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मंथन

डॉक्टर बनने के लिए जर्मन सीखना जरूरी

मंथन में डॉक्टर प्रीति सिंह हुस्गेन से दांतों की सेहत के बारे में बताया. 11 साल से डॉक्टर प्रीति सिंह अपने पति और बच्चों के साथ जर्मनी में रह रही हैं. जानिए कैसा रहा उनका जर्मनी का अनुभव.

डॉयचे वेले: आपने जर्मनी में काम करना कब शुरू किया?

प्रीति सिंह: मैं 2002 में यहां आई थी. तभी से ड्यूसलडॉर्फ यूनिवर्सिटी में काम कर रही हूं. मैं वहां पढ़ाती भी हूं, मरीजों को भी देखती हूं और साथ ही रिसर्च भी कर रही हूं.

आपने डेंटिस्ट्री की पढ़ाई कहां की?

मैं बच्चों के दातों की विशेषज्ञ हूं. मैने अपनी पढ़ाई मुंबई यूनिवर्सिटी के गवर्मेंट डेंटल कॉलेज से की और फिर मैं मास्टर्स करने इंग्लैंड चली गई. वहीं मेरी मुलाकात अपने जीवनसाथी से हुई. मेरे पति जर्मन हैं और हम वहां साथ पढ़ाई कर रहे थे.

मुंबई और फिर इंग्लैंड से जर्मनी आना कैसे हुआ?

पति की वजह से. हम इंग्लैंड में मिले थे. वह वापस जर्मनी आ गए और मैं तब भी इंग्लैंड में काम कर रही थी. लेकिन कभी ना कभी तो साथ आकर रहना था. या तो हम भारत जाते या जर्मनी आते क्योंकि इंग्लैंड हम दोनो में से किसी का घर नहीं था. मैने तय किया कि जर्मनी आ जाना चाहिए. फिर मैंने जर्मन भाषा सीखी और यहां काम करने लगी.

जर्मनी में बतौर डॉक्टर काम करने के लिए किन बातों की जरूरत होती है?

काम करने से संबंधित नियम तो बदलते ही रहते हैं लेकिन डॉक्टरी के पेशे में काम करने के लिए जर्मनी में एक परीक्षा पास करनी होती है. मैंने वह परीक्षा दी थी और पास हो कर ही मुझे काम करने की अुमति मिली. ऐसा नियम ज्यादातर देशों में है.

Zahnärztin Preeti Singh bei Manthan

डॉक्टर प्रीति सिंह हुस्गेन मुंबई से नाता रखती हैं और जर्मनी के ड्यूसलडॉर्फ शहर में जानी मानी डेंटिस्ट हैं.

आप भारत से हैं और आपके बच्चे जर्मनी में बड़े हो रहे हैं. बच्चों के लिए कैसा है विदेश में पलना बढ़ना?

मुझे लगता है कि जर्मनी बच्चों के लिए काफी अच्छी जगह है, जैसे यहां सामाजिक सुरक्षा है, स्वास्थ सेवाएं बेहतर हैं और स्कूलों से संबंधित सुविधाएं भी बहुत अच्छी हैं.

लेकिन भारत के बारे में बहुत सारी ऐसी बातें हैं जो मैं याद करती हूं. मेरे बच्चे उनके बारे में जानते ही नहीं. गुनगुनी धूप, घर का खाना, त्योहार और दोस्तों का साथ. शुरुआत में मन दुखी हो जाता था. लेकिन अब यहां रहते हुए इतने साल हो गए हैं, भाषा सीख ली है, दोस्त बन गए हैं, अब यही मेरा घर है.

जर्मन भाषा सीखना आसान है या मुश्किन?

मेरे लिए ज्यादा मुश्किल नहीं था. कोई भी भाषा सीखना थोड़ा तो मुश्किल होता ही है, लेकिन मैं सोचती थी कि अगर मेरे जर्मन पति को हिन्दी सीखनी पड़ी तो वह ज्यादा मुश्किल बात होगी. और फिर हमने जर्मनी में रहना तय किया था तो सीखना तो था ही. वह भी पिछले दस साल से हिन्दी सीखने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन अभी तक बिलकुल भी कामयाब नहीं हुए हैं.

जर्मनी में भारतीय डॉक्टरों के लिए कैसी संभावनाएं हैं?

डेंटिस्ट्री के क्षेत्र में अमेरिका में भविष्य बहुत सुरक्षित है और खूब पैसा भी है. लेकिन यहां सरकारी बीमा का चलन ज्यादा है तो यहां डेंटिस्ट उतना नहीं कमाते जितना अमेरिका में. पर हां, भारत से अलग है. इस सिस्टम के फायदा अमीर गरीब सबको फायदे मिलता है.

यहां डॉक्टरों की काफी मांग है. भारतीयों के लिए सबसे बड़ी मुश्किल भाषा की होती है. जर्मनी में जर्मन भाषा सीखे बगैर डॉक्टरी के क्षेत्र में काम करना संभव नहीं है. अगर यह पार हो जाए तो बहुत सारी संभावनाएं हैं.

इंटरव्यू: समरा फातिमा

संपादन: ईशा भाटिया

डॉक्टर प्रीति सिंह हुस्गेन मुंबई से नाता रखती हैं और जर्मनी के ड्यूसलडॉर्फ शहर में जानी मानी डेंटिस्ट हैं.

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