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दुनिया

डर ने नेताओं को साथ किया

पाकिस्तान में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा बहुत ज्यादा है. नेता एक दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोलने का एक मौका भी नहीं छोड़ते. लेकिन मई के चुनाव से पहले वे एक साथ खड़े नजर आ रहे हैं. वजह है आतंकी हमले का डर.

हथियारों, सुरक्षा बलों और एक दूसरे से टकराते कबीलों के बीच हर विचारधारा वाला नेता डरा हुआ है. पाकिस्तान में मई में आम चुनाव होने हैं. चुनाव प्रचार में बेनजीर भुट्टो की हत्या का भी डर सबको सता रहा है. पिछली बार चुनाव प्रचार के दौरान ही 2007 में उनकी हत्या कर दी गई थी.

उनकी हत्या के बाद उनकी पार्टी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी सहानुभूति के रथ पर सवार होकर विजय द्वार तक पहुंच गई. पिछले पांच साल में सुरक्षा के नाम पर और संकट आया है और पाकिस्तान उस वक्त के मुकाबले ज्यादा खतरनाक देश माना जा रहा है.

शिया समुदाय के मुसलमानों को आए दिन निशाना बनाया जा रहा है. पांच साल पहले के मुकाबले धार्मिक सहिष्णुता और कम हो गई है. तालिबान कट्टरपंथ और बलूच अलगाववादियों का खतरा भी बढ़ता जा रहा है.

पाकिस्तानी तालिबान ने तीन प्रमुख पार्टियों को सीधी धमकी दी है, सत्ताधारी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी), अवामी नेशनल पार्टी और मुत्तहिदा कौमी मूवमेंट (एमक्यूएम). पीपीपी के 24 साल के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो कुछ जनसभाओं को सिर्फ फोन या वीडियो लिंक से संबोधित करेंगे. पार्टी प्रवक्ता कमर जमां कैरा ने बताया, "ऐसा सुरक्षा कारणों से किया जा रहा है. वह हर जगह नहीं जा सकते हैं."

किसी भी लोकप्रिय नेता के लिए बुलेटप्रूफ गाड़ी का इंतजाम किया जा रहा है. रैलियों की जगह पर कंटीली तारों के बाड़े लगाए जा रहे हैं और मंच पर भी बुलेटप्रूफ शीशे लगाए जा रहे हैं ताकि खतरे को कम से कम किया जा सके.

Pakistan Benazir Bhutto

2007 में चुनाव प्रचार में बेनजीर भुट्टो की हत्या कर दी गई

सोमवार को विपक्षी नेता नवाज शरीफ ने अपनी पहली रैली की और वहां दसियों हजार लोग जमा हुए. उन्होंने बुलेटप्रूफ कांच को हटाने की बात कही, जिस पर वहां जमा लोगों ने जम कर तालियां बजाईं. लेकिन पूरे मंच को एके 47 और कंटीली तारों से सुरक्षित किया गया.

पूर्व तानाशाह परवेज मुशर्रफ भी लंबे स्वनिर्वासन के बाद पाकिस्तान लौट आए हैं और तालिबान ने उन्हें जान से मार देने की धमकी दी है. पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो 2007 में लंबे वक्त बाद पाकिस्तान लौटी थीं और उसी दिन उन पर जानलेवा हमला हुआ था, जिसमें 140 लोग मारे गए.

इस बात को ध्यान में रखते हुए मुशर्रफ की पार्टी ने सार्वजनिक रैली नहीं की. उन्होंने एयरपोर्ट पर ही छोटा सा भाषण दिया और बाद में उन्हें तेजी से गुजरते कारवां के साथ वहां से हटा दिया गया. उन्हें चौबीसों घंटे सुरक्षा दी जा रही है.

लोकप्रिय मौलाना ताहिरुल कादरी ने जनवरी में जब अपनी रैली की तो उन्होंने सुरक्षा का नया पैमाना तय कर दिया. उन्होंने बुलेटप्रूफ ट्रेलर से लोगों को संबोधित किया. सुरक्षा जानकारों का कहना है पेशावर और कराची जैसे शहरों में तालिबान का खतरा सबसे ज्यादा है.

एएनपी ने सुरक्षात्मक रवैया अपना लिया है. इसकी रैलियों में लगातार खुदकुश हमले हो रहे हैं. तालिबान ने दिसंबर में इसके बड़े नेता बशीर बिलौर की हत्या कर दी. पार्टी के सीनेटर जाहिद खान का कहना है, "अगर एक पार्टी को निशाना बनाया जा रहा है और वह खुल कर प्रचार नहीं कर पा रही है, तो फिर यह चुनाव पारदर्शी कैसे हो सकते हैं. इस चुनाव का फिर महत्व ही क्या रह जाएगा."

एमक्यूएम के नेता वासे जलील का कहना है कि उन्हें इस बात का डर है कि सुरक्षा इस बार के चुनाव में बड़ा रोल निभाएगा और इसका असर वोटरों की संख्या पर भी पड़ने वाला है. यहां तक कि इमरान खान भी अब बुलेटप्रूफ गाड़ी पर चलने लगे हैं, जिन्हें कई बार "तालिबान खान" भी कहा जाता है. बताया जाता है कि तालिबान के साथ उनके अच्छे रिश्ते हैं.

पिछले दिनों जब लाहौर में खान की रैली हो रही थी, तो सुरक्षा एजेंसियों ने वायरलेस सेवा को बंद कर दिया. उनका कहना है कि इसे भी बम को उड़ाने के काम में लाया जा सकता है. उनकी पार्टी के प्रवक्ता शफकत महमूद ने कहा, "यह बेहद मुश्किल स्थिति है. हमें चुनावों में हिस्सा लेना है और सुरक्षा का भी ध्यान रखना है. यह आसान नहीं है लेकिन हालात तो ऐसे ही हैं."

एजेए/एमजे (एएफपी)

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