जेबरा के शरीर पर धारियां क्यों | विज्ञान | DW | 02.04.2014
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विज्ञान

जेबरा के शरीर पर धारियां क्यों

जीवविज्ञानियों की मानें तो जेबरा के शरीर पर धारियों का सबसे महत्वपूर्ण काम है सीसी मक्खी को अपने पास आने से रोकना. सीसी मक्खी नींद की बीमारी पैदा करने वाली एक तरह की अफ्रीकी मक्खी है.

पिछले डेढ़ सौ सालों से वैज्ञानिकों के बीच इस बात पर बहस होती रही है कि आखिर विकास के क्रम में जेबरा के शरीर पर खास तरह की धारियां क्यूं बनी होंगी. जीवविज्ञानियों की हमेशा से यह दलील रही है कि किसी न किसी खास मकसद से ही जीवों में तरह तरह के अंतर आए. एक कोशिका वाले जीव से विकास के क्रम में आगे चलकर तरह तरह के जीव जंतु बनने के पीछे यही कारण बताया जाता है. इसीलिए सवाल यह उठता है कि जेबरा की धारियों का क्या विशेष मकसद हो सकता है.

'नेचर कम्यूनिकेशंस' नामके जरनल में प्रकाशित एक स्टडी में बताया गया है कि इस बात की काफी ज्यादा संभावना है कि परजीवी मक्खियों को खुद से दूर रखने के लिए ही धारियां बनी होंगीं. सीसी मक्खी और उसके जैसी दूसरी खून चूसने वाली मक्खियों से बचने की कोशिश में शरीर पर इस तरह की धारियों का उभरना एक महत्वपूर्ण कारण हो सकता है.

2012 में हुए कुछ वैज्ञानिक परीक्षणों में पाया गया कि खून चूसने वाली कई मक्खियां धारियों के बजाय एक समान दिखने वाली सतह पर बैठना पसंद करती है. कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के रिसर्चरों की टीम के प्रमुख टिम कारो मानते हैं कि वैसे तो धारियों की इस पहेली का कोई सीधा सीधा जवाब नहीं है लेकिन फिर भी परजीवी मक्खियों वाले सिद्धांत में काफी दम है.

कारो की शोधकर्ता टीम ने पता लगाया कि जेबरा और परजीवी मक्खियों के दो बड़े समूह भौगोलिक तौर पर एक ही इलाके में पाए जाते हैं. खून चूसने वाली ताबानुस और ग्लोसिना मक्खियां 'इक्विड' प्रजाति के जानवरों का खून पीती हैं. जेबरा इसी प्रजाति का जीव है. इससे यह बात साफ होती है कि जेबरा को इन परजीवी मक्खियों से सुरक्षित रहने के लिए किसी उपाय की जरूरत थी. सीसी मक्खी से होने वाली 'स्लीपींग सिकनेस' नामकी बीमारी इक्विड प्रजाति के लगभग सभी अफ्रीकी जानवरों में पाई जाती है. लेकिन जेबरा में इस बीमारी के मामले काफी कम हैं.

सन 1870 में जब चार्ल्स डार्विन और अल्फ्रेड वैलेस ने क्रमिक विकास का सिद्धान्त दिया, तबसे ही जेबरा की इस अनूठी सी दिखने वाली धारियों पर बहस चल रही है. कभी कहा गया कि ये धारियां जेबरा कहीं भी छिपने में आसानी पैदा करती है इससे वह खुद को बचा सकता है. एक और परिकल्पना के अनुसार, शेर, हाइना और दूसरे शिकारी जानवरों से बचने में जेबरा की धारियां काम आती हैं. इससे वह अपने शिकारियों की आंख में धूल झोंक कर बच सकता है. यह भी कहा गया कि शायद इन धारियों से गर्मी निकलती है जिससे जेबरा खुद को ठंडा रखता है. या फिर यह डिजाइन सिर्फ इतने सारे जानवरों के बीच खुद को अलग दिखाने के लिए बनी होंगी. जेबरा के जैसे दिखने वाले घोड़ों को परजीवी मक्खियों के काटने से बहुत सारी बीमारियां होती हैं. कारण यह हो सकता है कि मक्खियों से बचाने के लिए उनमें धारियां नहीं है. और इसीलिए कई बार घोड़ा पालने वाले लोगों सलाह भी दी जाती है कि वो घोड़ों के ऊपर सफेद रंग की धारियां बना दें ताकि वह मच्छरों और मक्खियों से बच सकें.

आरआर/एएम (एएफपी)