जिहादी वीडियो में फ्रांस के नागरिक | दुनिया | DW | 23.11.2014
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दुनिया

जिहादी वीडियो में फ्रांस के नागरिक

इस्लामिक स्टेट से जुड़ रहे यूरोपीय युवा सरकारों की परेशानी का सबब बने हुए हैं. ऐसे में फ्रांस ने आईएस द्वारा जारी किए एक वीडियो में दो नागरिकों की पहचान की है.

इस्लामिक स्टेट इस बीच पांच विदेशियों की अपहरण कर जान ले चुका है. ह्यूमन राइट्स वॉच के अनुसार पिछले पांच महीने में वह सीरिया में करीब डेढ़ हजार लोगों को मौत के घाट उतार चुका है. अपनी दहशत का प्रचार करने के लिए इस संगठन ने अल कायदा की तर्ज पर इंटरनेट में वीडियो के प्रचार का रास्ता चुना हुआ है.

हाल ही में जारी एक वीडियो में कई दहशतगर्दियों को बिना नकाब के देखा गया. इनमें से अधिकतर पश्चिमी देशों के हैं और दो की फ्रांस के निवासियों के रूप में पहचान हो चुकी है. दोनों ही व्यक्ति 22 साल के हैं. एक का नाम मैक्सिम हॉशार्ड और दूसरे का मिकाएल डॉस सांतोस बताया जा रहा है. फ्रांस के अधिकारियों के अनुसार मैक्सिम हॉशार्ड उत्तरी फ्रांस के नौरमैंडी का रहने वाला है, जबकि डॉस सांतोस पूर्वी पैरिस से नाता रखता है.

डॉस सांतोस फ्रांस में जन्मा पुर्तगाली मूल का व्यक्ति है, जो रिकॉर्ड के अनुसार पिछले साल सीरिया के लिए रवाना हुआ. फ्रांस की खुफिया एजेंसी का ध्यान उसकी ओर तब गया, जब अक्टूबर में उसने इंटरनेट पर एक वीडियो डाला. इसमें उसने 'फ्रांस में रह रहे सभी भाइयों' से अपील की थी कि पैरिस द्वारा इराक में आईएस पर हवाई हमले की हर कोशिश का बदला 'किसी भी आम नागरिक को मार कर' लिया जाए. वहीं दूसरे व्यक्ति मैक्सिम के बारे में बताया गया है कि वह एक मध्यम वर्गीय नास्तिक परिवार से आता है. सीरिया जाने से पहले उसने इस्लाम को अपनाया और जिहाद के नाम पर जंग में शामिल हो गया.

फ्रांस द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार करीब एक हजार फ्रांसीसी नागरिक अब तक सीरिया और इराक में चल रहे संघर्ष में हिस्सा ले चुके हैं. फ्रांस के अलावा ब्रिटेन, जर्मनी, डेनमार्क, बेल्जियम और ऑस्ट्रेलिया के नागरिकों की भी पहचान की जा चुकी है. हाल ही में अपने ऑस्ट्रेलिया दौरे पर फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांसोआ ओलांद ने कहा कि विदेशियों का जिहाद के नाम पर इस्लामिक स्टेट जैसे आतंकी संगठनों से जा मिलना चिंता का विषय है. उन्होंने कहा, "वे किसी भी पृष्ठभूमि, समाज के किसी भी तबके के हों, उनका आसानी से ब्रेनवॉश किया जा सकता है. इस मुद्दे को गंभीरता से लेना होगा, हमें सख्ती से पेश आना होगा."

इसी महीने फ्रांस ने निर्देश जारी किए हैं कि शक की स्थिति में किसी भी व्यक्ति पर देश से बाहर यात्रा करने पर रोक लगाई जा सकती है. राष्ट्रपति ओलांद ने कहा है कि यह एक अहम कदम है.

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