′ट्रिपल तलाक′ के खिलाफ साथ आए भारतीय मुसलमान | दुनिया | DW | 01.06.2016
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दुनिया

'ट्रिपल तलाक' के खिलाफ साथ आए भारतीय मुसलमान

भारत में 50,000 मुस्लिम महिला और पुरुषों ने ट्रिपल तलाक की प्रथा को खत्म करने के लिए एक ऑनलाइन याचिका पर हस्ताक्षर किए हैं. याचिताकर्ता भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन चाहता है कि राष्ट्रीय महिला आयोग से इसमें हस्तक्षेप करे.

इस ऑनलाइन याचिका में ट्रपल तलाक को "गैर-कुरानी चलन" कहा गया है. बीएमएमए की सहसंस्थापक जाकिया सोमन ने कहा है कि इस पर हस्ताक्षर का राष्ट्रीय अभियान भारत में गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारंखंड, केरल और यूपी जैसे राज्यों में जारी है. अब तक 50,000 मुस्लिम महिलाओं और पुरुषों ने ट्रिपल तलाक की प्रथा को खत्म करने के लिए याचिका पर हस्ताक्षर कर दिए हैं.

ट्रिपल तलाक पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और सुप्रीम कोर्ट की तकरार के बाद मुस्लिम समाज बंटता दिख आ रहा है. जहां कट्टरपंथी संगठन इसे बरकरार रखना चाहते हैं, वहीं देश की 92 फीसदी से अधिक महिलाएं इसे पक्षपातपूर्ण और गलत चलन मानती हैं.

भारत में शरिया कानूनों की हिफाजत के लिए ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड तगड़ी लड़ाई लड़ने का मन बना चुका है. उनका मानना है कि शरिया मामलों में किसी के भी दखल देने की कोशिशों को रोकना होगा.

इसी साल अप्रैल में भारत के सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा की एक मुस्लिम महिला के मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए मुस्लिम महिलाओं के साथ हो रहे भेदभाव पर गंभीर टिप्पणी की थी. इसके अलावा उत्तराखंड का सायरा बानो मामला हो या काफी पहले का शाहबानो मामला - हर बार सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के अधिकारों की रक्षा की बात कही. शाहबानो मामले में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की अगुवाई में देश भर में कड़ी प्रतिक्रिया हुई थी और उस समय की राजीव गांधी सरकार ने 'मुस्लिम वुमेन (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन डिवोर्स) एक्ट 1986 लागू किया था.

एक बार में ही तीन बार 'तलाक, तलाक, तलाक' बोल कर बीवी से छुटकारा हासिल करने का चलन दक्षिण एशिया और मध्य पूर्व एशिया के सुन्नी मुसलमानों में प्रचलित है. हालांकि केवल तीन बार बोल देने से तलाक तो हो ही जाता है लेकिन इसे तीन महीनों के अंतराल पर बोलना होता है. आजकल इंटरनेट के जमाने में वीडियो कॉल, फोन या मैसेज पर भी तीन बार तलाक बोल या लिख कर कई शौहर अपनी पत्नियों को छोड़ देते हैं. इस आंदोलन में इस तरह के तुरत फुरत तलाक को खत्म करने की मांग की जा रही है.

ऑनलाइन याचिका देने वाले बीएमएमए का नेतृत्व मुसलमान महिलाएं ही कर रही हैं जो भारतीय मुसलमानों के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही हैं.

पाकिस्तान जैसे कई मुस्लिम देशों में फटाफट तलाक को गैरकानूनी घोषित किया जा चुका है क्योंकि इस्लाम में भी नशे, गुस्से या किसी आवेश में आकर तलाक देने की मनाही है. लेकिन इस पर दुनिया के अलग अलग देशों में काफी भिन्न नियम हैं.

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