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दुनिया

जीत के जश्न में ड्रोन हमलों का खौफ

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के दोबारा जीतने की खुशी में बज रहे ढोल से पाकिस्तान के वजीरिस्तान में लोगों के कान के पर्दे फट रहे हैं. उन्हें इस आवाज में ड्रोन हमलों के धमाके और चीखें सुनाई दे रही हैं.

जश्न के शोर से मोहम्मद रहमान खान के सिर में दर्द होने लगा है और उन्हें लग रहा है कि दुख और गुस्से का सिलसिला फिलहाल नहीं थमेगा. 28 साल के पाकिस्तानी नागरिक रहमान अमेरिकी राष्ट्रपति पर अपने पिता, तीन भाई और एक भतीजे को छीनने का आरोप लगाते हैं. बराक ओबामा के पहले कार्यकाल में हुए ड्रोन हमले ने इन सबकी जान ले ली. पाकिस्तान अफगान सीमा पर दक्षिणी वजीरिस्तान में अपने गांव पर हमले के बाद रहमान वहां से भाग कर इस्लामाबाद आ गए. समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत में रहमान ने कहा, "जिस आदमी ने मेरे घर पर हमला किया वह दोबारा चुन लिया गया है. कल से ही मेरे दिमाग में तनाव बढ़ गया है. मेरी तकलीफें फिर से बढ़ गई हैं."

Flash-Galerie Proteste gegen US Drohnenangriffe

दूसरे कार्यकाल के लिए चुनाव अभियान के दौरान ओबामा ने ड्रोन हमलों को रोकने के कोई संकेत नहीं दिए. यह हमले ओबामा के पहले कार्यकाल में अल कायदा और तालिबान के आतंकवादियों को पाकिस्तान और अफगानिस्तान में मारने के लिए शुरू किया था. इन आतंकवादियों को मारने में अमेरिकी सैनिकों की जान न जाए, इसलिए ड्रोन मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया.

ड्रोन हमला पाकिस्तान में बेहद कुख्यात है. पाकिस्तान के बहुत से लोग इसे देश की संप्रभुता का उल्लंघन और बेकसूर लोगों के मौत की वजह मानते हैं. ड्रोन हमलों में अपने 23 साल का बेटा खो चुके हाजी अब्दुल जबार कहते हैं, "जब भी मौका मिलता है ओबामा सांप की तरह मुस्लिमों को डस लेते हैं. देखिए कितने लोगों को उन्होंने ड्रोन हमले में मार डाला."

जानकार मानते हैं कि मानवरहित यान से हमले के कारण पैदा हुआ गुस्सा तालिबान को नए लोगों की भर्ती में मददगार साबित हो सकता है. इसकी वजह से सीमावर्ती इलाकों में स्थिरता लाने की कोशिशों पर भी बुरा असर पड़ रहा है. अफगानिस्तान से अमेरिकी सेनाओं को 2014 तक वापस लौटाने की ओबामा की योजना भी इस की वजह से खटाई में पड़ सकती है.

पहले कार्यकाल में ओबामा ने पाकिस्तान में करीब 300 ड्रोन हमलों की मंजूरी दी थी. इन हमलों की संख्या उनके पहले राष्ट्रपति रहे जॉर्ज बुश के कार्यकाल से छह गुणा ज्यादा है. 2004 से अब तक अमेरिका ने कुल 337 ड्रोन हमले किए हैं जिनमें 1908 से 3,225 लोगों की जान गई है. यह आंकड़े न्यू अमेरिका फाउंडेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट के हैं. इस संस्था के मुताबिक हमलों में मारे गए लोगों में 15 फीसदी बेकसूर थे. हालांकि इस साल बेकसूर लोगों की मौत का आंकड़ा तेजी से नीचे गया है और घट कर 1-2 फीसदी पर आ गया है. अमेरिका का कहना है कि ड्रोन हमले बेहद सटीक हैं और इनमें आम नागरिकों की मौत का खतरा सबसे कम है.

उधर पाकिस्तान सरकार का कहना है कि तालिबान के साथ जंग में दस हजार से ज्यादा पाकिस्तानी लोगों की मौत हुई है. इनमें ज्यादातर लोग आत्मघाती हमलो में मारे गए हैं. इनके अलावा पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई में भी बहुत से लोगों की जान गई है. ड्रोन हमलों में कितने लोगों की जान गई इसके बारे में ठीक ठीक आंकड़ा जुटा पाना कठिन है. सरकार बहुत कम विदेशी लोगों को इस इलाके में जाने देती है और हमले की जगह को अकसर तालिबान सील कर देता है. हवाई हमलो ने अल कायदा को कमजोर किया लेकिन उसका सहयोगी पाकिस्तानी तालिबान अभी भी काफी मजबूत बना हुआ है. हालांकि पाकिस्तानी सेना ने तालिबान के कई मजबूत ठिकानों पर हमले किए हैं.

ओबामा की जीत के बाद पाकिस्तानी तालिबान के प्रवक्ता अहसानुल्लाह एहसान ने कहा है, "हमें हैरानी है कि ओबामा को दोबारा चुन लिया गया लेकिन हमारे लिए ओबामा और रोमनी में कोई फर्क नहीं. दोनों दुश्मन हैं. अफगानिस्तान से अमेरिकियों को बाहर निकालने के लिए हम अपना जिहाद और जंग अपने अफगान भाइयों के साथ जारी रखेंगे.

गुरुवार को एक आत्मघाती हमलावर ने पाकिस्तान के कराची में एक सैनिक अड्डे पर हमला किया जिसमें कम से कम एक सैनिक की मौत हो गई जबकि दर्जन भर से ज्यादा लोग घायल हुए हैं.

एनआर/एमजी (रॉयटर्स)

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