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दुनिया

जी20 सम्मेलन में कौन से फैसले हुए और कौन से रह गये

जी20 सम्मेलन में एक सुर में हिंसक प्रदर्शनकारियों की कार्रवाई की कड़ी निंदा हुई लेकिन पर्यावरण सुरक्षा और व्यापार से जुड़े मुद्दों पर कुछ मतभेद बरकरार रहे. अमेरिका और रूस सीरिया में अस्थायी संघर्षविराम पर सहमत हुए.

जी20 शिखर सम्मेलन के समापन पर मेजबान जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल ने खास तौर पर पुलिस अधिकारियों से मुलाकात करके उनका शुक्रिया अदा किया. इन अधिकारियों ने सम्मेलन में हिस्सा लेने आये राष्ट्र और सरकार प्रमुखों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि मंडलों की सुरक्षा सुनिश्चित की है.

जर्मन चांसलर ने वैश्वीकरण और निवेश वाली मौजूदा व्यवस्था के विरोधी प्रदर्शनकारियों की हिंसक कार्रवाइयों की कड़ी आलोचना की. उन्होंने कहा, "जो इस तरह की कार्रवाइयां करते हैं, उनका मकसद राजनीति की आलोचना करना नहीं है. जो ऐसा काम करते हैं वे खुद को लोकतांत्रिक समुदाय से बाहर खड़ा कर लेते हैं.”

जर्मन चांसलर के अनुसार हिंसक प्रदर्शनों के दौरान प्रभावित होने वाले लोगों को जल्द से जल्द सहायता दी जायेगी. विरोध प्रदर्शनों के दौरान कई दुकानों को लूट लिया गया, तोड़फोड़ की गई और शहर की सड़कों पर खड़ी कई गाड़ियों को आग लगा दी गयी.

पर्यावरण सुरक्षा पर मतभेद

प्रदर्शनकारी 19 औद्योगिक और विकासशील देशों के अलावा यूरोपीय संघ के इस शिखर सम्मेलन की जगह तक पहुंचने में नाकाम रहे. ऐसा जर्मनी और उसके पड़ोसी देशों के बीस हजार पुलिसकर्मियों की कोशिशों के कारण संभव हो पाया.

बाहर पुलिसकर्मी अपनी जिम्मेदारी को निभाने में पूरी तरह सफल रहे, लेकिन शिखर सम्मेलन के समापन पर अंतिम दस्तवेज को तैयार करने वालों के बीच बहुत से मुद्दों पर सहमति नहीं बन पायी.

सभी 20 सदस्यों के बीच सहमति सिर्फ इस पर बनी कि वित्तीय बाजारों का नियमन जारी रखा जाए, आतंकवाद और टैक्स चोरी का मुकाबला किया जाए. 2008 के वित्तीय संकट के बाद बेहद महत्वपूर्ण होने वाले इस समूह का मुख्य एजेंडा यही है.

पर्यावरण सुरक्षा के मामले पर जी20 में वैसी एकता नहीं रही, जैसी कि पहले हुआ करती थी. 19 सदस्य एक तरफ और बीसवां सदस्य अमेरिका दूसरी तरफ, जो पेरिस समझौते से अलग हो चुका है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप हैम्बर्ग में पेरिस समझौते के मुताबिक उत्सर्जन गैसों को कम करने का कोई संकल्प नहीं करना चाहते थे.

ट्रंप का पुतिन पर अच्छा प्रभाव

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने इस शिखर सम्मेलन को अपना अंतरराष्ट्रीय अलगाव खत्म करने और दोतरफा मुलाकातों के लिए इस्तेमाल किया. उन्होंने जर्मन चांसलर के नेतृत्व की भी तारीफ की.

अमेरिका और रूस की नजर में, इस शिखर सम्मेलन में सबसे अहम अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति पुतिन की मुलाकात रही. दोनों नेताओं ने सीरिया में अस्थायी संघर्षविराम पर सहमति जतायी.

अमेरिकी प्रशासन की नजर में, यह डॉनल्ड ट्रंप की एक जीत है. रूसी राष्ट्रपति का कहना था कि और अधिक द्विपक्षीय सहयोग के लिए एक बुनियाद रख दी गयी है. उनका कहना था कि टीवी पर और असल में नजर आने वाले ट्रंप में स्पष्ट रूप से अंतर है.

अधिक अंतरराष्ट्रीय सहयोग

जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल ने कहा कि जी20 अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ज्यादा सहयोग करने के लिए तैयार है. हैम्बर्ग में जी20 शिखर सम्मेलन के समापन पर होने वाली एक प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने साफ तौर पर कहा कि मिलजुल कर ही समस्या के समाधान और विकास को मुमकिन बनाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि जी20 के सदस्य संरक्षणवाद के खिलाफ और निष्पक्ष व्यापारिक नीतियों के प्रति कृतसंकल्प हैं.

अफ्रीका के साथ साझीदारी की शुरुआत

चांसलर मैर्केल को इस दौरान एक ऐसी कामयाबी भी हासिल हुई जो उनके दिल के करीब है. अफ्रीका में साझीदारी और निवेश के लिए एक नये समझौते की शुरुआत हो गयी है. सहमति हुई है कि अफ्रीकी अर्थव्यवस्था की कारोबारी संस्थाओं में प्रत्यक्ष निवेश को बढ़ाने के लिए कोशिशें की जायेंगी. इस निवेश और आर्थिक प्रगति का मकसद यह होगा कि अफ्रीकी लोग बेहतर भविष्य के लिए यूरोप की तरफ आने के लिए मजबूर न हों.

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