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दुनिया

जॉब गाइड करेंगे छात्रों की मदद

जर्मनी में अब से हाइ स्कूल में पढ़ रहे छात्रों के लिए ख़ास जॉब गाइडों को नियुक्त किया जाएगा जो छात्रों का मार्गदर्शन करेंगे और उन्हें व्यवसायिक प्रशिक्षण की सीटें दिलाने में मदद करेंगे.

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जर्मन सरकार इस कार्यक्रम को आठ साल चलाएगी और इसमें 75 करोड़ पचास लाख यूरो लगाए जाएंगे. जर्मन शिक्षा मंत्री आनेटे शावान ने इस कार्यक्रम का एलान करते हुए जर्मनी में प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी पर ध्यान देने की बात कही है.

शावान ने 2010 के लिए व्यवसायिक प्रशिक्षण रिपोर्ट पेश करते हुए कहा, "हम इन युवाओं की क्षमता को पूरा बढ़ावा देंगे और इसे उभरने देंगे." शावान ने कहा कि इस कार्यक्रम के अंतर्गत 60,000 बच्चों को सातवीं कक्षा से लेकर प्रशिक्षण की सीट मिलने तक मदद दी जाएगी.

Deutschland Atom Endlager Asse Annette Schavan

शिक्षामंत्री शावान की पहल

शावान के मुताबिक जर्मनी में समय से पहले स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या बहुत ज़्यादा है हालांकि पिछले साल से यह कम हुई है. इसमें आप्रवासी छात्रों और छात्राओं की संख्या पिछले वर्षों से बढ़ी है. कार्यक्रम के तहत पहले 60 हज़ार छात्रों को जॉब गाइड उनकी पढ़ाई औऱ प्रशिक्षण में मदद करेंगे.

रिपोर्ट के मुताबिक 2009 में 2008 के मुकाबले लगभग 8 प्रतिशत कम छात्रों को किसी संस्था में व्यवसायिक प्रशिक्षण करने का मौका मिला. 2009 में लगभग पाँच लाख 66 हज़ार बच्चों को प्रशिक्षण की सीटें मिलीं. इसके अलावा सितंबर के अंत तक लगभग 17 हज़ार सीटें स्कूलों में खाली रह गईं जबकि लगभग 9000 आवेदकों को सीटे नहीं मिलीं.

शावान अब अपने नए कार्यक्रम के तहत लगभग 35 करोड़ 50 लाख यूरो प्रशिक्षण गाइडों में लगाएंगी. इनमें से एक तिहाई बिना पैसा लिए हुए काम करेंगे जब कि बाकी जर्मन रोज़गार एजेंसी और जर्मन शिक्षा मंत्रालय द्वारा नियुक्त किए जाएंगे. कार्यक्रम के बाकी हिस्से में 40 करोड़ यूरो लगाए जाएंगे. शावान ने कहा कि इस कार्यक्रम को कुछ क्षेत्रों में टेस्ट किया गया है और इसके नतीजे अच्छे निकले हैं, “इसके नतीजे इतने सकारात्मक हैं कि कार्यक्रम को पैसों की कमी की वजह से असफल नहीं होना चाहिए.“ सीडीयू पार्टी की शावान ने कंपनियों से अपील की है कि वे छात्रों को प्रशिक्षण दें. उनके मुताबिक, "जो इस वक़्त ऐसा नहीं करता है, वह खुद ही कुछ सालों में इसके बुरे असर का शिकार होगा."

रिपोर्टः एजेंसियां/एम गोपालकृष्णन

संपादनः महेश झा

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