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दुनिया

डिपोर्टेशन फ्लाइट उड़ाने से इनकार

जर्मनी के पायलटों ने रिफ्यूजियों को वापस उनके देश पहुंचाने की फ्लाइट उड़ाने से इनकार किया. इसके चलते अब तक 222 से ज्यादा उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं.

जर्मनी के कई पायलटों ने डिपोर्टेशन में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया है. डिपोर्टेशन के तहत विदेशी मूल के व्यक्ति को कानूनन देश से बाहर निकाला जाता है. शरण पाने के लिए जर्मनी आए हजारों लोगों की अर्जी खारिज हो चुकी है. अब सरकार उन्हें वापस उनके देश भेजना चाहती है. इसके लिए जर्मनी के विमानों को सैकड़ों उड़ाने भरनी होंगी.

लेकिन वापमपंथी पार्टी डी लिंके ने पायलटों से दरख्वास्त करते हुए कहा कि डिपोर्टेशन वाली उड़ानें न भरें. मानवीय आधार का हवाला देकर की गई अपील का पायलटों पर भी असर हुआ.

यूरोप के सामने खड़ी सबसे बड़ी चुनौती

सरकार के मुताबिक पायलटों के इनकार के बाद 222 फ्लाइटें रद्द करनी पड़ी हैं. जनवरी से सितंबर 2017 तक जर्मनी की मुख्य एयरलाइन लुफ्थांसा और उसकी सहायक कंपनी यूरोविंग्स ने 85 बार ऐसी उड़ानें भरने से इनकार कर दिया. जर्मनी के मुख्य एयरपोर्ट फ्रैंकफर्ट से ऐसी 140 और ड्यूसेलडॉर्फ एयरपोर्ट से करीब 40 फ्लाइटें रद्द करनी पड़ीं.

शरणार्थी संकट से उपजे राजनीतिक घमासान के बीच जर्मनी ने "सुरक्षित देशों" से रिफ्यूजी के तौर पर जर्मनी आए लोगों को वापस भेजने का फैसला किया है. सरकार के कड़े रुख के बावजूद जर्मनी अब भी यूरोप में रिफ्यूजियों की पहली पंसद बना हुआ है. 2017 में जर्मनी में यूरोपीय संघ के बाकी 27 देशों के कुल आवेदनों से ज्यादा शरण की अर्जियां आईं.

जर्मन अखबार डी वेल्ट ने यूरोपीय सांख्यिकी एजेंसी यूरोस्टैट के हवाला से यह खबर छापी है. अखबार के मुताबिक 2017 की पहली छमाही में जर्मनी के अप्रवासन और शरणार्थी कार्यालय ने 3,88,201 मामलों पर फैसला सुनाया. साल भर पहले की तुलना में यह दोगुनी संख्या है.

डिपोर्टेशन की प्रक्रिया को तेज करने के लिए जर्मन सरकार फरवरी 2018 से नया कार्यक्रम शुरू कर रही है. इसके तहत शरण की अर्जी रद्द होने के बाद जो लोग वापस अपने देश लौटना चाहेंगे, उन्हें सरकार 3,000 यूरो देगी.

(चूर-चूर होते पाकिस्तानियों के ख्वाब)

 

एलिजाबेथ शूमाखर/ओेएसजे

 

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