ज्वालामुखी विस्फोट की भविष्यवाणी | मंथन | DW | 08.07.2014
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मंथन

ज्वालामुखी विस्फोट की भविष्यवाणी

पृथ्वी पर करोड़ों साल से ज्वालामुखी फूट रहे हैं. पिछले एपिसोड में आपने देखा कि वैज्ञानिक इन्हें जिंदगी के लिए जरूरी बताते हैं लेकिन कई बार इनका विस्फोट जान माल का खासा नुकसान भी पहुंचाता है.

ज्वालामुखी विस्फोट की सटीक भविष्यवाणी करने की कोशिशें भी हो रही हैं और कुछ चौंकाने वाली बाते सामने आ रही हैं. थर्राहट के साथ लावा उगलता ज्वालामुखी. ये अपने साथ पिघली धातुएं, राख और भाप बाहर लाता है. दूर से भले ही ये शानदार नजारा लगे लेकिन ज्वालामुखी के आसपास बसे लोगों की जान पर बन आती है. बारीक कणों वाली राख दम घोटने लगती है. इसकी परत एक दो फुट मोटी हो सकती है. जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसस, पोट्सडाम में वैज्ञानिक ज्वालामुखी के रहस्य खोल रहे हैं. भूगर्भविज्ञानी दुनिया भर की भूगर्भीय गतिविधियों पर नजर रखते हैं. फिलहाल 1,500 सक्रिय ज्वालामुखी पकड़ में आए हैं.

भूगर्भविज्ञानी बिर्गर लुअर कहते हैं," हर ज्वालामुखी कुछ सौ सालों तक शांत रहता है. उसके बाद उसमें हलचल पैदा होने लगती है और धीरे धीरे ताकतवर होती जाती है, जैसे माउंट सेंट हेलेन्स या पिनाटुबो को ही लें. इन मामलों में भविष्यवाणी करना मुमकिन है, लेकिन आम तौर पर ऐसा करना मुश्किल होता है."

वीडियो देखें 03:41

कैसे उठते हैं ज्वालामुखी

ज्वालामुखी विस्फोट मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं और इनसे निकलने वाला मैटीरियल भी अलग अलग किस्म का होता है. लेकिन सभी के लावे के साथ 90 फीसदी पानी और काफी सल्फर डायॉक्साइड भी बाहर आती है. लावे के नमूनों से वैज्ञानिकों को भूगर्भ में हो रही हलचल का पता चलता है.

पोट्सडाम की हाइटेक लैब में वैज्ञानिक लावे से हर तत्व को निकालते हैं. कणों के आकार और उनकी संरचना से ज्वालामुखी की जड़ की गहराई, वहां का तापमान और वहां भूगर्भीय दबाव का पता चलता है. इन नतीजों से वैज्ञानिक हर ज्वालामुखी के खतरे का अंदाजा लगा सकते हैं. सटीक भविष्यवाणी करने में अभी और वक्त लगेगा. ज्वालामुखी पर शोध कर रहे राल्फ नाउमान कहते हैं, "ये अपराध विज्ञान की तरह नहीं है जिसमें आप 100 फीसदी ये कह सकें कि ये सैंपल इस खास जगह से आया है. इसीलिए यहां एक नमूने के बजाए एक पूरी सीरीज को जांचते हैं. लेकिन कुछ और बातें भी हैं जैसे मौसम से नमूनों का खराब होना. सैंपल सतह और गहराई से लिये जा सकते हैं. आप क्या खोज रहे हैं, उसके आधार पर आप ज्वालामुखी का प्रोफाइल बना सकते हैं."

इन अनसुलझी गुत्थियों के बावजूद वैज्ञानिक ज्वालामुखी विस्फोट की ताकत का पता लगाने के काफी करीब पहुंच चुके हैं. उनके मुताबिक ज्वालामुखी गतिविधि की सबसे मुख्य ताकत है पिघली चीजें और पानी. पानी और ज्वालामुखी के द्रव ही उसे विस्फोटक बनातें हैं लेकिन अब भी ज्वालामुखियों ने अपने सारे राज नहीं खोले हैं. लेकिन (पृथ्वी के लिए रिसाइक्लिंग यूनिट का काम करने वाले ये ज्वालामुखी जब तक सुलगते रहेंगे तब तक धरती पर जिंदगी फलती फूलती रहेगी.

रिपोर्टः ओंकार सिंह जनौटी

संपादनः मानसी गोपालकृष्णन

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