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दुनिया

ट्रंप ने लगायी नाटो नेताओं को झिड़की

नाटो नेताओं के तने हुए चेहरों से घिरे अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के पास उनके लिए झिड़की ही थी. ब्रसेल्स में नाटो को जरूरी वित्तीय संसाधन न मिलने को लेकर ट्रंप ने कहा कि इस तरह वे नाटो को कमजोर कर रहे हैं.

ट्रंप ने अमेरिका में भी कई बार अन्य नाटो सदस्य देशों से पर्याप्त वित्तीय मदद ना मिलने को लेकर शिकायतें की हैं. इस बार ब्रसेल्स में नाटो की बैठक में हिस्सा लेने यूरोपीय शहर ब्रसेल्स पहुंचे ट्रंप ने सभी नेताओं को सामने सामने इस पर खरी खरी सुना दी. उन्हें उलाहना देते हुए ट्रंप ने कहा, "इनमें से कई देशों का तो बीते सालों का ही भारी रकम बकाया है."

राष्ट्रपति के इन बयानों के कारण नाटो में नये तरह का तनाव आया है. पूर्व में नाटो को "पुराना पड़ चुका" संगठन बता चुके ट्रंप ने इस अवसर पर भी उस बयान को बदलने या नाटों के साथ अपने उलझते संबंधों को सुलझाने की कोई कोशिश नहीं की. ट्रंप ने एक बार भी खुल कर सार्वजनिक रूप से नाटो का समर्थन नहीं किया. नाटो को उम्मीद थी कि वे भी पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की तरह "ऑल फॉर वन, वन फॉर ऑल" के सामुहिक रक्षा सिद्धांत को दोहराएंगे. इस पर सफाई देते हुए व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने कहा कि ट्रंप का बैठक में शामिल होना ही इस सिद्धांत के प्रति उनकी प्रतिबद्धता दिखाता है.

नाटो महासचिव येन्स श्टॉल्टेनबैर्ग ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप, उपराष्ट्रपति माइक पेंस और अन्य अमेरिकी अधिकारियों ने साफ साफ इस बारे में आश्वासन दिये. श्टॉल्टेनबैर्ग ने बताया, "यह संभव ही नहीं कि आर्टिकल 5 के लिए प्रतिबद्धता रखे बगैर, आप नाटो के लिए प्रतिबद्ध हों."

इस मौके पर नाटो के नये मुख्यालय में चांसलर अंगेला मैर्केल ने जर्मनी को विभाजित करने वाली बर्लिन की दीवार का एक स्मारक भेंट किया. इसके अलावा 11 सितंबर, 2011 के आतंकी हमले के बाद अमेरिका को मिली नाटो एकजुटता की याद में भी एक स्मारक लगाया गया. 

नाटो सदस्य देशों के असमान वित्तीय सहयोग को लेकर ट्रंप ने हमेशा ऐतराज जताया है. 2016 में नाटो के 28 सदस्य देशों में से केवल पांच ने ही अपनी जीडीपी का 2 फीसदी रक्षा बजट पर खर्च करने की शर्त को पूरा किया है. यह देश थे अमेरिका, ग्रीस, ब्रिटेन, एस्टोनिया और पोलैंड. जल्द ही इस समूह में मोंटेनेग्रो भी शामिल होने वाला है. कई पूर्वी यूरोपीय देश रूसी आक्रामकता को लेकर काफी चिंतित हैं और ट्रंप की ओर से इस मौके पर आर्टिकल 5  के लिए पूरा समर्थन जताये जाने की उम्मीद कर रहे थे, जिन्हें निराशा हाथ लगी.

आरपी/एमजे (एपी)

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