जुबिन पर पाबंदी की मांग | मनोरंजन | DW | 29.08.2013
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मनोरंजन

जुबिन पर पाबंदी की मांग

जम्मू कश्मीर के अलगाववादियों ने पश्चिमी संगीत के मशहूर नाम जुबिन मेहता के कंसर्ट पर रोक लगाने की मांग की है. जर्मन दूतावास की मदद से यह कंसर्ट अगले महीने श्रीनगर में होने वाला है.

इस कार्यक्रम के जरिए भारतीय मूल के संगीतकार जुबिन मेहता का सम्मान करने की योजना है, जिन्हें श्रीनगर के मशहूर मुगल गार्डन में प्रदर्शन करना है. एक तरफ जर्मनी की बवेरिया स्टेट ऑर्केस्ट्रा के साथ मिल कर तैयारियां जोर शोर से चल रही हैं, वहीं अलगाववादियों का कहना है कि राज्य एक संकट की घड़ी से गुजर रहा है और ऐसे में यह कार्यक्रम ठीक नहीं.

अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी का कहना है, "यह कंसर्ट कश्मीर में नहीं होना चाहिए. आयोजकों को हमारी भावनाओं का भी ख्याल रखना चाहिए. किसी भी तरह का अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक, राजनयिक, सांस्कृतिक या खेल आयोजन जम्मू कश्मीर के लिए ठीक नहीं होगा." उन्होंने सुझाव दिया, "जर्मनी को एक सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए और इस आयोजन से दूर रहना चाहिए. इससे कश्मीर के लोगों का भला नहीं होगा."

हर तरफ से विरोध

हुर्रियत कांफ्रेंस के अध्यक्ष मीरवाइज उमार फारूक का भी स्वर लगभग ऐसा ही था. उनका कहना है कि हाल में भारत पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ा है और इस आयोजन के लिए यह सही वक्त नहीं है, "इस पर पैसे खर्च करने की जगह स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मुद्दों पर खर्च किया जाना चाहिए."

Klassik Dirigent Zubin Metha

77 साल के जुबिन मेहता

यहां तक कि कश्मीर के मुफ्ती बशीरुद्दीन ने भी विरोध किया है. कंसर्ट का एलान 22 अगस्त को किया गया और उसके बाद से ही विरोध शुरू हो गया. कश्मीर में सिविल सोसाइटी के सदस्य भी इसे रद्द करने की मांग कर रहे हैं. उन्होंने भारत में जर्मनी के राजदूत मिषाएल श्टाइनर से अपील की है कि वे "विवाद वाली जगह" पर कंसर्ट कराने के फैसले पर दोबारा विचार करें. उनकी अपील में कहा गया, "एक म्यूजिकल कंसर्ट के जरिए किसी कब्जे वाले क्षेत्र को कानूनी रूप देना ठीक नहीं है. नाजी जर्मनी में भी कला और संगीत का गलत इस्तेमाल हुआ है. हमें भरोसा है कि आप इस बात को समझेंगे कि हम किसी ऐसी चीज का कश्मीर में स्वागत नहीं कर सकते."

साल भर की योजना

जर्मन राजदूत श्टाइनर एक साल से इसकी योजना बना रहे थे. उनका मानना है कि यह कश्मीर की जनता के लिए अच्छा तोहफा होगा, "यह पूरी तरह से सांस्कृतिक कार्यक्रम है और इसका राजनीति से कुछ लेना देना नहीं. कश्मीर के लोग बाहर की दुनिया से जुड़ना चाहते हैं और यह कार्यक्रम इसका मौका देता है. संगीत एक अंतरराष्ट्रीय भाषा है. यह लोगों को जोड़ता है."

इस भव्य समारोह में 1,500 लोगों को हिस्सा लेना है. यहां लुडविष फॉन बीथोफेन, जोसेफ हेडन और पीटर इलयिच चाएकोव्स्की का संगीत भी होगा. जर्मन प्रांत बवेरिया से एक निजी विमान करीब 100 संगीतकारों और उनके साज लेकर भारत पहुंचेगा. योजना है कि पूरे कार्यक्रम का भारत और यूरोप में लाइव प्रसारण किया जाए.

मेहता और जर्मनी

योजना की शुरुआत पिछले साल जुलाई में हुई, जब श्टाइनर ने जुबिन मेहता को जर्मनी के प्रतिष्ठित सम्मान जर्मन ऑर्डर ऑफ मेरिट से नवाजा. इस कंसर्ट के लिए मेहता ने कोई फीस नहीं लेने का फैसला किया है. जुबिन मेहता का जर्मनी से नाता 1960 के दशक से है, जब उन्होंने बर्लिन फिलहार्मोनिक ऑर्केस्ट्रा का निर्देशन किया था.

घाटी के मशहूर संतूरवादक पंडित भजन सोपोरी भी चाहते हैं कि यह कार्यक्रम हो और इस पर संकट छाता देख उनका कहना है, "इस ऑर्केस्ट्रा से लोगों का दुख दर्द दूर होगा. उनके जख्मों पर मरहम लग सकती है."

हालांकि जर्मन दूतावास के सूत्रों का कहना है कि तमाम विरोधों के बाद भी यह शो तय वक्त से सात सितंबर को होगा.

रिपोर्टः मुरली कृष्णन, नई दिल्ली (एजेए)

संपादनः निखिल रंजन

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