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दुनिया

जियाबाओ के दौरे से पहले सीमा विवाद पर अहम बातचीत

भारत और चीन के विशेष प्रतिनिधि चीनी प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ के भारत दौरे से पहले सीमा विवाद पर सोमवार को अहम बातचीत करेंगे. भारत की तरफ से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिव शंकर मेनन बातचीत के लिए बीजिंग जा रहे हैं.

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विवाद सुलझाने पर सहमति

चीन की तरफ से राष्ट्रीय सलाहकार दाइ बिंगुओ 29 और 30 नवंबर को होने वाली इस बातचीत में हिस्सा लेंगे. इससे पहले मेनन और बिंगुओ की बातचीत 2009 के नवंबर में हुई थी जो विवाद खत्म होने की दिशा में बिना किसी खास प्रगति के ही खत्म हो गई.

भारत और चीन के बीच करीब 4,000 किलोमीटर लंबी सीमा है. इसमें चीन का दावा है कि अक्साई चीन, अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख क्षेत्र उसके हिस्से के हैं. सीमा विवाद सुलझाने के लिए दोनों देशों ने 1980 में ही बातचीत शुरू कर दी थी लेकिन इसमें आगे बढ़ने की उम्मीद तब जगी दोनों देश इसके लिए खास प्रतिनिधि नियुक्त कर उनके जरिए बातचीत पर राजी हुए.

भारत और चीन ने 1993 और 1996 में सरहदी इलाकों में शांति और स्थायित्व बनाए रखने के लिए करारों पर भी दस्तखत किए. इसके साथ ही 2005 में दोनों देशों के बीच सीमा तय करने के लिए राजनीतिक सिद्धांतों पर भी सहमति बनी. पिछले महीने आसियान देशों की बैठक के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह

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अरुणाचल पर दावा करता है चीन

और चीनी प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ की बातचीत में सीमा विवाद खत्म करने पर चर्चा हुई. दोनों नेताओं ने कहा कि वे सभी मुद्दो जल्दे से जल्द निबटाना चाहते हैं और अपने अपने प्रतिनिधियों से कहा कि वे काम जितनी जल्दी हो सके पूरा करें.

चीनी प्रधानमंत्री अगले महीने भारत आ रहे हैं इसलिए दोनों देशों के बीच ये बातचीत और भी अहम हो गई है. बातचीत ऐसे माहौल में हो रही है जब दोनों मुल्कों के बीच जम्मू कश्मीर के लोगों को नत्थी वीजा पर संबंधों में दरार आ गई है. इसके साथ ही पाकिस्तानी कश्मीर में विकास के काम और पाकिस्तान में नए परमाणु रिएक्टर बनाने के काम में चीन की मदद से भी दरार चौड़ी हो रही है.

हालांकि इन विवादों के बीच भी दोनों देश संबंधों मे नई शुरूआत की बात कर रहे हैं और यह भी मानते हैं कि विकास के लिए एक दूसरे का रास्ता काटा जाए, यह जरूरी नहीं है. दोनों देशों ने माना है कि दुनिया बहुत बड़ी है जिसमें साथ चलकर भी विकास किया जा सकता है.

रिपोर्टः एजेंसियां/एन रंजन

संपादनः ए कुमार

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