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जर्मन चुनाव

डॉ सेन को रिहा कराए सरकार: एमनेस्टी इंटरनेशनल

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ बिनायक सेन की सजा की आलोचना की है. एमनेस्टी इंटरनेशनल ने सरकार से मामले में दखल देने को कहा है. फेसबुक पर छिड़ी बिनायक की सजा पर बहस.

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एमनेस्टी इंटरनेशनल ने डॉ सेन को दी गई सजा की कड़ी अलोचना करते हुए कहा कि अदालती फैसला निष्पक्ष सुनवाई के बिना किया गया. एमनेस्टी के मुताबिक डॉ सेन के मामले में अंतरराष्ट्रीय मानकों के हिसाब से पारदर्शी सुनवाई नहीं हुई. संस्था ने सरकार से अपील की है कि वह मामले में दखल दे और सेन की रिहाई सुनिश्चित करे.

एमनेस्टी के अलावा सामाजिक और मानवाधिकार संस्थाओं से जुड़े लोग रायपुर अदालत के फैसले का विरोध करने लगे हैं. सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर कई लोगों ने लिखा है कि, ''इस देश में कलमाड़ी, नीरा राडिया या ए राजा को सजा नहीं होगी. लेकिन झोला लेकर आम लोगों की मदद के लिए जाने वाले, उनके हितों के लिए लड़ने वाले सलाखों के पीछे ज़रूर डाल दिया जाएगा.''

कुछ सामाजिक संगठनों का कहना है कि डॉ सेन पर लगाए गए आरोप राजनीति से प्रेरित हैं. सरकार को आगाह करते हुए कहा गया है कि अगर ऐसा ही रहा तो देश के हिंसा प्रभावित इलाकों में और गंभीर हालात पैदा हो जाएंगे.

मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ सेन को शुक्रवार को छत्तीसगढ़ की रायपुर अदालत ने देशद्रोह और विश्वासघात का दोषी करार दिया और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई. सेन पर माओवादियों की मदद करने का आरोप लगाया गया है. उनके साथ नक्सल नेता नारायण सान्याल और कोलकाता के व्यापारी पीयूष गुहा को भी माओवादी तंत्र की मदद करते हुए देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने का दोषी करार दिया गया. इन दोनों को भी उम्रकैद की सजा सुनाई गई.

डॉक्टर सेन को 2007 में गिरफ्तार किया गया था. वह माओवादियों से संबंध रखने से इनकार करते हैं. तीन साल पहले गिरफ्तारी के वक्त उन्होंने कहा था, "मैंने कभी माओवादी हिंसा का समर्थन नहीं किया. यह गलत है और लंबे समय तक चलने वाला आंदोलन नहीं है." बहरहाल रायपुर अदालत के फैसले के खिलाफ डॉ सेन ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटाने की बात कह रहे हैं.

रिपोर्ट: एजेंसियां/ओ सिंह

संपादन: एस गौड़

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