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जर्मन चुनाव

जिप्सियों के निष्कासन पर ईयू ने फ्रांस को लताड़ा

यूरोपीय संघ ने रोमा जिप्सियों के मामले में फ्रांस पर दबाव बढ़ा दिया है. रोमा शिविरों को भंग करने और उन्हें निष्कासित करने की कार्रवाई के कारण संघ ने फ्रांस पर यूरोपीय मूल्यों औ कानूनों के हनन का आरोप लगाया है.

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जिप्सियों के निष्कासन पर प्रदर्शन

यूरोपीय संघ की कानून कमिश्नर विवियाने रेडिंग ने मंगलवार को ब्रसेल्स में कहा कि फ्रांस के खिलाफ समझौता विरोधी कार्रवाई को वे अपरिहार्य मानती हैं. उन्होंने कहा कि वे फ्रांस सरकार के व्यवहार पर सकते में हैं. यूरोपीय आयोग आने वाले दिनों में फ्रांस के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने पर फैसला लेगा.

रेडिंग ने फ्रांस सरकार को एक पत्र लिखकर मामले के बारे में जानकारी मांगी है. कानून कमिश्नर की प्रवक्ता ने कहा, "हमारा काम यूरोपीय कानून के पालन की निगरानी है." इसलिए फ्रांसीसी अधिकारियों से पूछा गया है कि वे संघ के अंदर नागरिकों के स्वतंत्र आवागमन के निर्देशों का किस तरह पालन कर रहे हैं.

गुरुवार को ब्रसेल्स में यूरोपीय संघ के राज्य और सरकार प्रमुखों की शिखर भेंट हो रही है. रोमा जिप्सियों के निष्कासन का मसला वहां उठ सकता है. अब तक इस मुद्दे को शिखर सम्मेलन की कार्य सूची में शामिल नहीं किया गया है.

यूरोपीय संघ की कड़ी आलोचना की वजह फ्रांस के गृह मंत्री ब्रीस ऑरटेफौए के ब्यूरो प्रमुख का वह आदेश है जिसमें देश के प्रीफेक्टों से अवैध शिविरों को, और सबसे पहले रोमा शिविरों को व्यवस्थित तरीके से नष्ट करने को कहा गया है. मानवाधिकार संगठनों और विपक्ष ने भी राष्ट्रपति निकोला सारकोजी की सरकार के कदम को संविधान के खिलाफ बताया है.

जुलाई के अंत में फ्रांसीसी अधिकारियों ने 100 से अधिक रोमा शिविरों को भंग कर दिया था और 1000 से अधिक लोगों को उनके जन्म वाले देश बुलगारिया और रोमानिया भेज दिया था. इस साल के आरंभ से फ्रांस ने बुलगारिया और रोमानिया के लगभग 11000 लोगों को वापस भेजा है जिनमें से अधिकांश रोमा थे. यूरोपीय संसद और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग ने भी फ्रांस के कदम की आलोचना की है.

रिपोर्ट: एजेंसियां/महेश झा

संपादन: ए जमाल

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