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दुनिया

ज्वालामुखी ने किया हवाई यातायात अस्त-व्यस्त

आइसलैंड के एक ज्वालामुखी के राख और धूल उगलने के कारण शुक्रवार शाम तक पूरे यूरोप में ज़्यादातर हवाई सेवाएं बंद रहेंगी. आइसलैंड में यह पिछले एक महीने में दूसरी बार ज्वालामुखी फटने की घटना है.

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हवाई उड़ानों को ख़तरा

आयाफ़्यालायोकूल नाम के इस ज्वालामुखी से उठ रही राख इतनी दूर तक फ़ैल गयी है कि यूरोप के विभिन्न हवाई अड्डों को बंद करना पड़ा है. उड़ानें रद्द होने का असर केवल यूरोप पर ही नहीं, बल्कि दूर अमेरिका, कनाडा और एशिया तक भी पड़ रहा है.

जर्मनी में भी कई मुख्य हवाई अड्डों को बंद कर दिया गया है. इन में बर्लिन और फ्रैंकफर्ट सहित हैम्बर्ग, ड्युसेलडोर्फ और लाइपज़िग के हवाई अड्डे शामिल हैं. यूरोप के सबसे व्यस्त लंदन के हीथ्रो हवाई अड्डे के बंद होने से करीब दो लाख यात्रिओं पर असर पड़ा है. यूरोप के दूसरे मुख्य हवाई अड्डे फ्रैंक्फर्ट की सभी उड़ानें म्यूनिक की तरफ मोड़ दी गई हैं. फ्रैंकफर्ट हवाई अड्डे पर सिर्फ एमरजेंसी में ही किसी हवाई जहाज को उतरने की अनुमति दी जाएगी. एयरलाइंसों को इस बात की चिंता है कि ज्वालामुखी की राख से विमान का इंजन खराब हो सकता है.

Vulkan Island April 2010 Passagiere warten auf ihre Flüge

शिकागो में उड़ान की प्रतीक्षा में यात्री

कल ही ब्रिटेन, आयरलैंड, नॉर्वे, स्वीडन और डेनमार्क के हवाई अड्डों को अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया गया था. बर्लिन, एम्स्टरडैम, ब्रसेल्स और जीनेवा से भी कई उड़ानों को रद्द कर दिया गया था. यह उम्मीद जताई जा रही थी कि दो दिन के अन्दर स्थिति सामान्य हो जाएगी, लेकिन अब वैज्ञानिकों का मानना है कि इसमें एक सप्ताह तक भी लग सकता है.

आइसलैंड के भूवैज्ञानिक रेय्निर बेओडवर्स्सन का कहना है, "यह अगले कुछ दिन, हफ्ते या फिर महीनों तक भी चल सकता है. पूरे यूरोप पर इसका असर पड़ेगा, यहां तक कि उत्तरी अमेरिका पर भी. यह तो हवा पर निर्भर करता है कि असर कैसे और कितना पड़ेगा. अगर यह राख इसी तरह उठती रही तो हवाई यातायात को भारी नुक्सान होगा."

वहीं हवाई यात्री इस बात से भी परेशान हैं कि एयरलाइंसें उनका पैसा नहीं लौटाएंगी. एसोसिएशन ऑफ ब्रिटिश इन्शोरर्स का कहना है कि आम तौर पर ज्वालामुखी के कारण उड़ान का रद्द होना या देरी से उड़ना इंशोरेंस में शामिल नहीं होता. इसके बावजूद कुछ हवाई कम्पनियां यात्रिओं को उनका पैसा लौटाने को तैयार हो गई हैं.

बुधवार को जागे इस ज्वालामुखी से जन जीवन भी काफ़ी प्रभावित हुआ है. ज्वालामुखी के कारण आयाफ़्यालायोकूल ग्लेशिअर के पिघलने से बाढ़ का खतरा बना हुआ है, हालांकि किसी के ज़ख़्मी होने के की कोई खबर सामने नहीं आई है. एक पुलिस अधिकारी ने बताया, "फिलहाल किसी की जान को खतरा नहीं है. हमने पूरा इलाका खाली करा लिया है और सभी सड़कों को भी बंद कर दिया है. ज्वालामुखी के जागने के बाद से पुलिस करीब आठ सौ लोगों को यहां से निकाल चुकी है.

रिपोर्ट: एजेंसियां/ईशा भाटिया

संपादन: राम यादव

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