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दुनिया

जैविक विविधता लक्ष्यों पर सहमति

बीस साल की सौदेबाजी के बाद संयुक्त राष्ट्र के देशों ने जेनेटिक संसाधनों की हिस्सेदारी पर समझौता कर लिया है. जापान के नागोया में जंगलों, कोराल रीफ और जीव विविधता की रक्षा के लिए ऐतिहासिक संधि पर सहमति हो गई.

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दो सप्ताह तक चले संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में धनी और गरीब देशों ने जीव जंतुओं और पेड़ पौधों के विनाश को रोकने के लिए प्रकृति के नुकसान पर लगाम कसने के लिए प्रभावकारी और फौरी कदम तय किया है.193 देशों के प्रतिनिधियों ने प्रदूषण को रोकने, वनों और समुद्री जीवन की रक्षा करने, संरक्षण के लिए जमीन और जल संसाधन अलग करने और मछलीमारी का सही प्रबंधन करने का फैसला लिया है.

शनिवार सुबह संधि पर सहमति होने के तुरंत बाद संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के प्रमुख जर्मनी के आखिम श्टाइनर ने कहा, "यह जश्न मनाने का दिन है." प्रतिनिधियों और ग्रीन दलों ने कहा है कि इस संधि ने उम्मीद जगाई है कि संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण संबंधी समस्याओं के समाधान में मदद दे सकता है.

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नागोया कांफ्रेंस

संधि के महत्वपूर्ण तत्वों में से एक जैविक विविधता को बचाने के लिए 17 फीसदी जमीन और 10 फीसदी समुद्र की सुरक्षा करनी है ताकि वहां जीव-जंतु और प्लांट फैल सकें. इस समय 13 फीसदी जमीन और 1 फीसदी समुद्र संरक्षित है.

कुछ पर्यावरण संगठनों ने नए लक्ष्यों की आलोचना करते हुए कहा है कि वे उम्मीद से कम महात्वाकांक्षी हैं जबकि अन्य ने 20 सूत्री योजना को साझी वैश्विक कार्रवाई की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया है. ग्रीनपीस ने नए लक्ष्यों पर असंतोष व्यक्त किया है, जिसके बारे में प्रतिनिधियों का कहना है कि उसे चीन और अन्य विकासशील देशों की मांग पर कम कर दिया गया है. अमेरिका भी नए समझौते में शामिल नहीं है क्योंकि उसने संयुक्त राष्ट्र के जैविक विविधता संधि का अनुमोदन नहीं किया है.

रिपोर्ट: एजेंसियां/महेश झा

संपादन: ओ सिंह

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