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दुनिया

टॉयलेट नहीं बना तो दिया तलाक

भारतीय राज्य राजस्थान के जयपुर में एक अदालत ने उस महिला के पक्ष में फैसला सुनाया जो घर में टॉयलेट ना होने के कारण अपने पति से तलाक लेना चाहती थी.

Film - Toilet - Ek Prem Katha - Bollywood (Viacom 18 Motion Pictures)

हाल ही में टॉयलेट और स्वच्छता अभियान के विषय पर आयी फिल्म 'टॉयलेट-एक प्रेमकथा' का पोस्टर.

महिला इस बात से बहुत परेशान थी कि उसे शौच के लिए हमेशा घर से बाहर जाना पड़ता था. पांच साल से शादीशुदा महिला अपने पति से घर में शौचालय बनवाने की मांग करती आयी थी लेकिन मांग पूरी नहीं हुई. इससे तंग आकर महिला ने जयपुर की पारिवारिक अदालत में पति से तलाक की अर्जी दाखिल कर दी. महिला पक्ष की दलील थी कि पांच साल से उसके लाख कहने पर भी पति का घर में शौचालय ना बनवाना क्रूरता है. उसकी दलील से सहमत होते हुए राजस्थान की इस अदालत ने महिला के पक्ष में ही फैसला सुनाया.

जस्टिस राजेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि गांवों में महिलाओं को बाहर शौच करने की मजबूरी के कारण कई बार बहुत शारीरिक कष्ट झेलना पड़ता है, जब उन्हें शौच के लिए बाहर अंधेरा होने का इंतजार करना पड़े. जज ने खुले में शौच करने को एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या होने के साथ साथ इसे शर्मनाक और महिलाओं को प्रताड़ना देने वाला बताया. एक महिला को शौच के लिए सुरक्षित माहौल ना दे पाने को महिला के वकील राजेश शर्मा ने क्रूरता बताया था जिसे कोर्ट ने भी सही पाया.

भारत में किसी हिंदू जोड़े को कानूनन तलाक लेने के लिए अदालत में यह साबित करना पड़ता है कि उनके साथ या तो किसी तरह की क्रूरता हुई है, या हिंसा या फिर किसी तरह की गैरवाजिब वित्तीय मांगे रखी गयी हैं. हालांकि टॉयलेट ना होने के कारण तलाक होने का यह कोई पहला मामला नहीं है. एक साल पहले भी उत्तर प्रदेश में जब एक महिला के मंगेतर ने अपने घर में टॉयलेट बनवाने से इनकार कर दिया तो महिला ने शादी से ही मना कर दिया. इसी साल जून में ससुराल से मायके गयी महिला ने तब तक ससुराल लौटने से मना कर दिया जब तक वे घर में शौचालय नहीं बनवाते.

यूनीसेफ की मानें, तो आज भी भारत की करीब आधी आबादी यानि 60 करोड़ से अधिक लोग खुले में शौच जाते हैं. करीब 70 फीसदी भारतीय घरों में टॉयलेट नहीं बने हैं जबकि देश की 90 फीसदी आबादी के पास मोबाइल फोन जरूर हैं. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुले में शौच की समस्या को खत्म करना चाहते हैं और उन्होंने 2019 तक देश के हर घर में टॉयलेट बनवाने का वादा किया है. सरकार का कहना है कि 2014 में इस योजना के शुरु होने से लेकर अब तक दो करोड़ टॉयलेट बनाये जा चुके हैं. विशेषज्ञ बताते हैं कि आज भी सभी घरों में टॉयलेट ना होने का कारण केवल आर्थिक समस्या ही नहीं है. वे बताते हैं कि कई लोगों की यह धारणा है कि घर के भीतर शौच होने से घर गंदा होता है और बाहर खुले में शौच करना ज्यादा साफ आदत है.   

आरपी/एमजे (एएफपी)

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