1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

ट्रंप की अफगानिस्तान नीति पर बंटी दुनिया

अफगानिस्तान पर अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के भाषण से ठीक पहले अफगान राजधानी काबुल पर रॉकेट हमला हुआ और भाषण के बाद तालिबान ने जिहाद जारी रखने की धमकी दी. अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी ने ट्रंप के फैसले का स्वागत किया.

राष्ट्रपति ट्रंप ने अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों की तादाद बढ़ाने की घोषणा की है और कहा है कि वे इस अभियान में साथियों की भी मदद लेंगे. ट्रंप ने खुलकर स्वीकार किया कि उनकी शुरुआती भावना थी कि सेना को वापस बुलाया जाए लेकिन उनके सुरक्षा सलाहकारों ने उन्हें अभियान में तेजी लाने के लिए राजी कर लिया.

अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने देश में अमेरिकी सैनिकों की उपस्थिति बढ़ाने के अमेरिकी राष्ट्रपति के फैसले का स्वागत किया है. उन्होंने कहा है कि ट्रंप का फैसला इस विवाद में महत्वपूर्ण सहयोगी के रूप में अमेरिका की जारी प्रतिबद्धता की मिसाल है.

इसके विपरीत इस्लामी कट्टरपंथी तालिबान ने अमेरिका को युद्ध की धमकी दी है. तालिबान के प्रवक्ता सबीहुल्ला मुजाहिद ने अमेरिकी सैनिकों की पूरी वापसी की मांग करते हुए कहा कि जब तक एक भी अमेरिकी सैनिक अफगानिस्तान में रहेगा जिहाद जारी रहेगा. इस समय अफगानिस्तान में अमेरिका के 8,400 सैनिक तैनात हैं. योजना 4,000 और सैनिकों को भेजने की है.

नाटो के महासचिव येंस स्टॉल्टनबर्ग ने अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ युद्ध में अमेरिकी राष्ट्रपति की प्रतिबद्धता का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि सैन्य सहबंध नाटो बिनाशर्त अफगानिस्तान के साथ खड़ा है. उन्होंने कहा कि यह नाटो का लक्ष्य है कि अफगानिस्तान फिर कभी उन आतंकवादियों की सुरक्षित पनाह न बने, जो सहबंध के देशों और उनके साथियों पर हमला कर सकें.

नाटो के अनुसार इस समय अफगान सुरक्षा बलों को प्रशिक्षित करने के लिए 12,400 सैनिक तैनात हैं. स्टॉल्टनबर्ग ने कहा कि पिछले ही हफ्ते नाटो के 15 देशों ने अफगानिस्तान में अपने सैनिकों की संख्या बढ़ाने की रजामंदी जताई है. सुरक्षा की बिगड़ती स्थिति के कारण वहां तैनात सैनिकों की संख्या अगले साल बढ़कर 15,800 कर दी जायेगी.

पाकिस्तान में विपक्षी नेता इमरान खान ने भी आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में पाकिस्तान की कुर्बानियों पर जोर दिया है और कहा है कि पाकिस्तान को इससे सबक लेना चाहिए कि वह दूसरों की लड़ाई न लड़े.

उधर चीन ने अपने साथी पाकिस्तान का डॉनल्ड ट्रंप के आरोपों से बचाव किया है. अपने भाषण में ट्रंप ने कहा था कि पाकिस्तान तालिबान और दूसरे आतंकवादी संगठनों को पनाह दे रहा है और प्रतिद्वंद्वी भारत के प्रभाव को कम करने के इरादे से उसे बर्दाश्त कर रहा है. चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ अग्रिम मोर्चे पर लड़ रहा है और उसने बड़ी कुर्बानियां और योगदान दिया है. हुआ चुनयिंग ने कहा कि चीन इस बात का स्वागत करेगा कि पाकिस्तान और अमेरिका आतंकवाद के खिलाफ अपना संघर्ष आपसी सम्मान के आधार पर चलायेंगे और इलाके और पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए सहयोग करेंगे.

एमजे/एनआर (डीपीए, रॉयटर्स)

DW.COM

संबंधित सामग्री