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दुनिया

जीका के खतरे पर भी चर्च ने रोका गर्भपात

संयुक्त राष्ट्र की अपील को ठुकराते हुए ब्राजील के कैथोलिक चर्च ने जीका के खतरों के मामलों में भी गर्भपात कराने का विरोध किया है. इन इलाकों में नवजात में माइक्रोसेफली के दोष का खतरा है जिसमें बच्चे का सिर छोटा होता है.

लैटिन अमेरिका के सबसे बड़े देश ब्राजील में बलात्कार तक के मामलों में गर्भपात कराना मना है. भ्रूण का मस्तिष्क ना विकसित हो रहा हो या मां की जान को खतरा हो, तब भी गर्भपात कराने पर पाबंदी है. संयुक्त राष्ट्र मानव अधिकार कार्यालय ने उन देशों से अपील की है जहां जीका वायरस का खतरा है, कि वे गर्भवती महिलाओं को गर्भपात कराने की छूट दें. जीका वायरस का संबंध माक्रोसेफली दोष से जुड़ा है.

ब्राजीलियाई बिशप कॉन्फ्रेंस के महासचिव बिशप लेओनार्डो उलरिष श्टाइनर ने इस दलील को ठुकरा दिया है. एस्तादो दे साओ पाउलो अखबार के मुताबिक उन्होंने कहा, "माइक्रोसेफली ब्राजील में सालों से हो रहा है. वे इस मौके का फायदा उठाकर गर्भपात के विषय को दोबारा शामिल करना चाह रहे हैं." उनके मुताबिक, "गर्भपात सृजनन की ओर ले जाता है, पर्फेक्ट लोगों को चुनने की प्रक्रिया."

ब्राजील में अक्टूबर से अब तक माइक्रोसेफली दोष से पीड़ित 404 मामले सामने आ चुके हैं. ऐसे मामलों में पैदा होने वाले बच्चे का सिर और मस्तिष्क बेहद छोटा होता है. अन्य 3670 मामलों की अभी पुष्टि नहीं हुई है. वैज्ञानिकों का कहना है कि मच्छर जीका वायरस के वाहक है. यह गर्भवती महिलाओं को संक्रमित कर बच्चों में ये लक्षण पैदा कर रहा है.

ब्राजील में सामाजिक कार्यक्रताओं के समूह सुप्रीम कोर्ट से सिफारश कर रहे हैं कि वह देश के गर्भपात संबंधी कानून में बदलाव करे. हालांकि ब्राजील के आर्चबिशप सर्गियो द रोका ने कहा, "समाज को जीवन को अहमियत देनी चाहिए, वह किसी भी रूप में हो. जीवन का स्तर कम होने का मतलब जीने के अधिकार का कम होना नहीं है." ब्राजील में हर साल लगभग 10 लाख गर्भपात गैर कानूनी तौर पर किए जाते हैं.

एसएफ/आईबी (एएफपी)

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