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जर्मन चुनाव

जिम्बाब्वे को शिकस्त, श्रीलंका बना चैंपियन

सीरीज़ जीतने का जिम्बाब्वे का सपना चकनाचूर श्रीलंकाई शेरों ने दी कड़ी शिकस्त. मैन ऑफ द मैच दिलशान ने लगाया शतक 35वें ओवर में ही 9 विकेट से जीता श्रीलंका. जिम्बाब्वे के बीआरएम टेलर मैन ऑफ द सीरीज़ चुने गए.

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दिलशान मैन ऑफ द मैच

एक दिन पहले श्रीलंकाई टीम को शिकस्त देने वाली मेजबान टीम को फाइनल में मेहमान शेरों ने बुरी तरह हराया. पहले तो फर्नेंडो और मेंडिस की घातक गेंदबाजी ने जिम्बाब्वे के बल्लेबाजों की कमर तोड़ी दी. हालत ये थी कि पहले बल्लेबाज़ी करने उतरी जिम्बाब्वे की टीम 200 रन का आंकड़ा भी नहीं पार कर सकी. इसके बाद थारंगा और तिलकरत्ने ने जिम्बाब्वे के गेंदबाज़ों की जमकर धुनाई की और 35वें ओवर में ही जीत के लिए जरूरी 200 रन बना लिए.

हरारे के मैदान पर फाइनल श्रीलंका ने टॉस जीता. ट्राई सीरीज़ में अब तक बाद में बल्लेबाजी करने वाली टीम ही जीती है, इसलिए तिलकरत्ने दिलशान ने भी गेंदबाजी चुनी. टॉस जीतते ही उन्होंने कहा, ''यह एक बड़ा मनोवैज्ञानिक फायदा है. टीम में तीन बदलाव किए गए हैं.'' वहीं जिम्बाब्वे ने आखिरी मैच में श्रीलंका को हराने वाली टीम ही उतारी.

मेजबान टीम को पहला झटका पांचवें ओवर में लगा. कुलशेखरा लगातार हैमिल्टन मसाकद्जा को एक गेंद इन स्विंग तो दूसरी आउट स्विंग फेंककर परेशान कर रहे थे. आखिरकार चार रन बनाने वाले मसाकद्जा अपना विकेट गंवा बैठे.

दसवें ओवर में दूसरा विकेट गिरा. 19 रन पर खेल रहे टेलर समरवीरा की गुगली में फंस गए. सलामी बल्लेबाजों को खोते ही जिम्बाब्वे के स्कोर बोर्ड पर ब्रेक सा लग गया. तीन ओवर मेडेन गए. 15 ओवर तक टीम सिर्फ 40 रन बना सकी. दो ओवर बाद इरविन और टाइबू के रन चुराने के चक्कर में असमंजस में पड़ गए. इसकी गलती की कीमत इरविन ने पैवेलियन लौटकर चुकाई.

कुछ हद तक संघर्ष विकेटकीपर बल्लेबाज टाइबू ने किया. उन्होंने 71 रन बनाए. उनका साथ कुछ हद तक 37 रन बनाने वाले लैम्ब ने दिया. दोनों के आउट होते ही विकेटों का पतझड़ फिर से लगा. भारत को दो और श्रीलंका को एक बार हराने वाली जिम्बाब्वे की टीम 49 ओवर में 199 पर ऑल आउट हो गई.

रिपोर्ट: एन रंजन

संपादन आभा मोंढे

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