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खेल

डिर्क नोवित्जकी: द पर्फेक्ट शॉट

बास्केटबॉल खिलाड़ी डिर्क नोवित्जकी दुनिया में सबसे प्रसिद्ध जर्मन एथलीटों में से एक हैं. एक नई डॉक्यूमेंट्री यह दिखाती है कि कैसे जर्मनी के छोटे शहर का आम लड़का अमेरिका में सुपर स्टार बनता है.

बास्केटबॉल खिलाड़ी डिर्क नोवित्जकी पर बनी डॉक्यूमेंट्री का नाम "द पर्फेक्ट शॉट" है. डॉक्यूमेंट्री जर्मनी में पैदा हुए डिर्क के निजी जीवन और उनकी सफलता के पीछे की कहानी बताती है. डॉक्यूमेंट्री में डिर्क के परिवार का इंटरव्यू भी दिखाया गया है. इसी हफ्ते फिल्म का प्रीमियर जर्मन शहर कोलोन में हुआ. दर्शकों में डिर्क भी शामिल थे. अमेरिका में डिर्क को जर्मन वंडरकिड माना जाता है, जहां वे नेशनल बास्केटबॉल एसोसिएशन (एनबीए) के लिए खेलते हैं. डिर्क नोवित्जकी अपने अत्यधिक कुशल शूटिंग हुनर के लिए मशहूर हैं, जिसकी ट्रेनिंग उन्होंने अपने ट्रेनर होल्गर गेश्विंडर से ली है. ट्रेनिंग के लिए गेश्विंडर गैर परंपरागत विधियों का इस्तेमाल करते हैं. फिल्म के प्रोड्यूसर लियोपोल्ड होश्क कहते हैं कि यह फिल्म दो लोगों के बारे में है, जो एक प्रयोग का जोखिम उठाते हैं, जो पूरी तरह से सफल होता है. होश्क का इशारा डिर्क और गेश्विंडर के रिश्तों की तरफ है. वे कहते हैं, "यह दोस्ती, कड़ी मेहनत और निष्पक्षता के बारे में है."

"द पर्फेक्ट शॉट" का निर्देशन सेबास्टियन डेनार्ट ने किया है. ये न सिर्फ मजबूत स्पोर्ट्स डॉक्यूमेंट्री है बल्कि यह जर्मनी के छोटे शहर के ऐसे नौजवान शख्स की कहानी बताती है जो अचानक मशहूर हो जाता है. फिल्म में एक खिलाड़ी और कोच के बीच गहरी दोस्ती पर भी रोशनी डाली गई है. डेनार्ट और उनकी कैमरा टीम ने दो साल तक डिर्क के हर कदम का पीछा किया. कैमरा टीम ने उनके एनबीए खेल की शूटिंग की, जब वह वतन जाते तो भी कैमरा टीम उनके साथ होती. डेनार्ट ने तब शूटिंग शुरू की जब डिर्क अपने करियर के शिखर पर थे.

बास्केटबॉल गुरु

गेश्विंडर खुद बॉस्केटबॉल के शानदार खिलाड़ी हुआ करते थे. वे जर्मन राष्ट्रीय टीम के लिए खेल चुके हैं और ओलंपिक में भी हिस्सा ले चुके हैं. लेकिन यह सब 1960 और 1970 में हुआ करता था. उस दौर में बास्केटबॉल खेल कर पैसा कमाना आसान नहीं था, कम से कम जर्मनी में तो ऐसा ही था. गेश्विंडर ने भौतिकी की पढ़ाई की और माक्स प्लांक इंस्टीट्यूट में काम किया. लेकिन उन्होंने बास्केटबॉल की नई प्रतिभाओं को खोजने का काम बंद नहीं किया. डिर्क जब 16 साल के थे तब गेश्विंडर ने उनकी प्रतिभा की पहचान कर ली.

फिल्म में गेश्विंडर कहते हैं, "पतला दुबला और लंबा लड़का, वह ऐसा सब कुछ करता था जो एक अच्छे बास्केटबॉल खिलाड़ी को करना होता है. और उसके पास अभी तक तकनीक नहीं थी." गेश्विंडर ने बहुत जल्दी डिर्क को खेल की तकनीक सिखाई. गेश्विंडर ने ट्रेनिंग के लिए संगीत का इस्तेमाल किया. गेश्विंडर न सिर्फ डिर्क के कोच बने बल्कि उनके पिता के समान भूमिका निभाई. "द पर्फेक्ट शॉट" एक ऐसी फिल्म है जो खेल भावना और व्यक्ति की इच्छा शक्ति के बारे में बताती है. यह फिल्म दो अलग संस्कृतियों के बारे में हैं और यह असाधारण दोस्ती की भी साक्षी है.

रिपोर्ट: योखेन कुर्टेन/एए

संपादनः ए जमाल

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