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मनोरंजन

डीएनए से मिला 18वीं सदी का हत्यारा

एक किताब ने दावा किया है कि डीएनए सबूतों की मदद से 126 साल बाद 'जैक द रिपर' नाम के क्रूर सीरियल किलर की असली पहचान मिल गई है.

किताब में दावा किया गया है कि 1888 के दौरान लंदन में भय फैलाने वाला जैक द रिपर 23 साल का पोलिश आप्रवासी आरोन कोसमिंस्की था. किताब के मुताबिक इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा हत्या का अनसुलझा मामला सुलझा लिया गया है. खुद को जासूस बताने वाले किताब के लेखक रसेल एडवर्ड्स ने डीएनए सबूतों के आधार पर किताब में यह दावा किया है. 'नेमिंग जैक द रिपर' नाम की किताब में उन्होंने हत्यारे को 23 साल के ऐसे व्यक्ति के तौर पर पेश किया है जो पोलैंड से प्रवासी के तौर पर इंग्लैंड आया था.

एडवर्ड्स ने बताया कि 2001 में जॉनी डेप की फिल्म 'फ्रॉम हेल' देखने के बाद उन्हें इस हत्यारे की तलाश की प्रेरणा मिली. उनके साथ इस खोज में फिनलैंड के जेनेटिक्स विशेषज्ञ यारी लोहेलेनन उनके साथ थे.

भयानक तोहफा

साढ़े तीन साल से भी ज्यादा तक लोहेलेनन ने डीएनए का पता लगाने के लिए अलग अलग तकनीकों की मदद ली. इसमें रिपर के शिकार की खून से सनी एक शॉल का इस्तेमाल किया गया. कैथरीन एडोव्स को लंदन के मिट्रे स्क्वायर पर 30 सितंबर 1888 की सुबह मृत पाया गया. उनका गला कटा हुआ था और पेट से किडनी और गर्भाशय को काटकर निकाल दिया गया था.

2007 में बरी सेंट एडमड्स में हुई एक नीलामी में एक शॉल खरीदी गई जिस पर शुक्राणुओं के अंश पाए गए. माना जा रहा था कि ये हत्यारे के ही हैं. दरअसल हत्या के मामले की छानबीन करने वाले सार्जेंट एमॉस सिंपसन ने इसे मौकाए वार्दात से उठाया था क्योंकि वे उसे अपनी पत्नी को तोहफे में देना चाहते थे. लेकिन बाद में वे घबरा गए और उसे संभाल कर रख दिया. पीढ़ी दर पीढ़ी ये आगे दी जाती रही, बिना धोए.

संदिग्ध

एडवर्ड्स ने ब्रिटिश मेल के रविवारीय संस्करण में लिखा, "मुझे केस के इतिहास का सिर्फ एक ही फोरेंसिक सबूत मिला है. मैंने 14 साल इस पर काम करके बिताए हैं. और हमें विश्वास है कि हमने जैक द रिपर का रहस्य खोल दिया है और पता लगा लिया है कि वो कौन था. सिर्फ विश्वास नहीं करने वाले लोग, जो रहस्य को बनाए रखना चाहते हैं, वही इस पर संदेह करेंगे. हमने उसका राजफाश कर दिया है. जब मुझे सच्चाई पता चली तो यह मेरे पूरे जीवन का सबसे शानदार अहसास था."

एडवर्ड्स ने बताया कि कोमिन्स्की निश्चित ही वह हत्यारा था जिसने 31 अगस्त से नौ नवंबर 1888 के बीच पांच महिलाओं का वीभत्स तरीके से खून किया था. कोमिन्स्की उस समय रूस के नियंत्रण वाले पोलैंड में उत्पीड़न से बच कर भागा था और अपने परिवार के साथ 1881 में इंग्लैंड आया. वह पूर्वी लंदन के माइल एंड में रहता था. एडवर्ड्स ने बताया कि उस समय पुलिस ने कोमिन्स्की पर भी संदेह किया था लेकिन उसके खिलाफ कभी सबूत नहीं मिले.

जैक द रिपर हत्याकांड के दौरान गलस्टन स्ट्रीक की एक दीवार पर विवादास्पद नारा लिखा हुआ था जिसके बाद यहूदी विरोधी प्रदर्शन शुरू हुए. माना जा रहा था कि हत्यारा खुद को यहूदी मानता है. दंगों के डर से इस नारे को मिटा दिया गया था. इसलिए इस संदेश की सच्चाई और विवाद का कारण अभी तक पता नहीं लगाया जा सका है. 1899 में कोमिन्स्की पैर में गैंगरीन होने की वजह से पागलखाने में ही मर गया.

रिपोर्टः केट ब्रैंडी/एएम

संपादनः ईशा भाटिया

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