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ताना बाना

टाइगरों की संख्या ही नहीं, वजन भी घटा

भारत के बंगाल टाइगर की घटती संख्या चिंता का विषय तो है ही, लेकिन अब एक ताजा रिपोर्ट कहती है कि उनका वजन और शरीर का आकार भी घटता जा रहा है. जानकार इसकी वजह पौष्टिक खाने की कमी और मौसम में आते बदलावों को मानते हैं.

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भारतीय वन्यजीव अधिकारियों के एक सर्वे में पता चला है कि सुंदरबन के टाइगरों का वजन घट रहा है. साथ ही एक दशक पहले के मुकाबले अब उनके शरीर के अंगों का आकार भी घट रहा है. सुंदरबन टाइगर रिजर्व के निदेशक सुब्रत मुखर्जी का कहना है, "हम यह जानकर हैरान हैं कि सेहत मंद दिखने वाले टाइगरों का वजन भी सिर्फ 98 निकला. एक वयस्क टाइगर का औसत वजन 140 किलोग्राम होना चाहिए." जानकारों का कहना है कि टाइगरों के घटते वजन की वजह मौसम में आने वाले बदलावों के चलते उनके प्राकृतिक बसेरों पर पड़ने वाला दबाव है.

Flashgalerie Tiger (Indien)

टाइगरों के अस्तित्व के लिए मानवीय अतिक्रमण तो जिम्मेदार है ही, समुद्र के बढ़ते जल स्तर के कारण बंगाल की खाड़ी में गंगा, ब्रह्मपुत्र और मेघना नदियों के डेल्टा के आसपास पानी का खारापन भी बढ़ रहा है. इस कारण वहां ताजा पानी वाले तालाबों की कमी हो गई है. इस तरह के तालाबों की तरफ ही टाइगरों का शिकार बनने वाले जानवर खिंचे चले आते हैं. प्रकृति और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के अंतरराष्ट्रीय संघ से जुड़े टाइगर विशेषज्ञ प्रणबेश सान्याल का कहना है, "चीतल उनका मुख्य भोजन है, लेकिन समुद्र के बढ़ते जल स्तर के कारण इन हिरनों की संख्या घट रही है. बढ़ता जलस्तर जंगल में बाढ़ की वजह भी बनता है. इसलिए टाइगरों पर दबाव बढ़ रहा है. उन्हें पौष्टिक खाना नहीं मिल रहा है. ऐसे में बकरी और गाय की तलाश में वे इंसानी बस्तियों की तरफ चले जाते हैं."

सुंदरबन में 2001-02 में कराई गई पिछली गणना के मुताबिक भारत वाले हिस्से में सिर्फ 274 टाइगर बताए गए.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए कुमार

संपादनः महेश झा

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