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फीडबैक

डीडब्ल्यू हिन्दी 50 साल का

डीडब्ल्यू हिन्दी की गोल्डन जुबली पूरी होने के मौके पर मिले हमें अपने पाठकों से प्यारे प्यारे संदेश..

डीडब्ल्यू हिन्दी की 50वीं वर्षगांठ के शुभ अवसर पर आप सभी को मेरी ओर से ढेर सारी शुभकामनाएं. डीडब्ल्यू हिन्दी जब रेडिओ पर आता था तब नियमित रुप से हम हर प्रसारण सुनते थे. एक दिन कभी सुन न पाए तो मन खराब हो जाता था. फिर एक दिन प्रसारण बन्द हो गया. उस दिन सोचा कि इन्टरनेट पर डीडब्ल्यू हिन्दी का नया रुप कैसा होगा. फिर देखा कि डीडब्ल्यू हिन्दी अपनी पहली वाली उत्कर्षता के साथ आज भी सबसे आगे है. राजनीति, खेल, विज्ञान हो या मनोरंजन, डीडब्ल्यू सभी विषयों पर नई नई जानकारीयां लेकर हाजिर होता है. ताजा खबरें पेश करने में तो वह माहिर और सबसे तेज है और वह एक ऐसा खुला हुआ जंगला है जिसके जरिये हम जर्मनी को बहुत पास से और अच्छी तरह से देख सकते हैं. डीडब्ल्यू हिन्दी से जुडना अब और भी आसान हो गया क्योंकि इसकी वेबसाइट हो या फेसबुक पेज, मोबाइल के जरिए वो हमेशा साथ साथ ही रहता है. जब भी चाहो मिलना आसान. हम लोग हमेशा आपके साथ हैं. आप यूंही चलते रहिये मेरी दुआ है कि आप जियो हाजारो साल ओर हमारी दोस्ती बढ़ती चलें. - आतिश भट्टाचार्य, गांव हमीरपुर, पश्चिम मेदिनीपुर, पश्चिम बंगाल

आज वक्त के साथ सब कुछ तो नहीं पर बहुत कुछ बदल गया है. वर्षों पहले आज ही के दिन शुरु हुआ डॉयचे वेले हिन्दी का सफर एक नये अंदाज में आज भी बरकरार है. 50 साल के इस सफर में कई बदलाव आए. रेडियो प्रसारण बन्द हुआ, कई आवाजें बदलीं, बहुत कुछ नया देखने को मिला, सालों के इस सफर में अगर कुछ नहीं बदला तो वह है डॉयचे वेले का प्यार और डॉयचे वेले से हमारा अटूट रिश्ता, जो आज भी एक नये दिन की शुरुआत लिए एक नई उमंग लिए हमेशा हमारे साथ है. इस प्यार भरे बंधन के नाते 68 वें भारतीय गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर डॉयचे वेले हिन्दी के 50 साल पूरे होने पर समस्त डॉयचे वेले परिवार को हमारे क्लब की ओर से ढेरों और हार्दिक शुभकामनाएं. आबिद अली मंसूरी, देशप्रेमी रेडियो लिस्नर्स क्लब, बरेली, उत्तर प्रदेश

डीडब्ल्यू हिन्दी की 50वीं वर्षगांठ की ढेर सारी बधाई और शुभकामनाओं के साथ बस इतना ही कहूंगा कि शायद मैं हिन्दी लिखना पढ़ना न जानता अगर मैं डॉयचे वेले हिन्दी सेवा का पहले श्रोता और अब पाठक न होता. वैसे ये तो बात ही और है कि हमें डीडब्ल्यू हिन्दी से जर्मनी, यूरोप और पूरी दुनिया के बारे में ढेर सारी जानकारी तो मिलती ही रहती है और अब रही सही कसर तो हमारे प्रिय कायर्क्रम मंथन ने पूरी कर दी है. आजम अली सूमरो, खैरपुर मीरस, सिंध, पाकिस्तान

डॉयचे वेले हिन्दी सेवा को शुरु हुऐ 50 वर्ष हो गये हैं. इन 50 में से 22 वर्ष हमारे साथ भी गुजरे हैं. विदेशी प्रसारण डीडब्ल्यू ही ऐसा प्रसारण था जहां से संस्कृत भाषा में भी प्रसारण होता था. प्रिया, राम यादव, उज्जवल भट्टाचार्य, सुजाता, महेश झा, आभा, अनवर जमाल आदि लोगों ने रेडियो सेवा में अपनी आवाज का जादू बिखेरते थे. पुराने उद्घोषकों में महेश झा जी आज भी डीडब्ल्यू हिन्दी समाचार सेवा परिवार में अपना योगदान दे रहे हैं. 50वीं वर्षगांठ की ढेर सारी बधाई एवं शुभकामनायें. - अनिल कुमार द्विवेदी , सैदापुर अमेठी, उत्तर प्रदेश

इस अवसर पर मैं आपको और डीडब्ल्यूके सभी मूल्यवान श्रोताओं को अपने दिल से हार्दिक बधाइयां देता हूं क्योंकि मैं समझता हूं कि डीडब्ल्यू आपसी सद्भाव, प्रेम और स्नेह की भावना को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. आपकी सरल, सहज और सुनने-पढ़ने और समझने में आसान हिन्दी भाषा के कमाल ने सब को डीडब्ल्यू का दीवाना बना दिया है. हमारा समस्त परिवार डीडब्ल्यू से अपने अत्यधिक स्नेह की वजह से जुड़ा हुआ है. वर्तमान में डीडब्ल्यू हमारे परिवार का अटूट अंग बन चुका है. मेरे पिता जी आशो कंसल तो वर्ष 1982 से डीडब्ल्यूसे जुड़े हुए हैं. यही नहीं मेरी छोटी बहन रचिता और मम्मी श्रीमती सुनीता कंसल भी डीडब्ल्यू के साथ जुड़े हैं. "जीवन के रंग हैं अजीब, शुक्र है डीडब्ल्यू करीब!". मितुल कंसल, हरियाणा

डॉयचे वेले हिन्दी प्रसारण सेवा के 50 साल पूरे होने की पूर्व संध्या पर "विजिटर-डिएक्सर फ्रेंड्स क्लब" की ओर से डीडबल्यू हिन्दी विभाग के सभी कर्मचारियों और अधिकारियों के साथ ही सभी पाठकों व दर्शकों को हार्दिक बधाई. आपसे ऐसे ही ज्ञानवर्धक और जीवनोपयोगी प्रसारण की उम्मीद और विश्वास के साथ. शक्ति सिंह प्रतापगढ़ी

मैं लगभग 3-4 साल से आपसे नियमित सम्पर्क में हूं. डॉयचे वेले ने हमारे बीच खूब समय बिताया. पहले जब पाठकों व श्रोताओं के बीच रेडियो पर सम्पर्क था तब रोज ताजातरीन समाचार श्रोताओं के कानों तक आते थे और अब वेबसाइट व फेसबुक पेज पर भी सम्पर्क जुड़ा है. जब जर्मन दीवार गिराई गई तब भी हम पाठकों व श्रोताओ तक डॉयचे वेले ने खूब जानकारी दी आज भी विश्व के कोने कोने की ताजा जानकारी दे रहा है. भगवान से दुआ करते है कि इसी तरह पाठकों व मंथन के दर्शकों का संपर्क बना रहे. आपकी हिन्दी की पूरी टीम को 50वीं वर्षगांठ पर बहुत बहुत बधाई. कृपा राम कागा, बाड़मेर, राजस्थान

संकलनः विनोद चड्ढा

संपादनः आभा मोंढे