1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

डायबिटीज रोगियों का सहारा बना कैटरिंग सर्विस

पच्चीस साल तक डायबिटीज इंडोनेशिया के कारोबारी सुसांतो सलीम का स्वास्थ्य धीरे धीरे कुतरता रहा. पिछले साल उन्होंने एक ऐसी कैटरिंग सर्विस से खाना लेना शुरू किया है जो उनकी जरूरतों के हिसाब से खाना पकाती है.

सुसांतो सलीम बताते हैं, "मैं छह मबीने पहले कस्टमर बना और जब मैंने उसके पहले और बाद के मेडिकल टेस्ट की तुलना की तो वे बेहतर हो गए थे." सलीम इंडोनेशिया के उन 1 करोड़ लोगों में से हैं जिन्हें डायबिटीज है. स्ट्रोक और दिल की बीमारी के बाद डायबिटीज दक्षिण पूर्व एशिया के इस आबादी बहुल देश में तीसरी जानलेवा बीमारी है. पिछले साल इसकी वजह से 100,000 लोग मारे गए. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार डायबिटीज ने 2012 में दुनिया भर में 15 लाख लोगों की जान ली. स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसकी वजह खानपान और लाइफस्टायल के खराब विकल्प को मानते हैं.

एक कंपनी ने इस मौके का फायदा उठाने की सोची है. माय मील्स इंडोनेशिया की फूड डिलीवरी सर्विस है जो बीमार लोगों को घर पर खाना मुहैया कराती है. राजधानी जकार्ता और पूर्वी जावा के सुराबाया जैसे शहरों में उसके पास रोजाना 250 ग्राहक हैं. कंपनी के संस्थापक इग्नाशिउस जाल्डी कहते हैं कि उन्होंने अपने ही अनुभव के कारण यह कारोबार शुरू किया, "मुझे हायपरटेंशन था और स्वस्थ खाना दने वाली कैटरिंग खोजना मुश्किल था." जाल्डी का कहना है कि व्यायाम और दवाओं के अलावा अच्छे खाने की वजह से उनकी हालत सुधर गई.

जाल्डी का कहना है कि वे लोगों की खाने की आदत का पैटर्न बदलना चाहते हैं. उनकी कंपनी के मुख्यालय में ही एक किचन है जहां गिने चुने कुक सब्जियों और मीट का छोटा पोर्शन तैयार करते हैं, उन्हें पैक करते हैं और फिर मोटरसाइकिल पर उन्हें फटाफट ग्राहकों तक पहुंचाया जाता है. 44 वर्षीय जाल्डी का कहना है कि उनकी कंपनी यह सुनिश्चित करने के लिए न्यूट्रिशन विशेषज्ञों की मदद लेती है ती दिल के रोगियों, उच्च कोलेस्ट्रोल और हायपरटेंशन वाले लोगों को उनकी जरूरत वाला उचित खाना मिले. ग्राहकों में एक तिहाई डायबिटीज के रोगी हैं.

स्वस्थ खाना उपलब्ध तो है लेकिन माय मील्स का हर खाने की कीमत करीब 68,000 इंडोनेशियाई रुपियाह है यानि करीब 350 रुपया. यह अभी भी इंडोनेशिया जैसे देशों में लक्जरी है जहां विश्व बैंक के मुताबिक 25 करोड़ आबादी का 40 फीसदी हिस्सा रोजाना 135 रुपियाह पर जीता है. इंडोनेशिया अब अपने लोगों को डायबिटीज की स्क्रीनिंग करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है ताकि बीमारी का पता लगने पर लोग उसका सही समय पर उपचार करा सकें. देहाती इलाके समस्या हैं. हेल्थ विशेषज्ञ सिदार्तवान सोएगोंडो कहते हैं, "हालांकि सभी इलाकों में सरकारी हेल्थ क्लीनिक हैं, लेकिन डायबिटीज की दवाएं सीमित हैं." सलीम के लिए नई कैटरिंग कंपनी खुशियां लेकर आई हैं. वे कहते हैं, "मेरा स्वास्थ्य बेहतर हुआ है. मैं अब परिवार के साथ छुट्टियों पर भी जा पा रहा हूं."

एमजे/ओएसजे (रॉयटर्स)

DW.COM