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दुनिया

"जिहादी जॉन" निकला लंदन का बाशिंदा

"जिहादी जॉन" के नाम से दहशत का पर्याय बन गए आईएस लड़ाके की पहचान लंदन के एक निवासी के रूप में हुई है. आईएस के तमाम वीडियो में बंधकों को प्रताड़ित करते हुए दिखने वाले इस आतंकी का नाम मोहम्मद एमवाजी बताया जा रहा है.

इस्लामिक स्टेट के जारी किए कई वीडियो में इसे देखा गया है. ये नकाबपोश आतंकी कई विदेशी बंधकों को तरह तरह से कष्ट पहुंचाता दिखा है. एमवाजी का नाम सबसे पहले वॉशिंगटन पोस्ट ने उजागर किया. अमेरिकी सरकार के उनके दो सूत्रों के हवाले से पोस्ट ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बाटचीत में इस पुष्टि की है कि जांचकर्ताओं को एमवाजी के ही जिहादी जॉन होने का यकीन है.

वॉशिंगटन पोस्ट ने एमवाजी के एक पूर्व मित्र से बातचीत की जिसमें उसने कहा कि उसे "कोई शक नहीं कि मोहम्मद ही जिहादी जॉन है." इस व्यक्ति का नाम गुप्त रखते हुए पोस्ट में उसका बयान है, "वह (एमवाजी) मेरे लिए भाई जैसा था.. मुझे विश्वास है कि ये वही है."

जॉन की पहचान लंदन के एक प्रतिष्ठित परिवार से आने वाले एक ब्रिटिश कंप्यूटर प्रोग्रामिंग ग्रैजुएट के रूप में हुई है. लंदन स्थित सामाजिक संस्था केज ने बताया है कि एमवाजी ने सबसे पहले उनसे 2009 में संपर्क किया था. उस समय सुरक्षा एजेंसियों ने उस पर आरोप लगाया था कि वह तंजानिया से होते हुए सोमालिया जाने की योजना बना रहा था जहां वह अल कायदा से जुड़े हुए संगठन अल शबाब से जुड़ने वाला था. इसके बाद ही एमवाजी को उसके दो तंजानियाई साथियों के साथ देश से निर्वासित कर दिया गया. इस आरोप पर एमवाजी का कहना था कि वह सफारी के लिए जा रहा था. इसके बाद एमवाजी ने शिकायत दर्ज कराई कि ब्रिटिश सुरक्षा एजेंटों के दखल के कारण उसके जन्मस्थान कुवैत ने भी उसे वीजा देने से मना कर दिया. एमवाजी का आरोप था कि ब्रिटिश एजेंसी ने कुवैत में उसकी मंगेतर से संपर्क कर उस पर लगे आरोपों के बारे में सब बता दिया था, जिससे शादी टूट गई. इसके अलावा केज को उसने यह भी कहा कि एमआई5 ने उसे धमकी दी और अपने साथ काम करने के लिए मजबूर करने की कोशिश भी की.

केज के रिसर्च डायरेक्टर आसिम कुरैशी बताते हैं कि एमवाजी काफी "नरमदिल, सज्जन और मृदुभाषी" इंसान लगा. एमवाजी इस रिसर्च ग्रुप के साथ करीब ढाई साल तक संपर्क में रहा, जो मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए या प्रताड़ित किए जा रहे लोगों की मदद करती है. बाद में एमवाजी के परिवार से केज को पता चला कि उनका मानना है कि वह सीरिया में है लेकिन उन्हें उसके बारे में और कुछ नहीं पता.

कुरैशी को भी वॉशिंगटन पोस्ट के पत्रकार ने जिहादी जॉन के वीडियो दिखाए. इस पर कुरैशी को लगा कि एमवाजी और जिहादी जॉन में "काफी समानता" है. मगर, उन्होंने यह भी कहा कि वह यह बात 100 फीसदी दावे के साथ नहीं कह सकते. सरकार और पुलिस ने भी इस की पुष्टि करने से मना किया है. मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने कहा, "हम इस स्टेज में किसी की भी पहचान की पुष्टि नहीं करने वाले हैं और ना ही इस समय जारी आतंकरोधी जांच के बारे में कोई और सूचना देंगे."

जिहादी जॉन वही आतंकी है जिसे अगस्त 2014 में आईएस द्वारा बंधक बनाए गए अमेरिकी पत्रकार जेम्स फोली का सिर कलम करते हुए वीडियो में देखा गया था. इसके पहले उसने ब्रिटिश लहजे में अंग्रेजी बोलते हुए अमेरिका और पश्चिमी देशों पर कई आरोप लगाए.

आरआर/ओएसजे (आरआर, एपी)

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