ज्वालामुखी की मार, यूरोप में 17 हज़ार उड़ानें रद्द | जर्मन चुनाव 2017 | DW | 17.04.2010
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जर्मन चुनाव

ज्वालामुखी की मार, यूरोप में 17 हज़ार उड़ानें रद्द

आइसलैंड के ज्वालामुखी से उठे गुबार ने पूरे यूरोप के हवाई यातायात को ठप कर दिया है. जर्मनी, ब्रिटेन के सभी हवाई अड्डे और उड़ानें शनिवार तक के लिए रद्द कर दी गई हैं. यूरोप से भारत आने जाने वाली हवाई सेवाएं भी ठप पड़ीं.

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आइसलैंड के ज्वालामुखी आयाफ़्यालायोकूल से उड़ रही राख ने पूरे यूरोप के हवाई यातायात को ठप कर दिया है. पहले ही दिन शुक्रवार को करीब 17 हज़ार उड़ानें रद्द करनी पड़ीं. इनमें जर्मनी, हॉलैंड, फ्रांस और ब्रिटेन से भारत आने जाने वाली फ्लाइट्स भी हैं.

मुसीबत और ज्वालामुखी का यह गुबार कब छंटेगा इसका अंदाज़ा फिलहाल नहीं लग पा रहा है. यही वजह है कि लुफ्थांज़ा, ब्रिटिश एयरवेज़, टैप और केएलएम जैसी एयरलाइन कंपनियों के विमान जस के तस खड़े हैं. राइनएयर, यूरोप की सबसे सस्ती माने जाने वाली एयरलाइन कंपनी ने सोमवार दोपहर 12 बजे तक सभी उड़ाने रद्द कर दी हैं. लुफ्थांज़ा और केएलएम ने भी शनिवार दोपहर तक अपनी सभी उड़ाने रद्द कर दी है. इनमें फ्रैंकफर्ट और म्यूनिख़ से मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, हैदराबाद और बैंगलोर जाने वाली फ्लाइट्स भी हैं.

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ब्रिटिश एयरवेज़ ने भी शनिवार तक अपनी सभी उड़ाने बंद रखने का फ़ैसला किया है. जर्मनी के सभी हवाई अड्डे शनिवार तक बंद रहेंगे. यूरोप के तीन बड़े एयरपोर्ट लंदन का हीथ्रो, जर्मनी का फ्रैंकफर्ट, और पैरिस का शाल दे गल एयरपोर्ट शुक्रवार को पूरी तरह से बंद रहा.

हवाई अड्डों पर लंबी कतारें हैं. होटल ओवरबुक हो चुके हैं. लोग कोशिश में हैं कि रेल, टैक्सी, किराए की कार, जैसे भी संभव हो अपने अपने घरों की तरफ़ जाएं. लेकिन लंबी यात्रा करने वालों के लिए फ़िलहाल सफ़र रुक गया है. जर्मनी में ही फ्रैंकफर्ट एयरपोर्ट पर यात्रियों के लिए होटलों और हवाई अड्डों पर बिस्तर की सुविधा की गई है.

11 सितंबर 2001 को अमेरिका में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए हमले के बाद विमान उद्योग में यह सबसे बड़ी अफ़रातफ़री है. इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट असोसिएशन ने जानकारी दी है कि रोज़ाना हवाई कंपनियों को करीब 23 करोड़ यूरो का नुकसान हो रहा है.

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ख़ाली पड़ा लंदन का हीथ्रो हवाई अड्डा

स्केन्डेनेविया एयरवेज़ एसएएस ने चेतावनी दी है कि अगर सोमवार तक उड़ाने रद्द रखनी पड़ती है तो कुछ समय के लिए उसे ढाई हज़ार नौकरियां नॉर्वे में कम करनी पड़ेंगी.

38 देशों में हवाई यातायात पर निगरानी रखने वाली कंपनी यूरोकंट्रोल ने जानकारी दी कि 28 हज़ार नियमित उड़ानों में से केवल 12 हज़ार ही शुक्रवार को जा सकीं. ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, ब्रिटेन. चेक गणराज्य, जर्मनी, हंगरी, स्वीडन, लातिविया, पोलैंड, रुमेनिया, स्पेन, स्लोवाकिया, ने अपनी हवाई सीमाएं पूरी तरह से बंद रखी.

चाहे बड़े व्यावसायी हों, नेता या फिर कलाकार सभी कहीं न कहीं अटक गए हैं. अमेरिका से लौट रहीं जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल को शुक्रवार से शनिवार की रात लिस्बन में काटनी पड़ रही है. तो पोलैंड में कांचिंस्की के अंतिम संस्कार में आने के लिए कई नेताओं और परिजनों को मुश्किल हो रही है.

पिछले बीस साल में अस्सी हवाई जहाज़ों को ज्वालामुखी से निकली राख से परेशानी हुई है और इसमें दो पांच सौ यात्रियों वाले दो बोईंग 747 दुर्घटनाग्रस्त हो गए जबकि 20 अन्य हवाईजहाज़ों को भारी नुकसान हुआ. एवियन इंडस्ट्री के जानकारों के मुताबिक ज्वालामुखी की राख से विमान को उड़ान के दौरान ही भारी नुकसान पहुंचता है.

ज्वालामुखी से निकलने वाली राख अगर आसमान में पांच हज़ार मीटर तक जाती है तो इतनी मुश्किल नहीं होती क्योंकि बारिश के कारण धुआं और राख नीचे बैठ जाती है. लेकिन आइसलैंड के आयाफ़्यालायोकूल ज्वालामुखी से निकली राख आकाश में 10 हज़ार मीटर तक गई इस ऊंचाई पर हवाई जहाज़ उडते हैं और यहां कोई बारिश नहीं होती. तो इस राख और धुएं के कारण कॉकपिट का कांच पूरी तरह ब्लॉक हो सकता है और राख में उड़े कण हवाई जहाज़ के इंजिन में फंस सकते हैं और उसे जाम कर सकते हैं. राख़ की वजह से विमान के पंख भी भारी हो जाते हैं और विमान पर काबू पाना मुश्किल हो जाता है.

रिपोर्टः एजेंसियां/आभा मोंढे

संपादनः ओ सिंह

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