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खेल

डिप्रेशन के शिकार फुटबॉल खिलाड़ी

फुटबॉल का खेल जहां एक तरफ मेसी और बेकहम जैसे सितारे देता है, वहीं दूसरी तरफ खिलाड़ियों को डिप्रेशन में भी धकेल देता है. इंग्लैंड के लगभग 78 फीसदी फुटबॉल खिलाड़ी अवसाद झेल रहे हैं.

फुटबॉल की पत्रिका सॉकर मैगजीन फोर फोर टू के सर्वे में यह बात सामने आई है. इसका दावा है कि 100 पेशेवर खिलाड़ियों से सवाल किए गए और उनमें से 78 लोगों ने इस बात को माना कि उनके साथ अवसाद की समस्या है.

एवरटन और न्यूकैसेल के खिलाड़ी रह चुके गैरी स्पीड की लाश 2011 में उनके घर पर मिली थी. उन्होंने फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली थी. इसके बाद हुई जांच में उनकी पत्नी ने कहा था कि उन्होंने "खुद अपनी जान लेने" की बात की थी.

इस घटना के बाद इंग्लैंड में फुटबॉलरों के डिप्रेशन को लेकर चिंता बढ़ने लगी थी. इंग्लैंड के पेशेवर फुटबॉल संघ पीएफए ने 50,000 पूर्व खिलाड़ियों को सूचनाओं से भरी पुस्तिका भेजी है.

जर्मनी के राष्ट्रीय फुटबॉलर और गोलकीपर रॉबर्ट इंके ने 2009 में ट्रेन से कट कर जान दे दी थी. जर्मनी के प्रतिष्ठित लीग हनोवर से खेलने वाले इंके की मौत से फुटबॉल जगत में सन्नाटा पसर गया था. उनके जीवन पर "ए लाइफ टू शॉर्ट" नाम की किताब भी छपी, जो खासी लोकप्रिय हुई.

हल सिटी टीम के स्ट्राइकर डीन विंडास ने भी 2012 में कहा था कि उन्होंने खुदकुशी की कोशिश की थी. उनका कहना था कि वह पांच लाख पाउंड की राशि कमाते थे लेकिन इसके बाद भी उन्हें पैसों की तंगी रहती थी. उन्होंने 2010 में पेशेवर फुटबॉल खेलना बंद किया था.

इसी सर्वे में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि इंग्लैंड के खिलाड़ी मानते हैं कि उनके लीग में बहुत ज्यादा विदेशी खिलाड़ी भर गए हैं. ऐसा मानने वाले 43 फीसदी फुटबॉलर हैं. सर्वे से यह बात भी सामने आई कि मैच के टिकट बहुत महंगे होते हैं.

यूरोप में स्टेडियम जाकर फुटबॉल देखना जितना अच्छा अनुभव होता है, उतना ही महंगा भी. कई मैचों के टिकट की कीमत 10,000 रुपये से भी ज्यादा होती है.

एजेए/एमजे (रॉयटर्स)

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