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दुनिया

जोश और उम्मीद का जमावड़ा

दावोस में विश्व आर्थिक फोरम शुरू हुआ है. फोरम का दावा है कि वह दुनिया की स्थिति बदलना चाहता है. यह कैसे हो इस पर स्विट्जरलैंड के सैलानी नगर दावोस में विश्व के प्रमुख नेता, कारोबारी और बुद्धिजीवी 43वीं बार बहस कर रहे हैं.

पिछले साल दावोस का माहौल बहुत सुस्त था. कर्ज संकट ने यूरोप को अपनी जकड़ में ले रखा था, यूरो जोन का टूटना न सिर्फ संभव लग रहा था बल्कि उसकी संभावना बढ़ गई थी. तब से बहुत कुछ हुआ है. ग्रीस के कर्ज का एक हिस्सा माफ कर दिया गया है, यूरोजोन के देशों ने नई बचाव छतरी तान ली है और यूरोपीय केंद्रीय बैंक ने कहा है कि वह यूरो की हर हालत में रक्षा करेगा.

इस बीच हालत और बेहतर हो गई है. साझा मुद्रा पर आया खतरा फिलहाल टल गया है. इस साल दावोस का नारा रेजिलिएंट डायनमिज्म भी प्रतिरोध से प्रभावित है, जिसका मतलब है खतरों को सहने वाली गतिशीलता. विश्व आर्थिक फोरम के संस्थापक क्लाउस श्वाब ने 2,500 भागीदारों को संबोधित करते हुए कहा, "मुझे उम्मीद है कि आप इस फोरम से ऐसे विचार लेकर जाएंगे जो सिर्फ संकट प्रबंधन से आगे जाते हों."

संकट के नेता

जब क्लाउस श्वाब यह बोल रहे थे तो यूरोपीय कर्ज संकट के प्रमुख किरदार पब्लिक के बीच नहीं थे, लेकिन वे आने वाले दिनों में दावोस के भागीदारों को संबोधित करेंगे. उनमें जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल के अलावा इटली के प्रधानमंत्री मारियो मोंटी, यूरोपीय केंद्रीय बैंक के प्रमुख मारियो ड्रागी और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की प्रमुख क्रिस्टीने लागार्ड भी होंगे.

रूस इस साल 20 प्रमुख औद्योगिक और विकासमान देशों के क्लब का प्रमुख है और खास तौर पर दावोस में उपस्थित है. प्रधानमंत्री दिमित्री मेदवेदेव बुधवार को फोरम को संबोधित करने वाले शुरुआती विश्व नेताओं में शामिल थे. रूस की आर्थिक स्थिति पर कई गोष्ठियों में चर्चा होगी.

भारत, दक्षिण अफ्रीका, नाइजीरिया और बहुत से दूसरे देश भी अपने अहम प्रतिनिधियों के साथ फोरम में हिस्सा ले रहे हैं. फोरम के आयोजकों में शामिल बोर्ग ब्रेंडे ने बताया, "इस साल करीब 50 राज्य और सरकार प्रमुख फोरम में हिस्सा ले रहे हैं." यह अब तक का रिकॉर्ड है. उनके अलावा करीब 350 मंत्री और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि हैं. उनमें संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून भी हैं.

गूगल अनुपस्थित

सभी शाखाओं और देशों के प्रमुख उद्यमी भी दावोस पहुंचे हैं. विश्व आर्थिक फोरम का खर्चा मुख्य रूप से करीब 1,000 कंपनियों की सदस्यता फीस से चलता है. वे हर साल 34,000 से 4,00,000 यूरो की सदस्यता फीस देते हैं. इस बार सर्च इंजन चलाने वाली इंटरनेट कंपनी गूगल फोरम में शिरकत नहीं कर रही है. उसने बिना कारण बताए अपनी भागीदारी रद्द कर दी.

इस साल उम्मीद और जोश के भाषणों के साथ ताजा सर्वे के नतीजे भी मेल नहीं खाते. यह सर्वे ऑडिटिंग कंपनी प्राइस वॉटरहाउस कूपर्स ने कराया है और इसे फोरम की शुरुआत से पहले जारी किया गया है. इस सर्वे के अनुसार भविष्य को अत्यंत उम्मीद के साथ देखने वाले सीईओ की तादाद पिछले बारह महीनों में गिर गई है.

खासकर यूरोप के उद्यमी निराश हैं जहां सिर्फ बीस फीसदी सीईओ ने ज्यादा उम्मीद दिखाई है. पीडब्ल्यूसी के प्रमुख डेनिस एम नैली कहते हैं, "अत्यधिक नियमन, सरकारी कर्ज और पूंजी बाजार की अस्थिरता जैसी समस्याओं पर भारी चिंता को देखते हुए कोई आश्चर्य नहीं कि उद्यमों के प्रमुख की उम्मीद पिछले बारह महीनों में कम हुई है."

प्रचार का मौका

माहौल से स्वतंत्र विश्व आर्थिक फोरम अपने भागीदारी को एक दूसरे के साथ संवाद की संभावना दे रहा है. और स्वाभाविक रूप से खुद अपना प्रचार करने, निवेशकों को लुभाने, नए ग्राहक पाने या फिर अच्छे काम के लिए समर्थन जुटाने का यह एक अच्छा मौका भी है.

जैसे कि दक्षिण अफ्रीकी अभिनेत्री और ऑस्कर पुरस्कार विजेता चार्लीज थेरोन को दावोस में एड्स के खिलाफ संघर्ष में उनकी सक्रियता के लिए सम्मानित किया गया. थेरोन ने कहा, "विश्व भर में एड्स का शिकार होने वाले दो तिहाई लोग सहारा के दक्षिण में स्थित अफ्रीकी देशों में मरते हैं." उन्होंने कहा कि एड्स के इलाज और उसे रोकने में दवा उद्योग ने काफी प्रगति की है लेकिन संघर्ष अभी समाप्त नहीं हुआ है.

राजनीति, अर्थव्यवस्था और विज्ञान जगत के प्रमुख लोगों की उपस्थिति के बावजूद इस साल का फोरम भी बिना किसी साफ नतीजे या ठोस फैसलों के समाप्त होगा. फोरम को इसका अधिकार भी नहीं है. इसीलिए अक्सर कहा जाता है कि यह मंच मैनेजरों और राजनीतिज्ञों के लिए अपने अहं को तुष्ट करने का मंच है. क्लाउस श्वाब मानते हैं कि ऐसा है, "मैं सभी भागीदारों के लिए कामना करता हूं कि वे फोरम के बाद पहले से ज्यादा जोश, उम्मीद, प्रतिरोध की क्षमता और आवेश से भरे होंगे."

रिपोर्ट: आंद्रेयास बेकर/एमजे

संपादन: ईशा भाटिया

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