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विज्ञान

डायनासोर या जहन्नुमी मुर्गी

डायनासोर की एक ऐसी प्रजाति का पता चला है, जिसके पंख हुआ करते थे और जो कोई साढ़े छह करोड़ साल पहले पृथ्वी पर विचरा करती थी. ये डायनासोर शायद थोड़ा बहुत उड़ा भी करते होंगे.

प्रागैतिहासिक काल का अध्ययन करने वाले इतिहासकारों ने इसका नाम "चिकेन फ्रॉम हेल" या जहन्नुमी मुर्गी रखा है क्योंकि इसके सिर पर मुर्गियों जैसी कलगी हुआ करती थी, पांव शुतुरमुर्ग जैसे हुआ करते थे, पंजे मजबूत और जबड़े इतने सख्त कि किसी भी अंडे या शिकार को पल भर में चीर के रख दें. अनुमान है कि इसकी ऊंचाई इंसानों जितनी हुआ करती होगी लेकिन वजन 200 से 300 किलो के बीच.

इसे 'अंडा चोर' समूह के डायनासोर का सबसे बड़ा जानवर बताया जा रहा है. इस बारे में मैट लमाना की रिपोर्ट प्लोस वन नाम की विज्ञान पत्रिका में छपी है. लमाना का कहना है, "हमने मजाक में इसे जहन्नुमी मुर्गी कहा और लगता है कि यह बिलकुल फिट बैठता है."

तीन अलग अलग जगहों से इसके जीवाश्म जमा किए गए हैं. इन्हें जोड़ने पर करीब पांच फुट ऊंचा डायनासोर का अनुमान लगाया जा सकता है, जो साढ़े तीन मीटर लंबा दिखता है. रिपोर्ट में अहम भूमिका निभाने वाली एमा शाखनर का कहना है, "बहुत डरावना होगा. इसके सामने आना बहुत संकट वाला काम होता होगा." वैसे इसका वैज्ञानिक नाम आंजू विली रखा गया है. आंजू मेसोपोटामिया सभ्यता की काल्पनिक चिड़िया का नाम है, जबकि पिट्सबर्ग के प्राकृतिक इतिहास म्यूजियम के ट्रस्टी के पोते का नाम विली है. लमाना अमेरिका में पेनसिलवीनिया के इसी म्यूजियम में काम करते हैं.

इस डायनासोर का कंकाल करीब 10 साल पहले उत्तरी और दक्षिणी डकोटा में पहाड़ियों के पास मिला. इस जगह पर दूसरे डायनासोरों के कंकाल भी मिल चुके हैं. आंजू डायनासोर के अस्तित्व का समय 6.6 करोड़ साल से 6.8 करोड़ साल पहले का बताया जा रहा है. यह दूसरे डायनासोरों के जीवनकाल के बहुत करीब है, जो 6.5 करोड़ साल पहले था. समझा जाता है कि एक विशाल क्षुद्रग्रह के धरती पर टकराने के बाद डायनासोर खत्म हो गए. आंजू प्रजाति के डायनासोर के कुछ करीबी रिश्तेदार चीन और मंगोलिया में भी रहा करते थे.

इस तरह के पहले डायनासोर का पता 1924 में लगा था और उसका नाम 'अंडा चोर' रखा गया. क्योंकि इसे अंडों से भरे एक घोंसले के ऊपर पाया गया था. प्रागैतिहासिक इतिहासकारों ने माना कि यह अंडे खाने के लिए यहां आया होगा.

एजेए/आईबी (एएफपी)

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