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दुनिया

'जीवित' प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं

छात्रों को लैपटॉप बांटकर सुर्खियां बटोरने वाले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को अब जाकर बुजुर्गों की याद आई है. उनकी पेंशन के बीच आने वाले भ्रष्ट तंत्र पर अब लगाम लगाने की कोशिश की जा रही है.

झुर्रिदार चेहरा, आंखों पर ऐनक, कांपते होंठ और कमजोर पैर वाले बुजुर्ग पेंशन धारकों पर हर साल दिसंबर का महीना बहुत भारी गुजरता है. हर साल इस ठिठुरते सर्द महीने की 20 तारीख तक उन्हें अपने जिंदा होने का प्रमाण पत्र देना होता है. लेकिन 2014 से यूपी के करीब 15 लाख पेंशनभोगियों को जिंदा होने का सालाना दस्तावेज पेश करने के झंझट से निजात मिलने वाली है. अब बायोमीट्रिक सिस्टम में बस अंगूठा लगा देने पर भर से पेंशन मिल जाएगी.

85 साल की मेहर बेगम के पति की करीब 30 साल पहले मौत हो गई थी. वह शिक्षक थे. पेंशन ही सहारा था लेकिन वह इन तीन दशकों में कभी भी हर महीने पेंशन लेने नहीं गई. बताने लगीं कि जब इतने पैसे जमा हो जाते थे कि दलालों को रिश्वत देने में दिल न दुखे तभी जाते थे. घर का खर्च उधार से चलाते थे. जब से पेंशन बैंक में आने लगी है तब से साल में एक बार ही दलालों से निपटना होता है, पहले तो जब जाओ तब इनको चढ़ावा देना होता था. ट्रेजरी दफ्तर तो लूट के अड्डे थे. अब तो फिर भी ठीक हो गए हैं.

Information für die Pensionär Indien

पेंशनभोगियों के लिए सूचना

88 साल की सुनारी देवी, 65 साल के अहमद उल्लाह, 85 साल के राधा बल्लभ, 71 वर्षीय रफीका बानो और हाल ही में रिटायर हुए राम सकल जैसे हजारों लोग हर साल दिसंबर में कोषागारों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं. किसी के नाती पोते सहारा बन कर साथ चलते हैं तो कई अकेले इस झंझट से निपटते हैं.

बीती सदी में जीता उत्तर प्रदेश

हालांकि सरकार ने व्यवस्था कर रखी है कि पेंशनभोगियों से उनके घर जाकर जीवित प्रमाण पत्र लाया जाए पर ऐसा होता नहीं. लखनऊ कचहरी स्थित कोषागार के मुख्य कोषाधिकारी अवध नारायण बताते हैं कि दर्जनों पेंशनर्स को हमने जीवित प्रमाण पत्र का फार्म दिया है कि भर लाएं. कुछ के घर जाकर भरवाया भी है लेकिन दरअसल इनमें से ज्यादातर खाली बैठे लोग हैं, जो अक्सर ट्रेजरी में घूमने भी चले आते हैं.

पहले कोषागार में ही हर साल के दिसंबर की 20 तारीख तक जीवित होने का प्रमाण पत्र इन्हें देना होता था लेकिन जब से बैंक में इस प्रमाण पत्र को जमा करने का फरमान जारी हुआ तब से इन बुजुर्गों पर होने वाले सितम में और इजाफा हो गया. क्योंकि बैंक वालों ने कहा यह काम कोषागार का है. इस चक्कर में कई पेंशनभोगियों ने पांच हजार से लेकर 10 हजार रुपये खर्च कर अपने जिंदा होने का प्रमाण दिया. फातिमा, मेहर बेगम और राधा बल्लभ का आरोप है कि कोषागारों में पूरी तरह से दलाल राज है. ट्रेजरी के कर्मचारियों तक कोई पहुंच ही नहीं सकता, इसीलिए बाहर जो दलाल मिलता है उसी पर निर्भर होना मजबूरी है.

Indien Laptop Kampagne der Regierung von Uttar Pradesh

छात्राओं को लैपटॉप बांटते अखिलेश यादव

देर से जागी लैपटॉप बांटने वाली सरकार

लेकिन अब यूपी सरकार को इन बुजुर्गों की सुध आती दिख रही है. अगले साल से इनका बायोमीट्रिक सत्यापन किया जाएगा. वित्त सचिव अजय अग्रवाल के मुताबिक बायोमीट्रिक सिस्टम के तहत इनके अंगूठे का प्रिंट लिया जाएगा और पेंशनर का पूरा विवरण इस प्रिंट के साथ फीड कर दिया जाएगा साथ ही हर पंशेनर को एक पेमेंट नंबर भी दिया जाएगा. इसके अलावा पेंशनर्स को ऑन लाइन फार्म भरने की सुविधा भी दी जाएगी.

यह काम जनवरी 2014 तक पूरा करने की पूरी तैयारी की गई है. उन्होंने बताया कि इस सिस्टम के लागू होने से पेंशनर्स को हर साल जीवित होने के प्रमाण पत्र देने की जगह हर साल ट्रेजरी कार्यालय में सिर्फ पेंशन पेमेंट आर्डर नंबर बताना होगा. इसके बाद उनके अंगूठे के निशान का सर्वर में दर्ज निशान से मिलान होगा. अंगूठे का निशान मिला तो पेंशनर का पूरा डेटा सर्वर पर चला जाएगा और पेंशन बैंक खाते में पहुंचनी शुरू हो जाएगी. साथ ही वर्ष 2014 से रिटायर होने वाले सभी पेंशनभोगियों को उनके अंगूठे के प्रिंट से पेंशन दिलाया जाना भी सुनिश्चित किया जा रहा है. रिटायरमेंट के दिन कर्मचारी के अंगूठे का इम्प्रेशन सुरक्षित तरीके से स्कैन करने के आदेश जारी कर दिए गए है.

रिपोर्ट: एस. वहीद, लखनऊ

संपादन: ओंकार सिंह जनौटी

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