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विज्ञान

डिजिटल जीवन से उकताए युवा

जहां एक तरफ डिजिटल दौर में सारी दुनिया तकनीक के सहारे सिमट कर मुट्ठी में आ गई है वहीं युवाओं का एक तबका ऐसा भी है जो इस तरह की तकनीक से किनारा कर रहा है. उनके लिए कुछ और ही है जो 'कूल' है..

देखा जाए तो कूल या अलग हट कर हर दौर में वही रहा है जो और लोगों के बीच आम न हो. जर्मन युवा सांस्कृतिक रिसर्चर फिलिप इकराथ ने बताया कि पूरे यूरोप में युवा डिजिटल माध्यम को छोड़ उन सब चीजों में रुचि ले रहे हैं जो इनके होने से पहले जिंदगी का अहम हिस्सा थीं.

यूरोपीय युवाओं के इस तबके में निजी संबंधों को समय और महत्व देना, आउटडोर एडवेंचर, घरेलू तरीकों से खाने बनाना और हाथ से सिलाई बुनाई इत्यादि करना ज्यादा कूल माना जाता है. ऐसे में वे जो अपने स्मार्टफोन और लैपटॉप में उलझे दिखते हैं वे ज्यादा उम्र के लोग हैं. हैम्बर्ग के इंस्टीट्यूट फॉर यूथ कल्चर स्टडीज के प्रमुख फिलिप इकराथ कहते हैं, "मेरे ख्याल में डिजिटल माध्यम को पूरी तरह युवाओं पर थोप देना सही नहीं है, इसका उल्टा असर पड़ा है." अब इसे बदलने के लिए सोचा समझा प्रयास किया जा रहा है.

सोशल सूसाइड का चलन

ऐसा ही एक ट्रेंड फेसबुक पर लोगों को अनफ्रेंड करने यानि अपनी फ्रेंड लिस्ट से हटाने का भी है. उन्होंने कहा, "ये वे लोग हैं जो अक्सर उन सभी लोगों को लिस्ट से हटा देते हैं जो उनके बेहद करीबी दोस्त नहीं हैं. इसके अलावा सोशल सूसाइड का चलन बढ़ रहा है, यानि लोग सोशल नेटवर्किंग साइटों को छोड़ रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि यह उनके सिर पर सवार हो रहा है."

अमेरिका में होने वाली रिसर्च के मुताबिक कई युवाओं में इस तरह के बरताव के लिए उनके माता पिता का व्यवहार बड़ी हद तक जिम्मेदार है. वे माता पिता को हर समय अपने फोन और लैपटॉप से चिपका देख कर उकता गए हैं. ऐसा लगता है जैसे उनके पास बच्चों के लिए कोई समय नहीं. इकराथ कहते हैं कि बदलते ट्रेंड को देखकर लग रहा है कि आज के 15-16 साल के बच्चों के तकनीक के साथ संबंध उससे कहीं अलग होंगे जैसे उनके माता पिता के हैं.

एसएफ/आीबी (डीपीए)


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