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दुनिया

टुकटुकी की गुमशुदगी ममता का सिरदर्द

पश्चिम बंगाल में दक्षिण 24-परगना जिले की दसवीं की छात्रा टुकटुकी मंडल की रहस्यमय गुमशुदगी का मुद्दा गरमाने लगा है. बीजेपी की ओर से इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाए जाने के बाद अब यह मामला देश-विदेश में सुर्खियां बटोर रहा है.

कोई दो महीने से अपहृत इस छात्रा का पता लगाने के लिए ममता बनर्जी सरकार पर दबाव बनाने की खातिर अब अमेरिका और इंग्लैंड में बांग्लाभाषी लोगों के संगठनों ने इस मामले पर विरोध प्रदर्शन किया है.

बीजेपी ने यहां उस मोगरहाटा थाने के सामने ही धरना शुरू कर दिया है जिसके तहत टुकटुकी का गांव पड़ता है. पार्टी ने इस मामले में राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी को ज्ञापन देकर उनके हस्तक्षेप की भी मांग की है. लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अब तक इस मामले पर आश्चर्यजनक रूप से चुप्पी साध रखी है. उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने उल्टे इसे बीजेपी का राजनीतिक स्टंट करार दिया है. महिला मुख्यमंत्री के चार साल के शासनकाल में बंगाल में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अत्याचार की सूची में अब टुकटुकी का नाम भी शामिल हो गया है.

दसवीं में पढ़ने वाली टुकटुकी का सबसे पहले कुछ असामाजिक तत्वों ने इस साल फरवरी में अपहरण कर लिया था. तब वह बैंक से घर लौट रही थी. उसे सुनसान स्थान पर ले जाकर उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया. उसके मजदूर पिता ने जब गांव के मुखिया और पुलिस से सहायता मांगी तो टुकटुकी को इस शर्त पर छोड़ा गया कि उसके घरवाले इस मामले की न तो पुलिस में शिकायत दर्ज कराएंगे और न ही रेप की पुष्टि के लिए उसकी मेडिकल जांच कराई जाएगी. लेकिन टुकटुकी की मुसीबतों का यहीं अंत नहीं हुआ. मई में दसवीं की परीक्षा की तैयारी के दौरान एक बार फिर उन गुंडों ने घर से ही उसका अपहरण कर लिया. गुंडों ने उसके पिता को धमकाया कि अगर पुलिस में शिकायत की गई तो लड़की की हत्या कर दी जाएगी. पिता का आरोप है कि नामजद शिकायत के बावजूद पुलिस ने अब तक इस मामले की जांच शुरू नहीं की है. उल्टे घरवालों पर ही शिकायत वापस लेने का दबाव बना रही है.

बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव सिद्धार्थ नाथ सिंह कहते हैं, "हमें संदेह है कि राज्य में एक सुनियोजित मानव तस्कर गिरोह सक्रिय है. लेकिन सब कुछ सामने आने के बावजूद ममता बनर्जी सरकार कोई भी कदम नहीं उठा रही है." बीजेपी और दूसरे सामाजिक संगठनों ने संदेह जताया है कि टुकटुकी भी देह व्यापार के धंधे में धकेल दी गई है. उनका आरोप है कि सत्तारुढ़ पार्टी के समर्थकों के शामिल होने और उनको राजनीतिक संरक्षण होने की वजह से ही सरकार व पुलिस ने इस मामले में चुप्पी साध रखी है. लेकिन दूसरी ओर, सत्तारुढ़ तृणमूल कांग्रेस का दावा है कि बीजेपी इस मुद्दे के जरिए अपना राजनीतिक हित साधने का प्रयास कर रही है. पार्टी के एक नेता का दावा है, "ममता बनर्जी सरकार राज्य में महिला अपराधों पर अंकुश लगाने की दिशा में ठोस काम कर रही है." उनका कहना है कि इस मामले में आरोपी तृणमूल के समर्थक नहीं है, जैसा आरोप लगाया जा रहा है, इसलिए इस मामले की लीपापोती का कोई सवाल ही नहीं पैदा होता.

वैसे, ममता के राज में महिलाओं के प्रति अपराध का यह कोई पहला मामला नहीं है. इससे पहले बीते साल असामाजिक तत्वों ने एक युवती के साथ दो बार सामूहिक बलात्कार करने के बाद उसे आग से जला कर मार दिया. उसके साथ दूसरी बार बलात्कार तब हुआ जब वह अभियुक्तों के खिलाफ पहले बलात्कार की रिपोर्ट लिखा कर थाने से लौट रही थी. बाद में पुलिस ने यह कह कर मामले की लीपापोती कर दी कि लड़की ने खुद ही आग लगा कर आत्महत्या कर ली थी. स्थानीय दबाव के चलते उस लड़की के टैक्सी ड्राइवर पिता ने बंगाल छोड़ कर अपने गृह राज्य का रुख कर लिया. राज्य में बीते चार वर्षों के दौरान ऐसे कई अन्य चर्चित मामले हुए हैं. वह चाहे पार्क स्ट्रीट का मामला हो या फिर कामदुनी में सामूहिक बलात्कार का. लेकिन ममता ने कभी इनमें से किसी मामले को फर्जी करार दिया तो कभी इसमें शामिल लोगों को क्लीनचिट देते हुए विपक्ष के जिम्मे दोष मढ़ दिया. यही वजह है कि राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़ों में महिला अत्याचारों के मामले में बंगाल शीर्ष स्थान पर बना हुआ है. राज्य में लापता होने वाली महिलाओं की तादाद लगातार बढ़ रही है. कोलकाता से सटे उत्तर व दक्षिण 24-परगना जिलों में महिलाओं के खिलाफ अपराध के सबसे ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं. इनमें से ज्यादातर मामले अनसुलझे हैं और उनमें किसी को सजा नहीं हो सकी है.

टुकटुकी को लेकर पैदा हुए बवाल के बावजूद सरकार व पुलिस की चुप्पी से यह कहना मुश्किल है कि क्या टुकटुकी कभी दोबारा घर लौटेगी? या फिर दूसरे मामलों की तरह यह मामला भी अनसुलझा ही रह जाएगा?

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