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विज्ञान

ठीक से सोते नहीं अंतरिक्ष यात्री

कभी अंतरिक्ष यात्रियों के सोने के बारे में सोचा है? जब वे अंतरिक्ष की यात्रा पर होते हैं तो भारहीनता से जूझते ही हैं, नींद की कमी का भी सामना करते है. एक स्टडी में पता चला है कि यात्रा से पहले भी वो ठीक से सो नहीं पाते.

शोधकर्ताओं ने पाया है कि शटल मिशनों के दौरान अंतरिक्ष यात्री हर रात औसत साढ़े छह घंटे सोते हैं. विज्ञान पत्रिका द लांसेट न्यूरोलॉजी में छपी रिपोर्ट के अनुसार अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र आईएसएस पर काम करने वाले उनके साथी तो औसतन बस छह घंटे पांच मिनट ही सो पाए. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अंतरिक्ष यात्रियों के आराम के लिए साढ़े आठ घंटे की नींद निर्धारित की है लेकिन हकीकत में वे इससे दो घंटा कम सोते हैं.

बॉस्टन में हार्वर्ड मेडिकल स्कूल और बूल्डर के यूनिवर्सिटी ऑफ कोलेराडो के वैज्ञानिकों ने शटल मिशनों पर गए 64 अंतरिक्ष यात्रियों के अलावा आईएसएस के 21 वैज्ञानिकों के डेटा का अध्ययन किया. इसके लिए न सिर्फ उड़ान के दौरान रातों का डेटा रजिस्टर किया गया बल्कि उसके पहले और उसके बाद की रातों का भी. रात में अंतरिक्ष यात्रियों की गतिविधियों का रिकॉर्ड कलाई में लगाई गई एक मशीन के जरिए मापा गया. प्रयोग में भाग लेने वाले अंतरिक्ष यात्रियों ने अपनी डायरी में नींद की क्वालिटी रिकॉर्ड की.

कुल मिलाकर धरती पर 4,000 रातों और अंतरिक्ष में 4,200 रातों का मूल्यांकन हुआ. उड़ान से पहले अंतरिक्ष यात्री सिर्फ साढ़े छह घंटे सोए जो औसत अमेरिकियों से आधा घंटा कम है. स्टडी में शामिल अंतरिक्ष यात्रियों में तीन चौथाई से ज्यादा ने उड़ान के दौरान सोने के लिए नींद की गोलियां लीं. खराब नींद के लिए वैज्ञानिक भारहीनता, शोर और अंतरिक्ष यानों के कूलिंग सिस्टम को जिम्मेदार मान रहे हैं.

जर्मनी के अंतरिक्ष यात्री अलेक्जांडर गैर्स्ट इस समय धरती से 400 किलोमीटर दूर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र आईएसएस पर हैं. वे ट्विटर पर हैं और अपने अनुभव अपने फॉलोअर्स से बांटते रहते हैं. नींद के बारे में उनका एकदम अलग अनुभव रहा है. जून के शुरू में उन्होंने ट्वीट किया, "यहां आश्चर्यजनक रूप से बहुत अच्छा सो रहा हूं, हालांकि ब्रेक के साथ, क्योंकि सोने के दौरान हवा में तैरने की आदत नहीं है."

एमजे/एएम (डीपीए)

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