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विज्ञान

जीवों की 200 नई प्रजातियों की खोज

जीवों और पेड़ पौधों की प्रजातियों के लुप्त होने के संकट के बीच विज्ञान जगत से एक अच्छी खबर आई है. वैज्ञानिकों ने पापुआ न्यूगिनी के जंगलों में जीव जंतुओं की 200 नई प्रजातियों को खोजने का दावा किया है.

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इनमें सफेद पूंछ वाले चूहे, मेंढक और कुछ अन्य बहुत ही छोटे जीव शामिल हैं. इन प्रजातियों को प्रशांत महासागरीय द्वीप पापुआ न्यूगिनी में पाया गया है.

इस इलाके के अति दुर्गम सुदूरवर्ती जंगलों में ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिकों की एक टीम ने ये खोज की है. इन्हें स्तनपायी, सरीसृप और जलचर वर्ग में रखा जा सकता है. इसके अलावा कुछ कीट पतंगे और पौधों की प्रजातियों की खोज भी इस प्रयास में शामिल है.

ऑस्ट्रेलिया के क्रेन्स स्थित कंजर्वेशन फांउडेशन की टीम के प्रमुख स्टीव रिचर्ड्स ने बताया कि लोगों ने अब तक बहुत लंबी उड़ान भरने वाली चिड़ियों और पेड़ों पर चढ़ सकने वाले कंगारुओं के बारे में सिर्फ लोक कहानियों में सुना होगा. लेकिन नई खोज में इस तरह के जीवों के वजूद का पता चला है.

स्टीव के मुताबिक पापुआ न्यूगिनी में कांगो और अमेजन के बाद दुनिया के तीन सबसे बड़े वर्षा आधारित जंगलों में से एक हैं. ये जंगल जैव विविधता के मामले में भी बेहद समृद्ध हैं और इन्हीं में जीवों के इस अबूझ संसार को खोजा गया है. इनमें बेहद सुंदर दिखने वाले महज 21 सेंटीमीटर लंबे चूहे जिसकी सफेद पूंछ भी होती है और नल की टोंटी जैसी नाक वाले मेंढक खास तौर से जिक्र करने लायक हैं. पीठ पर पीले धब्बों वाली मेंढक की एक नई प्रजाति भी खोजी गई है.

खोजी गई प्रजातियों में कम से कम 100 ऐसे जीव हैं जिन्हें मकड़ी और कीट पतंगों के दायरे में रखा जा सकता है.

स्टीव का कहना है कि कुछ प्रजातियां तो ऐसी मिलीं हैं जिनके लिए नए वर्गों का नाम गढ़ना पड़ेगा क्योंकि मौजूदा वर्गों में इन्हें रखा ही नहीं जा सकता. इस दिशा में भविष्य के प्रति नई उम्मीद जताते हुए स्टीव ने कहा कि पापुआ न्यूगिनी के जंगलों का एक बड़ा हिस्सा बेहद दुर्गम होने के कारण अभी भी जीव विज्ञानियों की पंहुच से दूर है. निश्चित तौर पर यह इलाका जैव विविधता की दृष्टि से काफी समृद्ध होगा. खोजे गए नए जीवों का जेनेटिक टेस्ट में इनके पहली बार जीव विज्ञान की नजर में आने की पुष्टि हो गई है.

रिपोर्टः एएफपी/निर्मल

संपादनः ए जमाल