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खेल

डरबन में अलविदा कहेंगे कैलिस

चुइंग गम चबाते हुए सामने वाली टीम की हालत खस्ता कर देने वाले महान ऑलराउंडर जैक कैलिस गुरुवार को आखिरी टेस्ट खेलने उतरेंगे. डरबन में भारत के खिलाफ बॉक्सिंग डे टेस्ट खेलने बाद कैलिस सफेद कपड़ों को अलविदा कह देंगे.

1997 में क्रिसमस के ठीक बाद मेलबर्न में बॉक्सिंग डे टेस्ट में दक्षिण अफ्रीका ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों के सामने जूझ रहा था. ग्लेन मैक्ग्रा, पॉल रायफल और शेन वॉर्न जैसे गेंदबाज कहर ढहाती गेंदबाजी कर रहे थे. तभी मैदान पर शांत और सुलझा हुआ एक नौजवान बल्लेबाज आया. ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों की फब्ती का उस पर कोई असर नहीं हुआ. उसकी आंखों में दिखने वाली मासूमियत बनी रही. वह चुपचाप एक कोने में डटकर बल्लेबाजी करता रहा और मैच को ड्रॉ करा गया. अपने सातवें टेस्ट में ऐसा कमाल करने के लिए कैलिस की खूब तारीफ हुई. लेकिन कैलिस यहीं नहीं रुके. समय की मांग के साथ उनकी बल्लेबाजी तेज, आक्रामक और परिपक्व होती चली गई. टेस्ट क्रिकेट में वह टीम की जान बन गए.

1995 में डरबन से ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखने वाले कैलिस को हमेशा ही चुइंग गम चबाते हुए संयमित बल्लेबाजी और किफायती गेंदबाजी करने वाले हरफनमौला के तौर पर जाना जाता रहा. लेकिन अब टेस्ट क्रिकेट के सफेद कपड़ों को विदा देने जा रहे हैं. बुधवार को संन्यास का एलान करते हुए इस हरफनमौला खिलाड़ी ने कहा, "ऑस्ट्रेलिया सामने है और जिस तरह की सफलता उसे मिल रही है, उसे देखते हुए ये आसान फैसला नहीं था. लेकिन मुझे लगता है कि यही सही समय है. बीते दो साल यादगार रहे और शानदार क्रिकेटरों के साथ जबरदस्त सफर रहा. मैं प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के बीच रहते हुए अपने टेस्ट करियर को अलविदा कहने में भाग्यशाली महसूस कर रहा हूं."

हालांकि वो वनडे क्रिकेट खेलते रहेगें, "मैं इसे अलविदा की तरह नहीं देखता हूं, अगर मैं फिट रहूं और अच्छा प्रदर्शन करता रहूं तो मेरे भीतर दक्षिण अफ्रीका को 2015 के वर्ल्ड कप तक ले जाने की भूख है."

डेढ़ दशक तक दक्षिण अफ्रीकी टीम की जान रहे कैलिस ने इसी साल 16 अक्टूबर को अपना 38वां जन्मदिन मनाया. लेकिन बढ़ती उम्र के साथ वो खुद मान रहे हैं कि पांच दिन के टेस्ट क्रिकेट में लगातार बल्लेबाजी और गेंदबाजी करना अब उनके लिए बहुत चुनौती भरा है.

गुरुवार को डरबन में भारत के खिलाफ वो अपना आखिरी और 166वां टेस्ट खेलने उतरेंगे. कैलिस अब तक 165 मैचों में 13,174 रन बना चुके हैं. इस लंबे सफर में उनका बल्लेबाजी का औसत 55.12 रहा, जो 99 फीसदी बल्लेबाजों के लिए सपने जैसा है. इस दौरान उन्होंने 44 शतक और 58 अर्धशतक जमाए. शतकों के मामले में वो महान बल्लेबाज कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर के बाद आते हैं. सचिन ने 200 टेस्ट मैचों में 53.78 के औसत से 51 शतक जड़े. तेंदुलकर ने करीब साढ़े 23 साल तक टेस्ट क्रिकेट खेला. सचिन और कैलिस के बाद रिकी पोटिंग आते हैं.

वहीं मैदान पर 18 साल बिता चुके कैलिस ने गेंदबाजी और फिल्डिंग में भी अपना जौहर दिखाया. उन्होंने 292 बल्लेबाजों को पैवेलियन का रास्ता दिखाया. सबसे ज्यादा कैच पकड़ने के मामले में भी वो राहुल द्रविड़ के बाद दूसरे नंबर के खिलाड़ी हैं. कैलिस ने टेस्ट क्रिकेट में 199 कैच लपके.

दक्षिण अफ्रीका के कोच रसेल डोमिंगो भी मान रहे हैं कि कैलिस जैसा महान खिलाड़ी भाग्य से मिलता है. कैलिस के एलान के बाद डोमिंगो ने कहा, "दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेट में जैक कैलिस का प्रभाव बहुत ही बड़ा है, सिर्फ खिलाड़ी के तौर पर नहीं बल्कि एक इंसान के रूप में भी. मुझे नहीं लगता कि बहुत ही जल्द हम इस ऊंचाई का कोई खिलाड़ी देख पाएंगे."

कैलिस के संन्यास के साथ ही टेस्ट क्रिकेट के महानतम बल्लेबाजों का एक युग खत्म होगा. ब्रायन लारा, राहुल द्रविड़, सचिन तेंदुलकर और रिकी पोंटिंग जैसे खिलाड़ियों के संन्यास के बाद अब क्रिकेट जगत तालियों की गड़गड़ाहट के साथ कैलिस को भी अलविदा कहेगा.

ओएसजे/एमजे (रॉयटर्स)

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