टल सकता है सीरिया पर हमला | दुनिया | DW | 10.09.2013
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दुनिया

टल सकता है सीरिया पर हमला

सीरिया से रासायनिक हथियारों को अंतरराष्ट्रीय नियंत्रण में सौंपने के प्रस्ताव का विश्व भर में स्वागत हुआ है. जर्मनी ने उसे नष्ट करने में मदद की संभावना जताई है.

रूसी प्रस्ताव के बाद सीरिया विवाद में अचानक नया मोड़ आ गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि अगर सीरिया अपने रासायनिक हथियारों को अंतरराष्ट्रीय नियंत्रण में कर दे तो अमेरिका उस पर सैन्य कार्रवाई की योजना स्थगित कर सकता है. वैसे उन्होंने इस बात पर संदेह भी जताया है कि सीरिया ऐसा करने को राजी होगा, इसलिए उस पर सैनिक दबाव बनाए रखने की वकालत की है.

सोमवार को रूस ने सीरिया सरकार के सामने यह प्रस्ताव रखा था. सुरक्षा परिषद के सदस्य देश ब्रिटेन और फ्रांस के अलावा चीन ने भी रूस के इस प्रस्ताव का स्वागत किया है. जर्मन विदेश मंत्री गीडो वेस्टरवेले ने भी रासायनिक हथियारों पर अमेरिका और रूस के प्रस्ताव का समर्थन किया है. उन्होंने जनसंहारक हथियारों को अंतरराष्ट्रीय नियंत्रण में देने के प्रस्ताव को अच्छा प्रस्ताव बताते हुए कहा, "अब जरूरी है कि सीरिया की सरकार इस प्रस्ताव को सिर्फ शब्दों में ही नहीं स्वीकार करे बल्कि भरोसेमंद कदम भी उठाए." उन्होंने रासायनिक हथियारों को नष्ट किए जाने में जर्मनी की भागीदारी को संभव बताया है. वेस्टरवेले ने कहा कि जर्मनी को इसका अनुभव है.

जॉन केरी के बयान के बाद रूस का प्रस्ताव

जॉन केरी के बयान के बाद रूस का प्रस्ताव

रूसी प्रस्ताव

सोमवार को रूसी विदेश मंत्री सेर्गेई लावरोव ने कहा कि अगर सीरिया के रासायनिक हथियारों पर अंतरराष्ट्रीय नियंत्रण से हमलों को रोका जा सकता है तो रूस तुरंत दमिश्क के साथ बात करेगा. उन्होंने कहा कि रूस सीरिया से अपने रासायनिक हथियार नष्ट करने और रासायनिक हथियार प्रतिबंध संधि का सदस्य बनने की भी अपील कर रहा है.

सीरिया पर सैन्य कार्रवाई के लिए समर्थन जुटाने के लिए यूरोप गए अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने लंदन में कहा था कि सीरिया के रासायनिक हथियार सौंप देने की स्थिति में हमले को रोका जा सकता है. अमेरिकी विदेश मंत्रालय का कहना है कि यह कोई आधिकारिक बयान होने के बजाय केवल सरसरी तौर पर कही गई बात थी. इसके बाद ही रूस ने सीरिया के सामने यह प्रस्ताव रखा.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया है. उन्होंने कहा, "अगर सीरिया तैयार हो जाता है तो हम सुरक्षा परिषद से मांग करेंगे कि वह सीरिया में रासायनिक हथियारों के जखीरे को उन स्थानों पर ले जाए जहां उन्हें नष्ट किया जा सकता है."

बशर सरकार पर 21 अगस्त को दमिश्क में नागरिकों पर रासायनिक हथियारों का प्रयोग करने का आरोप है. इसमें 1429 लोगों की जानें गईं. अमेरिका ने सीरिया पर युद्ध अपराध के आरोप लगाए हैं. हालांकि सीरिया की सरकार इन आरोपों से इनकार कर रही है. हमले के बढ़ते दबाव के बीच सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद ने एक इंटरव्यू में अमेरिका को चेतावनी भी दी है कि वह सीरिया के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप ना करे.

ओबामा का रुख

रूसी प्रस्ताव के बाद ओबामा ने सोमवार को कई टीवी चैनलों को दिए गए इंटरव्यू में कहा कि अगर सीरिया रासायनिक हथियारों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ सहयोग करता है तो हमले पर फिर से विचार हो सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि सीरिया पर सैन्य कार्रवाई का दबाव बनाया जाना जरूरी है ताकि उसे उसकी गलती की सजा मिले.

टीवी चैनल एनबीसी को इंटरव्यू में ओबामा ने कहा, "मेरी प्राथमिकता यही रही है कि इस मामले का कूटनीतिक हल निकले." हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सीरिया के हथियार सौंप देने से भी सीरिया का संकट खत्म नहीं होगा.

अगस्त में हुए हमले के बाद मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वाच ने जोर दिया है कि रासायनिक हमले के पीछे सीरियाई सरकार का हाथ है. जिस तरह के हथियारों और रॉकेट का इस्तेमाल इस तरह के हमलों में होता है वे प्रशासन और सेना के पास ही हैं, विद्रोहियों के पास उनका होना संभव नहीं.

सीरिया विवाद में आए इस मोड़ के बाद अब सारी नजरें सैन्य कार्रवाई पर अमेरिकी संसद में होने वाली बहस पर टिकी हैं. ओबामा ने कहा है वह सीरिया में सीमित सैन्य कार्रवाई के लिए कांग्रेस का समर्थन चाहेंगे. अफगानिस्तान और इराक में एक दशक से ज्यादा से चल रहे युद्ध के अनुभवों के कारण अमेरिकी लोगों का सैन्य कार्रवाई के लिए राजी होना मुश्किल दिख रहा है, लेकिन राष्ट्रपति पूरी कोशिश कर रहे हैं कि कांग्रेस इस फैसले में उनका साथ दे.

एसएफ/एमजे (रॉयटर्स)

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