जिम्बाब्वे की खिताबी जीत में श्रीलंका है रोड़ा | ताना बाना | DW | 09.06.2010
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ताना बाना

जिम्बाब्वे की खिताबी जीत में श्रीलंका है रोड़ा

ट्रायएंगुलर सीरीज के फाइनल में जिम्बाब्वे का मुकाबला श्रीलंका से होने जा रहा है. टूर्नामेंट से पहले बेहद कमजोर मानी जा रही जिम्बाब्वे ने अपने हौसले से भारतीय टीम की छुट्टी कर दी तो श्रीलंका को भी कड़ी चुनौती दी है.

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त्रिकोणीय श्रृंखला के फाइनल में भी जिम्बाब्वे परीकथा सा अपना सफर जारी रखने की उम्मीद बनाए हुए है लेकिन उसके सामने श्रीलंका की चुनौती है और जिससे पार पाना आसान नहीं है. फाइनल मैच हरारे में होना है और जिम्बाब्वे की युवा टीम को हरा कर श्रीलंका पिछले मैच में हार का बदला भी चुकाने को कसमसा रही है.

Cricketspieler Tilakaratne Dilshan

भारत और श्रीलंका ने इस टूर्नामेंट के लिए अपने स्टार खिलाड़ियों को आराम देते हुए रिजर्व टीम भेजी पर फिर भी जिम्बाब्वे ने जिस तरह से मजबूत खेल का प्रदर्शन किया है उसकी आशा कम ही की जा रही थी. जिम्बाब्वे ने 13 अंक हासिल किए, भारत को दो बार और श्रीलंका को एक बार हराया और लीग में टॉप पर जगह बनाई.

भारत को शिकस्त देने में जिम्बाब्वे ने कोई कोताही नहीं बरती और अच्छे से टीम इंडिया की आशाओं को ध्वस्त किया. भारतीय टीम के खिलाफ मिली सफलता को कोई तुक्का न मान ले इसलिए जिम्बाब्वे ने श्रीलंका को भी हरा दिया और सभी की शंकाओं का निवारण कर दिया. यानी चार लीग मैचों में तीन में प्रभावशाली जीत.

जिम्बाब्वे के शानदार प्रदर्शन की एक वजह ब्रैंडन टेलर की सनसनी फैला देने वाली बल्लेबाजी भी है जिन्होंने चार मैचों में तीन बार मैन ऑफ द मैच अवॉर्ड अपनी झोली में डाले हैं. टेलर के रूप में जिम्बाब्वे को एक ऐसा बल्लेबाज मिल गया है जिसमें कौशल के साथ साथ असीम धैर्य भी है.

और फिर हैमिल्टन मसकादजा, चामू चिभाभा, टेटेन्डा टाइबू और चार्ल्स कोवेन्ट्री भी अपनी बल्लेबाजी को चमकाने से नहीं चूकते. बुधवार को होने वाले फाइनल में अपना दबदबा बनाए रखने का मौका वे हाथ से नहीं जाने देंगे.

बल्लेबाजी के अलावा जिम्बाब्वे की गेंदबाजी भी बढ़िया रही है खासतौर पर स्पिन गेंदबाजों ने प्रभावित किया है. रे प्राइस, प्रोस्पर उत्सेया और ग्राएम क्रेमर ने सटीक गेंदें डालने के साथ आक्रामकता भी दिखाई और उनके हौसले भरे प्रदर्शन को धमाकेदार फील्डिंग का भी सहारा मिला जिससे वे और प्रभावी साबित हुए.

सोमवार को हुए मैच में श्रीलंका जिम्बाब्वे पर भारी पड़ता दिख रहा था. तिलकरत्ने दिलशान और उपुल तरंगा ने लगभग 20 ओवर में 122 रन जोड़ दिए थे लेकिन उत्सेया ने दो विकेट चटकाकर श्रीलंका की लय को तोड़ा जिससे पूरी टीम 48 ओवर में 236 रन पर ही ढेर हो गई. बुधवार को फाइनल में श्रीलंका किसी भी हाल में बल्लेबाजों की इस गलती को दोहराना नहीं चाहेगा.

कप्तान दिलशान को आशा है कि अहम मैच में दिनेश चंडीमाल अपने जौहर दिखाएंगे जिन्होंने भारत के खिलाफ शतक लगाया है. टीम को अच्छे लक्ष्य तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दिलशान के कंधों पर भी है और उन्हें एंजेलो मैथ्यूज का साथ जरूर चाहिए होगा. बॉलिंग विभाग में नजरें थिलन तुषारा और दिलहारा फर्नान्डो पर टिकी हैं और उनका पहला लक्ष्य ब्रैंडन टेलर को जल्द से जल्द पैवेलियन में बैठे देखना होगा.

रिपोर्ट: एजेंसियां/एस गौड़

संपादन: महेश झा