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मनोरंजन

ट्रेजडी किंग अब 88 साल के

66 साल पहले हिंदी सिनेमा को कच्ची मिट्टी का वो चेहरा मिला जो किरदारों के साथ शक्ल बदल कर पक्का हो जाता, पीछे से आती आवाज शक्लों को पर्दे पर जिंदा कर देती. 50 साल तक इसने लोगों को दीवाना बनाए रखा. यह चेहरा दिलीप कुमार था.

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मुगल ए आजम के सलीम को याद कीजिए जो हिंदुस्तान पर काबिज मुगल शासन का वारिस है और अनारकली के प्रेम में डूबा एक आशिक भी. मोहब्बत की खातिर पूरे हिंदुस्तान की फौज और अपने बाप से भिड़ने वाला सलीम एक तरफ जंगी माहौल को जीता है तो दूसरी तरफ अनारकली की आशनाई को और दोनों को शिकायत नहीं होती.

Bollywood Filmstar Dilip Kumar

वैसे इस चेहरे का जादू महसूस करने के लिए ज्यादा पीछे जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. सौदागर के वीर सिंह, कर्मा के राणा और शक्ति के अश्विनी कुमार में से किसी एक को भी देख लें तो इस जादूगर की पहचान हो जाएगी. अगर यह भी मुमकिन न हो तो विधाता के शमशेर सिंह या धर्माधिकारी को ही देख लीजीए. गंवार गोपी और बिमल रॉय का देवदास तो ऐसे किरदार हैं जो भूलने वालों की भी आदत सुधार देंगे.

हिंदी सिनेमा के इसी जादूगर, दिलीप कुमार ने शनिवार को जीवन के 88 साल पूरे किए. वैसे 1944 में ज्वार भाटा के जगदीश से लेकर 1998 के किला में जगन्नाथ तक दिलीप साहब ने सैकड़ों चेहरे और नाम बदले लेकिन केवल फिल्मों में. असल जिंदगी में चेहरा कभी नहीं बदला और नाम बदला सिर्फ एक बार, यूसुफ खान दिलीप कुमार हो गए. आजाद का मस्तमौला जवान कब देवदास बन गया किसी को खबर ही नहीं हुई और तब इस चेहरे को एक और नाम मिला ट्रेजडी किंग.

हिंदी सिनेमा के दो बड़े नाम अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान, दोनों पर ही दिलीप कुमार का अंदाज चुराने के आरोप लगते हैं. इससे जाहिर हो जाता है कि 1944 से 1998 तक यह सितारा क्यूं हिंदी सिनेमा के आसमान पर ध्रुव की तरह चमकता रहा. हालांकि बीच में पांच साल का वह वक्त भी है जब उन्होंने फिल्मों से खुद को अलग कर लिया. पर इन पांच सालों के फासले के बाद 1981 में क्रांति के साथ जब सांगा लौटा तो एक नया चेहरा और नया अंदाज लेकर आने वाले 10-20 सालों के लिए हिंदी सिनेमा को एक क्रांतिकारी, दबंग बाप और कड़क पुलिस अफसर एक साथ मिल गया.

फिल्मफेयर अवॉर्ड में पहला बेस्ट एक्टर पुरस्कार जीतने वाले दिलीप कुमार के नाम इसे सबसे ज्यादा 8 बार जीतने का रिकॉर्ड भी है और नॉमिनेशन मिला दें तो यह संख्या 19 तक पहुंच जाती है. इसके अलावा 1993 में मिला लाइफटाइम अचीवमेंट तो है ही. दिलीप साहब की अदाकारी पर भारत और पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान दोनों के आवाम का सीना एक साथ धड़कता है. भारत सरकार ने दादा साहब फाल्के और पद्मविभूषण दिया तो पाक सरकार ने सर्वोच्च नागरिक सम्मान निशान ए इम्तियाज से नवाजा.

रिपोर्टः एजेंसियां/एन रंजन

संपादनः वी कुमार

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