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दुनिया

टैपिंग पर सारकोजी ने तोड़ी चुप्पी

फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति निकोला सारकोजी ने भ्रष्टाचार के आरोपों पर चुप्पी तोड़ते हुए सरकार पर जम कर हमला बोला है. सारकोजी ने फोन टैपिंग की तुलना तानाशाही से की है.

फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति 59 साल के सारकोजी घोटालों और विवादों के पेचीदगी भरे भंवर में फंसते नजर आ रहे हैं. हाल ही में उन पर कोर्ट के आदेश को गुमराह करने के आरोप लगे. सारकोजी और उनके वकील की बातचीत का कुछ अंश अखबारों में छपा. माना जा रहा है कि यह अंश कथित फोन टैपिंग का हिस्सा है. अब तक सारकोजी इस मुद्दे पर चुप्पी साधे थे.

कई लोगों का मानना है कि नए खुलासे से सारकोजी की राजनीतिक महत्वाकांक्षा पर पानी फिर सकता है. सारकोजी 2017 के राष्ट्रपति चुनाव में वापसी का ख्वाब देख रहे हैं. लेकिन खुलासे ताबूत पर आखिरी कील का काम कर सकते हैं. फ्रांसीसी दैनिक ला फिगारो में सारकोजी ने लिखा, "मुझे लगता है कि यह मेरा कर्तव्य है कि मैं इस चुप्पी को तोड़ूं. मैं ऐसा करना चाहता हूं, क्योंकि हमारे गणतंत्र के पवित्र सिद्धांत अनसुनी हिंसा से कुचले जा रहे हैं."

उन्होंने फोन टैपिंग की तुलना तानाशाही तरीकों से की है. साथ ही लीक हुई बातचीत को राजनीति से प्रेरित बताया. उन्होंने अपने ऊपर लगे कई भ्रष्टाचार के आरोपों को खारिज कर दिया. साथ ही उन्होंने राजनीति में वापसी की कोई इच्छा से इनकार किया.

सारकोजी ने लिखा, "जब किसी वकील के पास प्रक्रिया तक पहुंच नहीं है तो फिर किसने दस्तावेज सौंपे? सिर्फ जज और पुलिसकर्मियों के पास (दस्तावेज) हैं... क्या वे कानून और न्यायिक गोपनीयता से ऊपर हैं? फ्रांस के ला मोंडे अखबार और मीडियापार्ट वेबसाइट में लीक दस्तावेज के बारे में उन्होंने यह सवाल किया. सारकोजी ने फ्रांस के कानून मंत्री के उस दावे पर भी शक जताया, जिसमें कहा गया है कि उन्हें फोन टैपिंग के बारे में जानकारी नहीं थी. सारकोजी ने इसे बेवकूफ बनाने वाला करार दिया.

इशारों इशारों में सारकोजी ने कहा कि जजों ने सबूत इकट्ठा करने के मकसद से उनका फोन टैप करवाया. फ्रांस के प्रधानमंत्री जॉ मार्क एरो ने तत्काल उनकी टिप्पणियों को खारिज कर दिया. एरो ने सारकोजी के जजों और पुलिस पर हमले की निंदा करते हुए इसे "गंभीर नैतिक गलती" करार दिया. सारकोजी की पार्टी यूएमपी पर भी 2012 में फ्रांसुआ ओलांद से चुनाव हारने के बाद से कई आरोप लगे हैं. सारकोजी पर आरोप है कि उन्होंने अपने प्रचार के लिए फ्रांस की सबसे रईस मानी जाने वाली अरबपति महिला लॉरियाल हाइरेस लिलियाने से हजारों यूरो लिए. यूएमपी पर यह भी आरोप है कि उन्होंने लीबियाई नेता मुअम्मर गद्दाफी से 2007 में अपने चुनाव अभियान के खर्चे के लिए चंदा लिया.

एए/एजेए (एएफपी, डीपीए)

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