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विज्ञान

जीएम फसल पर यूरोप का फैसला

यूरोपीय संघ के सदस्य देश भविष्य में जीएम फसल उगाने के बारे में खुद फैसला कर पाएंगे. इस निर्णय के साथ वर्षों से चल रही बहस का अंत हो गया है. जीएम उत्पादों पर पूरा प्रतिबंध नहीं लगेगा.

अमफ्लोरा आलू और जीन संवर्धित मक्का मॉन810 पर यूरोपीय संघ के सांसद 13 साल तक बहस करते रहे. अब तक ये दोनों ही जीएम फसलों की ऐसी किस्में थीं जिन्हें यूरोपीय संघ में उगाने और मवेशी के चारे में इस्तेमाल करने की अनुमति थी. अमफ्लोरा का इस्तेमाल उद्योग जगत के लिए स्टार्च देता जबकि जीन मक्के का इस्तेमाल चारे के अलावा एग्रो पेट्रोल और टेक्सटाइल बनाने के लिए होता. दोनों ही किस्में कीड़ों के बचने लायक है लेकिन कुछ खास तरह की तितलियों और कीड़ों के लिए नुकसानदेह है. यूरोप में कुल मिलाकर जीन संवर्धित 60 पौधों को स्वीकृति है लेकिन उन्हें यूरोप में उपजाया नहीं जाता बल्कि उनका आयात होता है.

जीन तकनीक की लॉबी नहीं

यूरोप में जीन संवर्धित फसलों का इतना विरोध है कि रसायन कंपनी बीएएसएफ ने अमफ्लोरा की मार्केटिंग अमेरिका से ही करने का फैसला लिया. अमेरिकी कंपनी मोंसैंटो भी यूरोपीय बाजार से काफी पहले ही हट गया है. अब यूरोपीय संसद के 480 सांसदों ने जीएम फसल के बारे में फैसले का अधिकार एकल सदस्य देशों को देने का निर्णय किया है. 159 सांसदों ने इस प्रस्ताव के खिलाफ मत दिया जिनमें ग्रीन पार्टी के सांसद भी थे. 58 सदस्यों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया.

ग्रीन सांसद जीएम फसलों पर पूरी रोक चाहते थे. अब तक यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के लिए अपने इलाके में उस जीएम फसल की पैदावार को रोकना कानूनी तौर पर कठिन था जिसे यूरोपीय स्तर पर लाइसेंस मिला हुआ था. अब हर देश राजनीतिक या पर्यावरण का हवाला देकर अपने खेतों में फसल को रोक सकता है. नया नियम यूरोपीय गजेट में प्रकाशन के 20 दिन बाद अप्रैल 2015 के अंत तक लागू हो जाएगा.

पर्यावरण संगठनों की आलोचना

पर्यावरण संगठन ग्रीनपीस ने इस बात की आलोचना की है कि नया नियम जीएम बीज के निर्माताओं को एकल देशों की सरकारों के साथ समझौता करने की संभावना देता है. नए नियम के साथ पूरे यूरोपीय संघ में एक तरह का कानून नहीं रहेगा. ग्रीनपीस का कहना है कि स्थानीय पौधों पर असर को रोकने का भी कोई प्रावधान नहीं है. यूरोपीय संसद में ग्रीन पार्टी के कृषि प्रवक्ता मार्टिन हॉयसलिंग को संदह है कि कुछ देशों में जीएम फसल उगाई जाएगी तो कुछ देश इस पर रोक लगाए रखेंगे. नीदरलैंड और चेक रिपब्लिक इसके खिलाफ नहीं हैं. ये भी डर है कि ट्रांसपोर्ट की वजह से जीएम संवर्धित पौधों का फैलाव हो सकता है.

जर्मन पर्यावरण संरक्षण दफ्तर के एक सर्वे के अनुसार 84 फीसदी जर्मन जीएम अनाज नहीं खाना चाहते हैं. जर्मनी में जीएम पौधों की पैदावार सिर्फ रिसर्च के मकसद से की जाती है. जर्मन पर्यावरण मंत्री बारबरा हेंडरिक्स ने खेती में जीएम फसल को रोकने की नीति पर चलने का वादा किया है. लेकिन यूरोपीय आयोग के सामने जीएम फसल की पैदावार करने के लिए कई निवेदन विचाराधीन हैं. ग्रीसपीस का कहना है कि अमेरिका से आने वाले ऐसे कई खाद्य पदार्थ यूरोप में भी उपलब्ध हैं, क्योंकि जानवरों के चारे में जीएम अनाज का इस्तेमाल हुआ है. सब्जी, फल या मीट जैसे विशुद्ध जीएम उत्पादों पर रोक है. उत्पादकों के लिए खाद्य पदार्थों में उस्तेमाल किए गए जीएम तत्वों के बारे में पैकेट पर सूचना देना अनिवार्य है. इसमें दूध, अंडा और मीट शामिल नहीं है जो जीएम बैक्टीरिया की मदद से पैदा किए जाते हैं.

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