबाकू के अवैध व्यापार को रोकना है. भारत भी इस संगठन का सदस्य है. वर्ष 2014 में मास्को में आयोजित छठे सम्मेलन में धुआंरहित तंबाकू को वैश्विक स्वास्थ्य समस्या करार दिया गया था. भारत और बांग्लादेश में धुआंरहित तंबाकू के बढ़ते इस्तेमाल और कुप्रभाव को ध्यान में रखते हुए इसी साल अप्रैल में दिल्ली से सटे नोएडा ग्लोबल नॉलेज हब ऑन टोबैको की स्थापना की गई है. यह संस्था पूरी दुनिया को तंबाकू के कुप्रभावों और इस पर हुए शोध और इलाज के बारे में जानकारी उपलब्ध करा रही है.

विशेषज्ञों को उम्मीद है कि देश में पहली बार होने वाले इस सम्मेलन से शायद तंबाकू पर अंकुश लगाने के ठोस उपाय सामने आएं और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों पर भी लगाम लगाना संभव हो सके.

रिपोर्टः प्रभाकर

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