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दुनिया

ट्रंप ने दी फलस्तीनियों को मदद रोकने की धमकी

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका फलस्तीनी प्राधिकरण को दी जाने वाली मदद रोक सकता है, क्योंकि "अब वह शांति वार्ता के लिए इच्छुक नहीं है." ट्रंप येरुशलम को इस्राएली राजधानी के तौर पर मान्यता दे चुके हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति ने मंगलवार को कहा कि "अमेरिका फलस्तीनियों को हर साल करोड़ों डॉलर देता है और बदले में उसे कोई सराहना या सम्मान नहीं मिलता. यहां तक कि वे इस्राएल के साथ लंबे समय से टलती आ रही शांति संधि पर भी बात नहीं करना चाहते हैं."

सरकारी आंकड़ों के अनुसार अमेरिका ने 2018 में फलस्तीनी नियंत्रण वाले वेस्ट बैंक और गजा पट्टी के लिए 25.1 करोड़ डॉलर का बजट रखा है. संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत निक्की हेली ने कहा कि अमेरिका ने 1994 से फलस्तीनियों को पांच अरब डॉलर दिए हैं, जो किसी भी अन्य देश के मुकाबले ज्यादा है. उन्होंने कहा, "अमेरिका मध्य पूर्व में शांति को लेकर कभी इतना वचनबद्ध नहीं रहा."

ट्रंप ने दिसंबर के महीने में येरुशलम को इस्राएल की राजधानी के तौर पर मान्यता दी, जिससे न सिर्फ अरब दुनिया में अमेरिकी सहयोगी, बल्कि दुनिया के कई अन्य देश भी नाराज हो गए. उन्होंने अमेरिकी दूतावास को भी येरुशलम ले जाने की योजना के बारे में घोषणा की.

इस्राएल ने 1967 में पूर्वी येरुशलम और वेस्ट बैंक पर कब्जा किया. बाद में पूर्वी येरुशलम को उसने अपने क्षेत्र में शामिल कर लिया, हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कभी इस कदम को मान्यता नहीं मिली. फलस्तीनी लोग पूर्वी येरुशलम को भविष्य में बनने वाले अपने अलग फलस्तीनी देश की राजधानी के तौर पर देखते हैं. यह मुद्दा इस्राएल-फलस्तीनी विवाद की एक बड़ी वजह है. लेकिन ट्रंप का कहना है कि यह मुद्दा बातचीत में शामिल नहीं है.

फलस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने कहा कि येरुशलम को इस्राएल की राजधानी के तौर पर मान्यता दे कर अमेरिका ने इस्राएल और फस्तीनियों के बीच वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका खो दी है. ट्रंप लंबे समय से कहते रहे हैं कि वह "मध्य पूर्व में शांति" कायम करना चाहते हैं, लेकिन शांति वार्ता शुरू करने की कोशिशों में कोई प्रगति नहीं दिख रही है.

अतीत में इस्राएली प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतान्याहू दो राष्ट्रों वाले समाधान के प्रति अपना समर्थन जताते रहे हैं लेकिन 2015 में उन्होंने कहा कि जब तक वह प्रधानमंत्री हैं तब तक फलस्तीनी देश नहीं बन सकता.

एके/आईबी (रॉयटर्स, एपी)

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